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FACTS: यह है एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद, बनने में लग गए थे 85 साल

भोपाल का इज्तिमा दुनियाभर में सबसे बडा़ इस्लामिक आयोजन बन गया है। यह आयोजन 1947 में मात्र 14 लोगों ने मिलकर शुरू किया। mp.patrika.com आपको...।

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भोपाल

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Manish Geete

Nov 25, 2017

ijtema 2017

Taj-ul-Masajid bhopal

भोपाल का इज्तिमा दुनियाभर में सबसे बडा़ इस्लामिक आयोजन बन गया है। यह आयोजन 1947 में मात्र 14 लोगों ने मिलकर शुरू किया। mp.patrika.com आपको बताने जा रहा है एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद के रोचक फेक्ट्स के बारे में...।

भोपाल। नवाबों के कार्यकाल में शुरू हुआ इज्तिमा अब विश्व के सबसे बड़े इस्लामिक आयोजनों में से एक बन गया है। यह आयोजन 1947 में मात्र 14 लोगों ने मिलकर शुरू किया। धीरे-धीरे इस आयोजन का महत्व इतना बढ़ा कि यहां आने वाले जमातों की संख्या 15 लाख तक पहुंच गई है। यह 15 लाख लोग तीन दिनों तक भोपाल में रहते हैं। आलमी तब्लीगी इज्तिमा का यह 70वां आयोजन है। पहले यह आयोजन एशिया की सबसे बड़ी ताजिल मस्जिद में होता था। हर साल धर्मावलंबियों की संख्या बढ़ती जा रही है।

mp.patrika.com आपको बताने जा रहा है एशिया की सबसे बड़ी ताज-उल-मसाजिद के रोचक फेक्ट्स...।

ताजुल मस्जिद के आसपास भी बड़ी संख्या में लोग नवाज के लिए एकत्र होते थे। जगह की समस्या को देखते हुए कुछ वर्षों पहले इसे भोपाल से लगे ईंटखेड़ी क्षेत्र में शिफ्ट कर दिया गया। लेकिन, आज भी दुनियाभर में ताजुल मस्जिद का बडा़ महत्व है।


दिल्ली की जामा मस्जिद को भारत की सबसे बड़ी मस्जिद माना जाता था, लेकिन शोध के मुताबिक भोपाल की बेगम सुल्तान शाहजहां द्वारा (1844-1901) में बनाई गई ताजुल मसाजिद को भारत की ही नहीं एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद माना गया।

शाहजहां बेगम ने शुरू किया था इसका निर्माण
बहादुर शाह ज़फर की हुकुमत में शाहजहां बेगम ने इसका काम शुरू करवाया था। लेकिन, बीच में शाहजहां बेगम की म्रत्यु के बाद उनकी बेटी को यह कार्य संभालना पड़ा।


सुल्तान जहां बेगम ने इसका निर्माण कार्य जारी रखा। पैसों की कमी के कारण बाद में इसका निर्माण कुछ समय के लिए रुक गया था। मस्जिद में दो 18 मंज़िला ऊंची मिनारे हैं, जो संगमरमर के गुंबजों से सजी है।

इसके अलावा मस्जिद में तीन बड़े गुंबज भी हैं, जो मस्जिद की खूबसूरती में चार चांद लगाती है। मस्जिद में एक बड़ा-सा दालान, संगमरमर का फर्श और स्तंभ है। मोतिया तालाब और ताज-उल-मस्जिद को मिलाकर मस्जिद का कुल क्षेत्रफल 14 लाख 52 हजार स्क्वेयर फीट है।

यह भी है खास
1. ताजुल मसाजिद का मतलब 'मस्जिदों का ताज' होता है।
2. इसका कुल क्षेत्रफल 14 लाख 52 हजार स्क्वेयर फीट है।
3. दिल्ली की जामा मस्जिद से ही इसकी प्रेरणा ली गई थी।
4. मस्जिद के ऊपर संगमरमर से बने तीन विशाल गुंबज और लाल गुलाबी पत्थरों का इस्तेमाल इसे खास बनाते है।