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Bone Surgery – प्लास्टर बांधकर बिस्तर पर पड़े रहने की झंझट खत्म, अब तीन दिन में जुड़ जाएगी टूटी हड्डी

हड्डी की सर्जरी का काम डॉक्टर्स के साथ रोबोट भी करेंगे। इतना ही नहीं, नेल्सकॉन तकनीक से टूटी हड्डी जल्द ही जोड़ी भी जा रही है।

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देश-दुनिया की तरह एमपी में भी हादसों में हड्डी टूटने की घटनाएं तेजी से बढ़ रहीं हैं। ऐसे मामलों में मरीज को कई दिनों तक दिक्कत झेलनी पड़ती है। हड्डी जुड़ने में काफी वक्त लगता है, प्लास्टर बांध कर मरीज को अस्पताल या घर में बिस्तर पर पड़ा रहना पड़ता है। हालांकि इन झंझटों से अब छुटकारा मिल जाएगा। अब हड्डी की सर्जरी का काम डॉक्टर्स के साथ रोबोट भी करेंगे। इतना ही नहीं, नेल्सकॉन तकनीक से टूटी हड्डी जल्द ही जोड़ी भी जा रही है।

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एमपी की राजधानी भोपाल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया में यह काम होगा। यहां घुटने और कूल्हे की टूटी हड्डी जोड़ने के लिए रोबोटिक सर्जरी जल्द शुरु करने की तैयारी चल रही है। इससे नी एंड हिप रिप्लेसमेंट के लिए हमीदिया अस्पताल आनेवाले मरीजों को भी काफी सहूलियत हो जाएगी।

एम्स में ही घुटने और कूल्हे की रोबोटिक सर्जरी-एमपी में अभी सिर्फ प्राइवेट अस्पतालों में ही नी एंड हिप रिप्लेसमेंट के लिए सर्जरी की सुविधा है। प्रदेश के सरकारी अस्पताल में अभी केवल एम्स में ही घुटने और कूल्हे की रोबोटिक सर्जरी की जा रही है। इस प्रकार एम्स को छोड़ किसी अन्य सरकारी अस्पताल में केवल हमीदिया में ही यह सुविधा पहली बार शुरू होगी। यह सर्जरी इसी साल दिसंबर तक शुरु करने का प्रयास चल रहा है।

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नेल्सकॉन तकनीक
हमीदिया में अब बड़ी हड्डियों को जोडऩे के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे लोगों को कम समय में जल्द आराम मिल रहा है। अस्पताल के अस्थि रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि इस तकनीक में हड्डी जोडऩे के लिए टूटी हड्डी को नट से कस दिया जाता है। इससे व्यक्ति को तीन दिन में ही आराम मिल जाता है। टूटी हड्डी तीन दिन में ही जुड़ जाती है।

हमीदिया में रोबोटिक सर्जरी के संबंध में गांधी मेडिकल कालेज के अधिकारी बताते हैं कि बेंगलुरु के एक निजी अस्पताल की सहायता से यह सुविधा दी जाएगी। गांधी मेडिकल कालेज के डीन डा. सलिल भार्गव बताते हैं कि रोबोटिक सर्जरी का डेमो हो चुका है। तकनीकी इलाज के लिए विशेषज्ञों से लगातार संपर्क किया जा रहा है।

तीन दिन बाद ही बिस्तर छोड़ देगा मरीज
खास बात यह है कि इससे सर्जरी काफी आसान हो जाएगी। रोबोटिक सर्जरी फेल होने की आशंका बेहद कम होती है। सर्जरी में रिप्लेसमेंट बहुत सटीक होता है। मरीज को तीन दिन बाद ही अस्पताल के बिस्तर से मुक्ति मिल जाती है।

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