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आलमी तब्लीगी इज्तिमा समापन आज: ग्लोबल कनेक्ट प्वाइंट बना भोपाल, 300 निकाह, 240 तरह के दुनियाभर के व्यंजन रहे खास

Alami Tablighi Ijtima 2025: राजधानी भोपाल में दुनियाभर का सबसे बड़ा आयोजन आलमी तबलिगी इज्तिमा का आज अंतिम दिन, जाने इस बार क्या रहा खास, क्यों चर्चा में बनी रहीं वयवस्थाएं...

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Aalami Tablighi Ijtema 2025

भोपाल में होता है दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इज्तिमा, समापन थोड़ी देर में। (Photo Source- Patrika)

Alami Tablighi Ijtima 2025: भोपाल के बाहरी इलाके ईंटखेड़ी में शुक्रवार तड़के फजर की नमाज के साथ 78वां तब्लिगी इज्तिमा शुरू होते ही माहौल एकदम बदल गया। यहां तक कि मौसम ने भी करवट बदल ली। आसमान में ठंडी हवाएं थीं, तो जमीन पर लाखों कदमों की आहट, नवाबी शहर में सिर्फ एक ही चर्चा, यहां दुनिया भर के लोग आए हैं, एक ही जगह ठहरे हैं और एक ही मकसद के लिए जमा हुए हैं। ये सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर क मानवीय मेल-जोल है, जहां 19 देशों से जमातें आईं। 12 लाख से ज्यादा लोग इस आयोजन के गवाह बन गए। चार दिवसीय इस आयोजन का आज सोमावार को फज्र की नमाज के बाद समापन होने वाला है। लेकिन एक चर्चा छोड़ कर जा रहा है, 300 निकाह, 240 तरह के फूड स्टॉल और हर साल की तरह कई बेहतरीन व्यस्थाएं जो दुनिया भर के आयोजकों की प्रेरणा बन जाती हैं। यहां तक कि दिल्ली ब्लास्ट के बाद सुरक्षा व्यवस्था के ऐसे इंतजाम जो मिसाल बन गई। यहां जानें क्यों

पहले ही दिन 300 निकाह, गवाह बने देश-दुनिया के लाखों लोग

इज्तिमा की शुरुआत होते ही पहला दिन सैकड़ों जोड़ों की जिंदगी में खुशियां लाया। यहां एक ही दिन में 300 निकाह संपन्न हुए। सादगी, पारदर्शिता और पूरी धार्मिक प्रक्रिया के साथ हुए विवाह इज्तिमा की पहचान बने। जहां कोई दिखावा नहीं होता, बल्कि सामुदायिक, कौमी एकता और आध्यात्मिक अनुशासन का हिस्सा होता है। निकाह की रस्म में दूर-दराज से आने वाले परिवार भी शामिल हुए। कई दूल्हे भोपाल से थे। दूल्हा-दुल्हन इसे अपनी नई जिंदगी का पवित्र स्थान मान रहे थे। मौलाना यूसुफ़ ने नवदम्पतियों से बातचीत की कि शादी के बाद उनसे किस तरह के आचरण की अपेक्षा की जाती है।

240 फूड स्टॉल, यहां दिखे दुनियाभर के लजीज पकवान

इज्तिमा स्थल पर 240 फूड स्टॉल लगाए गए। दिलचस्प ये था कि इन सैकड़ों स्टॉल्स पर भोपाल समेत देश-दुनिया के स्वादिष्ट व्यंजन शामिल थे। बिरयानी से लेकर दक्षिण भारत तक का खाना। अफ्रीकी देशों के हलाल व्यंजन से लेकर मध्य एशिया का ट्रेडिशनल फूड भी मेहमानों को बेहद पसंद आया। दिलचस्प ये कि स्टॉल्स पर कमाई नहीं बल्कि, सेवा का भाव नजर आया, यहां मनपसंद खाने के लिए मेहमानों को बहुत ही कम कीमत चुकानी पड़ी। सबकुछ सस्ता था।

120 एकड़ में पांडाल, 250 एकड़ में पार्किंग

इस साल की खासियत ये भी रही कि आने वाले मेहमानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इज्तिमा स्थल की सुविधाओं में 20% का इजाफा किया गया था। 120 एकड़ में पांडाल लगाए गए। पार्किंग का एरिया 250 एकड़ तक फैला था। वहीं पूरा इज्तिमा स्थल 600 एकड़ में विस्तृत किसी छोटे शहर सा बसाया गया था। इसमें मेडिकल कैंप, लाइटिंग की पर्याप्त व्यवस्था। पीने का पानी, मोबाइल टॉयलेट, ट्रैफिक रूट सबकुछ एक बेहतरीन प्लानिंग के साथ किया गया। हर बार की तरह ये व्यवस्थाएं चर्चा का विषय बनीं। अधिकारियों ने आयोजन की व्यवस्थाओं के बारे में बताया कि अग्निशमन दल की गाड़ियाँ भी 24 घंटे तैयार रहे।

19 देशों से आईं जमातें

साउथ ईस्ट एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व देशों से हजारों लोग भोपाल पहुंचे हैं। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और एयरपोर्ट इन दिनों एक ही तरह का दृश्य खास बना रहा, हाथों में बैग, कंधे पर चादर और चेहरों पर सुकून। कई जमातें हफ्तों की यात्रा करके यहां पहुंची हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इज्तिमा के चार दिन रूह तक उतरने वाले होते हैं, जो इंसान को पूरी तरह बदल देते हैं। पाकिजगी और नेकी की राह दिखाने वाले।

हर दिन चार खुतबे हुए

बता दें कि फज्र, जुहर, अस्र और मगरिब के बाद यहां चार खुतबे हुए। जिनमें वक्ताओं ने धर्म और इबादत के साथ ही अल्लाह के मकसद को जायरीनों, उपस्थित मेहमानों को समझाया। समिति के सदस्य उमर हफीज ने कहा कि प्रत्येक खुतबा समय पर दिया गया। वहीं धार्मिक शिक्षाओं, सामाजिक सुधार और समुदाय के कल्याण पर केंद्रित होगा।

पहले दिन, मुफ्ती अजीज ने अल्लाह की ताकत और उसके नूर की व्यवस्था पर एक खुतबा दिया। उन्होंने कहा कि अल्लाह ने बिना किसी मॉडल या सहायता के कायनात(ब्रह्मांड) की बनाई। हर जीव को उसकी आवश्यकताओं के अनुसार जीविका प्रदान करने वाला वही है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मांड का प्रत्येक कण अल्लाह की ताकत दर्शाता है।

मौलाना हारुन भिवंडी ने अपने खुतबे में कहा कि पैगंबर का पहला और सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य जनता को शिक्षित करना था। इस आयोजन में एक पुस्तक स्टॉल भी लगाया गया है। उन्होंने इस्लाम की शिक्षाओं का पालन करने और शांतिपूर्ण जीवन के लिए निर्धारित कर्तव्यों का पालन करने पर जोर दिया।

दिल्ली ब्लास्ट के बाद हाई अलर्ट, चाक-चौबंद रही सुरक्षा व्यवस्था

हाल ही में दिल्ली में हुए बम ब्लास्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इज्तिमा स्थल और उसके आसपास के इलाकों को हाई-सर्विलांस जोन घोषित कर रखा है। रेलवे स्टेशन पर बॉम्ब डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड की टीमें लागातार गश्त और चेकिंग करती रहीं। भोपाल रेलवे स्टेशन और आसपास का पूरा क्षेत्र कड़ी निगरानी में है। इज्तिमा स्थल पर सीसीटीवी, ड्रोन और पुलिस की टुकड़ियां 24 घंटे तैनात रहीं। एमपी पुलिसके मुताबिक यह अंतरराष्ट्रीय आयोजन है, इसमें सभी एजेंसियां, ट्रैफिक, सुरक्षा, रेलवे, मेडिकल एक साथ काम कर रही हैं, ताकि किसी भी स्थिति में प्रतिक्रिया या एक्शन तुरंत लिए जा सकें।

30 हजार वॉलेंटियर हमेशा रहे अलर्ट

यह आयोजन अकेले सरकार या प्रशासन के जिम्मे नहीं रहता। बल्कि समुदाय के 30 हजार से ज्यादा लोग वॉलेंटियर बनकर इसकी व्यवस्थाओं को लेकर हमेशा अलर्ट नजर आए। यहां आने वाले लाखों मेहमानों की खिदमत में 24 घंटे खड़े रहे। भीड़ नियंत्रण से लेकर, दिशा-निर्देश, सफाई, मेडिकल सहायता और खाने की व्यवस्थाओं से लेकर हर व्यवस्था पर कड़ी नजर रखते रहे। इस बार वॉलेंटियर्स क्यूआर कोड के कारण अपनी सेवाओं को लेकर और जिम्मेदार नजर आए। धार्मिक आयोजन में टेक्नीक के इस्तेमाल से व्यवस्थाओं का जायजा और आसान हो गया। सभी वॉलेंटियर्स को क्यूआर कोड दिए गए थे, जिसे स्कैन करते ही वे आयोजन स्थल की हर व्यवस्था की जानकारी प्राप्त कर सकते थे।

इसलिए भी खास रहा ये आयोजन

इज्तिमा का अर्थ केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि ये एक संदेश भी देता है। परिवार जोड़ने का, सामाजिक या कौमी एकता का, इबादत और सीख का, विकल्पों से भरी दुनिया में सरलता से और जरूरतों के हिसाब से जीने की प्रेरणा देने वाला भी। यह आयोजन बतात है कि कैसे व्यवस्था और प्रबंधन के मजबूत होने से लाखों की भीड़ में भी सुरक्षा से लेकर अन्य इंतजामों और लोगों के बीच एक संतुलन स्थापित किया जा सकता है।