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पीसीसी चीफ कमलनाथ के पत्र पर सीएम बोले, उनकी ट्यूबलाइट देर से जलती है

शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पर बोला हमला...। बोले- जब सर्वे शुरू हो गया उसके बाद लिखते हैं चिट्ठी...।

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भोपाल

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Manish Geete

Mar 22, 2023

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भोपाल। मध्यप्रदेश में हाल ही में हुई बारिश और ओलावृष्टि से फसलें बर्बाद हो गई। इसे लेकर सियासत भी गरम है। हाल ही में कमलनाथ के पत्र के बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि उनकी ट्यूब लाइट देरी से जलती है। सीएम का कहना था कि जब सर्वे शुरू हो गया उसके बाद वे चिट्ठी लिखते हैं।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कहा कि झूठ के साथ कमलनाथ। कांग्रेस का नीति वाक्य होना चाहिए। कमलनाथजी की ट्यूबलाइट देरी से जलती है, जब सर्वे शुरू हो गया उसके बाद वे चिट्ठी लिखते हैं. ओलावृष्टि से पीड़ित किसानों के सर्वे का काम हमने पहले ही शुरू कर दियाथा। वे चिट्ठी देरी से लिखते हैं। कहीं जाते हैं नहीं।

शिवराज ने कहा कि कमलनाथ जी के पास सत्ता में आने के लिए केवल एक ही सहारा है वो है झूठ। पिछले चुनाव के पहले आत्मविश्वास के साथ इन्होंने झूठ बोला था। कांग्रेस की यही फितरत रही है।

और क्या बोले सीएम

शिवराज ने कहा कि यह मध्यप्रदेश का सौभाग्य है कि नरेंद्र मोदीजी और राजनाथ सिंह भोपाल आ रहे हैं। मोदीजी और राजनाथ सिंहजी सेना के कार्यक्रमों में भाग लेंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी बीजेपी के नवीन भवन का शिलान्यास करने आ रहे हैं।

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क्या लिखा था कमलनाथ ने

कमलनाथ ने अपने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में जल्द से जल्द किसानों को फसलों का मुआवजा देने की मांग की थी। कमलनाथ ने लिखा था कि बर्बाद फसलों का तुरंत मुआवजा किसानों को दिया जाए,क्योंकि इस वक्त किसान बहुत परेशानी में हैं। 20 मार्च को कमलनाथ ने कटाक्ष भी किया था कि जिस समय किसान त्राहि त्राहि कर रहा है, उस समय प्रशासन में इस तरह की अफरा-तफरी मुख्यमंत्री की ओर से गंभीर अपराध से कम नहीं है। मैं मुख्यमंत्री से आग्रह करता हूं कि कांग्रेस को कोसना छोड़कर तत्काल किसानों की मदद करें और अधिकारियों की न्यायोजित मांगें मानकर हड़ताल समाप्त कराएं।

अगले ट्वीट में कमलनाथ ने कहा था कि अव्वल तो मुख्यमंत्री को खुद हवाई सर्वेक्षण करके अब तक फसल को हुए नुकसान की सहायता राशि दे देनी चाहिए थी, दूसरी बात यह है कि जब सर्वेक्षण ही कराना था तो पहले से घोषित हड़ताल को रुकवाने के लिए कोई पहल क्यों नहीं की गई? कमलनाथ ने किसानों से बिजली बिल के बकाया राशि और फसल ऋण की वसूली रोकने की मांग की थी।