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राज्य शासन का बड़ा कदम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को मिलेगा लाभ

मध्य प्रदेश राजय शासन ने बड़ा कदम उठाते हुए निर्वाचन अधिकारियों से आग्रह किया है। यदि यह आग्रह माना जाता है तो, इसका सीधा फायदा मध्य प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को मिलेगा। पूरा मामला जानने के लिए पूरी खबर जरूर पढ़ें।

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भोपाल। मध्य प्रदेश राजय शासन ने बड़ा कदम उठाते हुए निर्वाचन अधिकारियों से आग्रह किया है। यदि यह आग्रह माना जाता है तो, इसका सीधा फायदा मध्य प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को मिलेगा। पूरा मामला जानने के लिए पूरी खबर जरूर पढ़ें।

दरअसल प्रदेश में 2023 के चुनावों को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। इस दौरान कलेक्टर को पत्र लिखे जाने के बावजूद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को अतिरिक्त कार्यभार सौंपा जा रहा है। चुनावी कार्य में उनकी ड्यूटी लगाई जा रही है। इसके बाद विभाग के उप सचिव ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र लिखकर कार्यकर्ताओं को चुनावी ड्यूटी से मुक्त रखने का अनुरोध किया है। आपको बता दें कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की ड्यूटी बूथ लेवल अधिकारी के तौर पर लगाई गई है।

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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बड़ी राहत
दरअसल मध्य प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की ड्यूटी चुनाव कार्य में बूथ लेवल अधिकारी के तौर पर लगाई जा रही है। मामले को लेकर पूर्व में भी कलेक्टर्स को पत्र लिखा जा चुका है। बावजूद इसके कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगाई जा रही है। जिसपर अब शासन ने निर्वाचन पदाधिकारी से बड़ी मांग करते हुए अनुरोध किया है। राज्य शासन की ओर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को चुनावी ड्यूटी से बड़ी राहत दी गई है।

उप सचिव ने पत्र में लिखी है यह बात
अब महिला एवं बाल विकास के उप सचिव अजय कटेसरिया ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र लिखा है। अपने लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सरकारी कर्मचारी नहीं है। इसलिए उन्हें चुनाव जैसे कार्य में लगाने का कोई औचित्य नहीं है। विभाग के उप सचिव ने अपने लिखे पत्र में चुनावी कार्य में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ड्यूटी नहीं लगाने की बात कही है। उन्होंने बकायदा तर्क देते हुए कहा है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं का पद मानदेय सेवी है। बावजूद इसके उन्हें चुनाव कार्य के लिए किसी तरह का कोई मानदेय भी नहीं दिया जाता है।

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बदल जाएगी उनकी प्राथमिकता
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को दूसरे कार्यों में लगाया जाएगा तो, कुपोषण अभियान पूरी तरह से प्रभावित होंगे। जबकि उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय की ओर से इसे सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में उनकी ड्यूटी चुनावी कार्य में ना लगाकर उन्हें अभियान को पूरा करने दिया जाए।