
Bhopal Western Bypass: भोपाल वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट को कैबिनेट ने दी मंजूरी (फोटो सोर्स- Chatgpt)
Bhopal Western Bypass construction: मध्य प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए भोपाल के वेस्टर्न बायपास फोरलेन प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिल गई है। भोपाल में बढ़ते ट्रैफिक दबाव और शहर से दूसरे शहरों के बीच आसान आवाजाही को देखते हुए यह प्रोजेक्ट अहम माना जा रहा है। बायपास तैयार होने के बाद भोपाल के साथ जबलपुर, नर्मदापुरम और इंदौर की तरफ जाने वाले यात्रियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रोजेक्ट में कुछ अहम बदलाव किए गए हैं। इसके तहत कई रूट और सड़क की लंबाई में भी बदलाव किया गया है।
कैबिनेट ने भोपाल वेस्टर्न बायपास फोरलेन प्रोजेक्ट के लिए 3225 करोड़ 51 लाख की पुनरीक्षित स्वीकृति दी है। इस फोरलेन सड़क को हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) पेव्ड शोल्डर के साथ बनाई जाएगी। इसकी कुल लंबाई 35.61 किलोमीटर होगी। फोरलेन के निर्माण और पूर्व के कार्यों के लिए भी 548 करोड़ 29 लाख रुपए भी राज्य की बजट से खर्च किए जाएंगे।
बायपास के निर्माण के बाद जबलपुर और नर्मदापुरम की ओर से इंदौर की तरफ आने-जाने वाले वाहनों को भोपाल का चक्कर नहीं काटना होगा। इससे इंदौर की दूरी 21 किलोमीटर तक कम हो जाएगी।
बता दें कि, भोपाल वेस्टर्न बायपास फोरलेन प्रोजेक्ट की लंबाई पहले 40.90 किलीमीटर निर्धारित की गई थी, जिसके लिए 2,981 करोड़ 65 लाख रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति 4 सितंबर 2023 को प्रदान की गई थी। बायपास का एक हिस्सा भोपाल-जबलपुर रोड पर मंडीदीप के पास इटायाकलां से शुरू होकर भोपाल-देवास मार्ग के फंदा गांव के तक बनाया जाना था।
इस हिस्से में रातापानी का क्षेत्र भी शामिल था, जिसे साल 2024 में टाइगर रिजर्व घोषित किया जाना।
भोपाल के बड़े तालाब का कैचमेंट क्षेत्र को लेकर पर्यावरण विभाग का नोटिफिकेशन।
राज्य पुरातत्व विभाग की अंतर्गत समसगढ़ का प्राचीन धरोहर शिवमंदिर का भी आ रहा था।
इन कारणों की वजह से इटायाकलां से फंदा गांव तक बनने वाले हिस्से में बदलाव किया गया जिससे, परियोजना की लागत में पूर्व स्वीकृति से 8.18 प्रतिशत वृद्धि हो गई और बायपास की लंबाई घट गई।
प्रोजेक्ट निर्माण की लागत का 40 प्रतिशत यानी 599 करोड़ 44 लाख रूपए का भुगतान कंसेशन अनुबंध में निर्धारित माइलस्टोन प्राप्त करने पर 10 किश्तों में एवं नेट पॉजिटिव कॉज की राशि का भुगतान निर्माण अवधि में अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार, राज्य राजमार्ग निधि के माध्यम से किया जाएगा। वहीं, परियोजना निर्माण लागत की बची 60 प्रतिशत राशि यानी 1,910 करोड़ 42 लाख रुपए का भुगतान एन्यूटी, ओएंडएम एवं ब्याज सहित संचालन अवधि में 15 वर्षों तक 6 माही एन्यूटी के रूप में राज्य बजट के माध्यम से किया जाएगा।
Updated on:
02 Sept 2026 02:35 pm
Published on:
02 Sept 2026 01:09 pm
