
Pain Relief Treatment- मध्यप्रदेश के भोपाल, नरसिंहपुर और बड़वानी में ऐसे ही थैरेपिस्ट हैं, जो आज भी छेनी और हथौड़ी से दर्द वाले स्थान पर प्रेशर देकर दर्द दूर करने का दावा करते हैं। (फोटो एआई जनरेटेड)
Pain Relief Treatment- छेनी-हथौड़ी का नाम सुनते ही पत्थर को तराश कर मूर्तियां बनाने वाले कलाकार की ओर ध्यान जाता है, लेकिन मध्यप्रदेश में छेनी-हथौड़ी का उपयोग किसी पीड़ित के इलाज के लिए हो तो हैरानी होती है। एमपी के यह अनूठे थेरेपिस्ट अपनी इसी कला के लिए चर्चाओं में रहते हैं। यह छेनी और हथौड़ी से शरीर के पुराने दर्द का इलाज करने का दावा करता है। उनका दावा है कि 4 से 5 बार की प्रक्रिया में सालों पुराने दर्द गायब हो जाते हैं।
वर्ल्ड फीजियोथैरेपी डे (World Physical Therapy Day) के अवसर पर पत्रिका.कॉम पर जानिए पारंपरिक वैद्यों के बारे में…।
एमएस मकरानी नाम के एक वैद्य भोपाल में कई लोगों के दर्द ठीक करने का दावा करते हैं। वे लकड़ी की छेनी और हथौड़ी से पीड़ित के शरीर के अलग-अलग हिस्सों में दर्द वाले क्षेत्र पर हल्का सा वार करते हैं। इनकी छेनी और हतौड़ी लकड़ी की होती है। वैद्य मकरानी इस पद्धति से साइटिका, शरीर के लॉक होने, नसों से जुड़ी तकलीफ, रीढ़ की हड्डी के दर्द और पैरों के तलवों में दर्द जैसी समस्याएं ठीक करने का दावा करते हैं। इनसे उपचार कराने के लिए दर्द से पीड़ित कई लोग कतार भी लगाते हैं।
वैद्य मकरानी ने 40 साल पहले अपने गुरु ओमकार नाथ पांडा बाबा से इस पद्धति को सीखा था। उनके मुताबिक इसे आयुर्वेद की पुरानी उपचार पद्धति और एक्यूप्रेशर पद्धति से जोड़ा जाता है। यह विधि अलाबु कर्म भी कहलाती है। जबकि चीन में इस विधि को कटिन ग्लास थैरेपी बोलते हैं। वैद्य मकरानी सागर विश्वविद्यालय के स्वदेशी ज्ञान अध्ययन केंद्र में सलाहकार समिति के सदस्य भी रह चुके हैं। मकरानी का दावा है कि शरीर में दर्द चाहे पुराना हो या नया, छेनी-हथौड़ी से की जाने वाली प्रक्रिया के 4 से 5 बाद में राहत मिल सकती है।
मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर में रहने वाले हाजी साहब भी उन लोगों में से रजिस्टर्ड है और अपनी पद्धति से सन् 2000 से भोपाल के संजीवनी में पीड़ितों का इलाज लोहे की कील और लकड़ी के हथौड़े से हल्के हाथों से मारकर दर्द गायब कर देते थे। हाजी साहब बताते हैं कि उन्होंने बताया कि वे तमिलनाडू से परंपरागत आयुर्वेद में रजिस्टर्ड भी हैं। वे आयुर्वेदिक पद्धति से लोगों का इलाज भी करते हैं। खुद जंगलों में जाकर जड़ी-बूटियां तलाश कर लाते हैं और उनसे दवा बनाते हैं।
ऐसे ही बड़वानी में थेरेपिस्ट भगवान हेमाजी चौधरी का भी कभी चर्चाओं में रहा। एक किसान व्यक्ति ने लकड़ी के बने इन उपकरणों से लोगों का इलाज करना शुरू किया, उनका दावा था कि लोगों को आराम मिलने लगा तो वे निःशुल्क लोगों की मदद करने में जुट गए थे।
लास वेगास में भी यह पद्धति चर्चित है। वहां इसे हैमर एंड चीजल थेरेपी (Hammer and Chisel Therapy) कहा जाता है। यह तकनीक स्पोर्ट्स जगत में भी काफी लोकप्रिय हुई है और जोड़ों के दर्द से परेशान कई खिलाड़ी इससे लाभांवित हो सकते हैं।
(पत्रिका.कॉम इनके दावों की पुष्टि नहीं करता है और न ही बढ़ावा देता है।)
Updated on:
08 Sept 2026 08:33 pm
Published on:
08 Sept 2026 08:29 pm
