
90% तक ठीक हो सकता है बच्चों का कैंसर (फोटो सोर्स: Patrika)
Bhopal News : देश में बच्चों के कैंसर के इलाज की सुविधाएं तेजी से बढ़ी हैं, लेकिन बीमारी की वास्तविक तस्वीर अब भी पूरी तरह सामने नहीं है। यही स्थिति मध्य प्रदेश समेत भोपाल में भी दिखाई देती है। यहां कैंसर की जनसंख्या आधारित रजिस्ट्री और कुछ प्रमुख अस्पतालों के आंकड़े उपलब्ध हैं, लेकिन इनसे प्रदेश के हर बच्चे में होने वाले कैंसर की वास्तविक संख्या का पता नहीं चलता। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर विशेषज्ञ केंद्र तक नहीं पहुंच पाने वाले बच्चों के आंकड़ों का पता लगाना बड़ी चुनौती है। जानकार बताते हैं कि, जितने कैंसर पीड़ित बच्चों का उपचार मिल रहा है, उसके दो गुना बच्चे उपचार के दायरे से बाहर हैं।
आइसीएमआर-राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम के अनुसार, भोपाल में जनसंख्या आधारित कैंसर रजिस्ट्री 1986 से गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में संचालित है। इसका दायरा भोपाल जिले के शहरी क्षेत्र तक सीमित है। जिले के ग्रामीण क्षेत्र रजिस्ट्री के दायरे में नहीं हैं। प्रदेश में पांच अस्पताल आधारित कैंसर रजिस्ट्रियां हैं, जिनमें जीएमसी के अतिरिक्त ए्ल भोपाल और जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल भोपाल शामिल हैं। आइसीएमआर की 2012-16 की रिपोर्ट में भोपाल की कैंसर रजिस्ट्री में 0-14 वर्ष के बच्चों में 424 कैंसर मामले दर्ज हुए थे।
एम्स भोपाल में पिछले सात वर्षों में करीब 1,250 बच्चों का पंजीयन हुआ। इनमें 300 बच्चे अभी उपचार चल रहा है। 200 से अधिक बच्चे उपचार से ठीक हो चुके हैं। संस्थान के बाल रक्त एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र चौधरी के अनुसार, कुछ मरीज धार्मिक मान्यताओं या वैकल्पिक इलाज से जुड़ी गलत धारणाओं के कारण इलाज से इनकार करते हैं या बीच में उपचार छोड़ देते हैं। उपचार के पहुंच से दूर परिवार के कैंसर पीडि़त बच्चों का उपचार नहीं हो पाता है। वास्तव में कैंसर पीडि़त बच्चों की संख्या का पता लगाने में बड़ी चुनौती है।
राष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञों के अनुसार ल्यूकेमिया बच्चों में सबसे आम कैंसर है और कई मामलों में इसकी इलाज से ठीक होने की दर 80-90 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। लेकिन देरी से पहचान, बीमारी की गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचना, संक्रमण, कुपोषण, आर्थिक परेशानी और लंबे इलाज को पूरा न कर पाना बच्चों की जीवित रहने की संभावना प्रभावित करते हैं।
एम्स भोपाल में कैंसर उपचार की उन्नत सुविधाएं उपलब्ध हैं और संस्थान आसपास के राज्यों से आने वाले मरीजों को भी सेवाएं दे रहा है। कैंसर विशेषज्ञ डॉ. ओपी सिंह के अनुसार जरूरत सिर्फ उपचार क्षमता बढ़ाने की नहीं है, बल्कि बच्चों में कैंसर की समय पर पहचान, ग्रामीण क्षेत्रों से विशेषज्ञ केंद्र तक पहुंच और पूरे इलाज की निगरानी के साथ मजबूत कैंसर रजिस्ट्री की है। इससे यह पता चल सकेगा कि प्रदेश में वास्तव में कैंसर पीडि़त बच्चे कितना है, किन क्षेत्रों में ज्यादा है और कितने बच्चे इलाज की पहुंच से बाहर हैं।
Updated on:
29 Aug 2026 06:55 am
Published on:
29 Aug 2026 06:55 am
