
क्या आपने कभी की है ऑनलाइन शापिंग? आपके खाते पर है हेकर्स की नजर
भोपाल/ अकसर लोग ऑनलाइन शापिंग करना पसंद करते हैं। आपने भी कभी न कभी कोई न कोई खरीदारी ऑनलाइन मार्केट से की ही होगी। ऑनलाइन खरीदारी का सबसे बड़ा कारण ये है कि, हमें बेस्ट ऑफर्स पर बिना किसी दोड़भाग किये घर पर पसंद की चीज मुहय्या हो जाती है। लेकिन, अकसर देखा जाता है कि, लोग ज्यादा अच्छे ऑफर के लालच में फंसकर फर्जी साइट से खरीदारी कर लेते हैं, जिसके परिणाम स्वरूप उन तक वो प्रॉडक्ट तो पहुंचता नहीं है, साथ ही खाते से पैसे अलग कट जाते हैं। केश ऑन डिलिवरी के कैस में भी हमें सामान तभी मिलता है, जब हम सामान रिसीव कर लें। ऐसे में पेमेंट देने तक हमें पता नहीं होता कि, जो सामान हमने मंगाया है, हकीकत में वो है भी या नही। कई बार कैश ऑन डिलिवरी के केस में भी लोगों के साथ फ्रॉड के मामले सामने आ चुके हैं।
पुलिस गिरफ्त में आए सायबर फ्रॉड
हालही में राजधानी भोपाल की सायबर पुलिस ने ऐसे ही एक फर्जी वेबसाइट के जरिये लोगों से पैसे ऐंठने वाले गिरोह को गिरफ्तार किया है। जो बेस्ट ऑफर्स देकर ग्राहकों ठगते थे। सायबर पुलिस के मुताबिक, कोई बार तो ये हैकर्स ग्राहक के खाते से पूरे के पूरे रुपये तक साफ कर दिया करते थे। अकसर आपने देखा होगा, कि आप फेसबुक, यू ट्यूब, या गूगल पर कोई भी चीज सर्च करते हैं, तो आगे जाकर इन प्लेटफॉम्स पर आपके सामने उसी से रिलेटेड चीजों के नोटिफिकेशन आने लगते हैं। यानी आपकी सर्च के अनुसार ही चीजें एड के माध्यम से आपके सामने आती रहती है। ताकि, आप उसे देखने की इच्छा रखें।
कैसे करें असली और नकली वेबसाइट में अंतर?
कुछ ऐसी ही प्रकृिया हेकर्स भी अपनाते हैं। कई बार आपके फोन पर कई कंपनियों के मेसेज या मेल आते हैं, जिनमें आपके द्वारा खोजी गई चीजों के अच्छे ऑफर्स में खरीदने की बात कही जाती है। ये फार्मूला ऑथेंचिक कंपनियां भी अपनाती हैं और फेक कंपनियां (हेकर्स) भी। इसका सीधा उद्देश्य ग्राहक की इच्छा के मुताबिक उसे बेस्ट प्राइज पर चीज मुहैय्या कराना और खुद भी कमाना होता है। लेकिन, कई बार फेक कंपनी के झांसे में आकर हम फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि, इनमें से असली और नकली की पहचान कैसे की जाए। अगर आप इसकी पहचान कर लेंगे तो, ऑनलाइन शापिंग के दौरान फ्रॉड से बच सकेंगे। ये फर्क जानने के लिए हमें कुछ चीजों को जानना होगा, जो किसी रजिस्टर्ड साइट और फेक साइट में अंतर कराती है।
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फर्जी साइट्स की ऐसे करें पहचान
किसी भी कंपनी के असली या फेक होने की पहचान हमें इंटरनेट के माध्यम से पता लग सकती है। इसकी जानकारी देने के लिए इंटरनेट पर पहले से ही कई वेबसाइट्स उपल्बध हैं। इनमें एक वेबसाइट का नाम urlvoid.com है। इस वेबसाइट की मदद से आप जान सकेंगे कि, कंपनी कितने समय से ऑनलाइन बिजनस कर रही है और उसकी लीगलिटीज क्या हैं। नेट पर इसके अलावा और भी कई टूल मौजूद हैं जिनकी मदद से हम जान सकते हैं कि, कंपनी की वेबसाइट का डोमेन कब लिया गया था और ये साइट कब से ऑनलाइन है। ये जानकारी हमें गूगल की ही एक साइट toolsvoid.com दे सकती है।
साइट पर जाने के बाद आपके लेफ्ट साइड में MORE TOOLS का ऑप्शन नजर आएगा, जिसमें नीचे की ओर Host who is looking नजर आएगा। इसपर आपको कंपनी से संबंधित पूरी जानकारी मिल जाएगी कि, कंपनी कितनी पुरानी है और कब तक उसका URL वैलिड है।
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-किसी भी कंपनी की वेबसाइट के नीचे जाकर उसके कॉपीराइट की इन्फ़र्मेशन जरूर देखें। अगर कंपनी असली लगती है तो उसके नाम के साथ वैट आई डी भी देखनी चाहिए। किसी भी कंपनी के बारे में आप गूगल पर भी जानकारी ली जा सकती है।
-जिस किसी वेबसाइट के URL के आगे HTTPS नहीं लगा होता, वो सेक्योर साइट नहीं है आप कभी भी उससे किसी तरह की खरीदारी ना करें।
-रजिस्टर्ड वेबसाइट पर URL के आगे हरे लॉक का निशान लगा होता है। जिस साइट से किसी भी तरह का लेनदेन कर रहे हैं, पहले उसकी जांच कर लें कि उसपर ल़क का निशान है या नहीं। अगर नहीं है तो उससे ट्रांसेक्शन करने से बचें।
-जो कंपनी आपको ऑफर दे रही है पहले उसकी वेबसाइट के होम पेज पर जाकर Contact पर क्लिक करें। अगर आपको उसमें उनके बारे में ऐडरेस जैसी जानकारी ना मिले तो ऐसी साइट पर शॉपिंग करने से बचें। क्योंकि किसी भी रजिस्टर्ड वेबसाइट को नियमानुसार अपना पूरा पता लिखना होता है। कई फेक साइट्स एड्रेस तो लिख लेती हैं, लेकिन वो स्पष्ट नहीं होती। अगर किसी वेबसाइट के एड्रेस में भी कोई गलती नजर आए तो वो भी फर्जी हो सकती है, ऐसी साइट से खरीदारी या किसी भी तरह की परमीशन देने से बचें।
Published on:
14 Jan 2020 07:49 pm
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