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एमपी में कई मंत्रियों को कार्यसमिति से हटाया, मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर बढ़ी चिंता

BJP working committee - संघ-संगठन, सिंधिया से जुड़े शुक्ला, तोमर समेत 4 कैबिनेट मंत्री समिति में फिट नहीं, अब कैबिनेट विस्तार को लेकर बेचैन हो रहे मंत्री
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MP ministers removed from the BJP working committee

MP ministers - कार्यसमिति से हटे एमपी के मंत्रियों की बढ़ी चिंता- source Patrika.com

MP ministers - रूपेश मिश्रा, भोपाल. लंबे इंतजार के बाद 23 जून को भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बहुप्रतिक्षित सूची में 106 सदस्यों को शामिल किया, जबकि 40 नेताओं को स्थायी आमंत्रित सदस्य बनने का मौका मिला। पूर्व अध्यक्ष वीडी शर्मा के कार्यकाल में बनाई गई प्रदेश कार्यसमिति में तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह सहित तमाम प्रभावशाली नेताओं को स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया था, जबकि स्थायी आमंत्रित सदस्यों की सूची में 70 साल की उम्र पार कर चुके नेताओं को जगह मिली। प्रभावशाली नेताओं का नाम 106 सदस्यों वाली सूची में शीर्ष पर रखा गया। खास बात ये है कि इस सूची में कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला, प्रद्युम्न सिंह तोमर, करण सिंह वर्मा, नागर सिंह चौहान जैसे 4 कैबिनेट मंत्रियों को जगह नहीं मिली। ये मंत्री संघ, संगठन और सिंधिया गुट से आते हैं। अब इनमें से कुछ मंत्री भविष्य में होने वाले संभावित कैबिनेट विस्तार में स्वयं का स्थान बचाए रखने को लेकर बैचेन बताए जा रहे हैं।

उधर, पार्टी सूत्रों का कहना है 4 मंत्रियों को इसलिए कार्यसमिति में जगह नहीं दी गई क्योंकि वो पार्टी के समीकरण में फिट नहीं बैठ रहे थे। बता दें कि कार्यसमिति में सीएम सहित 18 मंत्रियों के जगह मिली। जिसमें कैबिनेट मंत्री सहित राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कृष्णा गौर का नाम शामिल है।

बता दें कि हाल ही में बीजेपी की नई कार्यसमिति घोषित की गई है। सूची में प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और सीएम मोहन यादव की समन्वय स्पष्ट दिखाई देता है।

इन मंत्रियों को समिति में नहीं मिली जगह

  1. भिंड के मेहगांव से विधायक राकेश शुक्ला नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा का बतौर कैबिनेट मंत्री जिम्मा संभाल रहे हैं। शुक्ला भिंड जिले के इकलौते मंत्री है। शुक्ला संघ पृष्ठभूमि के नेता माने जाते है। 1998 में पहला चुनाव लड़ा था और जीते भी। लेकिन 2013 में पार्टी द्वारा टिकट काटने से नाराज होकर बगवात कर निर्दलीय लड़े और हार गए। 2018 में भी चुनाव हारे लेकिन 2023 में दोबारा विधायक चुने और मंत्री बने। जिन्हें कार्यसमिति में जगह नहीं मिली।
  2. लंबे अर्से तक कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रहे प्रद्युम्न सिंह तोमर कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे। लेकिन बाद में बगावत के दौर में सिंधिया के साथ भाजपा का दामन थामा और शिवराज सरकार में भी मंत्री बने। उसके बाद मोहन सरकार में भी ऊर्जा मंत्री का जिम्मा संभाल रहे हैं। सिंधिया के करीबी नेताओं में माने जाते हैं, लेकिन इस बार कार्य समिति से इन्हें बाहर कर दिया। सिंधिया खेमे के मंत्री तुलसीराम सिलावट को जगह मिली है।
  3. आलीराजपुर विधानसभा क्षेत्र से चौथी बार निर्वाचित हुए नागर सिंह को पहली बार कैबिनेट मंत्री (अजजा विभाग) बनाया गया। तब तक सब अच्छा था लेकिन बात तब बिगड़ गई जब जुलाई 2024 में नागर से वन विभाग लेकर कांग्रेस से भाजपा में आए रामनिवास रावत को यह विभाग मंत्री बनने के बाद दे दिया। तब नागर ने इस्तीफे तक की पेशकश कर दी। नागर की पत्नी अनीता रतलाम-झाबुआ लोकसभा सीट से सांसद हैं। नागर को भी कार्यसमिति में जगह नहीं दी गई।
  4. वर्मा सीहोर जिले की इछावर सीट से 8वीं बार विधायक चुने गए। तीसरी बार मंत्री बने हैं और लगातार दूसरी बार राजस्व मंत्री बने हैं। पूर्व सीएम शिवराज सिंह के दौरान भी राजस्व मंत्री रहे लेकिन कार्यसमिति में जगह नहीं बना पाए। 10 राज्यमंत्री में से 1 को जगह मंत्री मंडल में 10 राज्यमंत्री हैं, इनमें से कृष्णा गौर, धर्मेंद्र सिंह लोधी, दिलीप जायसवाल, गौतम टेटवाल, नारायण सिंह पंवार के पास स्वतंत्र प्रभार है। जबकि नरेन्द्र शिवाजी पटेल, प्रतिमा बागरी, दिलीप जायसवाल और राधा सिंह केवल राज्यमंत्री है। इनमें से राज्यमंत्री (स्वतंत्र) कृष्णा गौर को छोड़ किसी को भी भाजपा प्रदेश कार्य समिति में जगह नहीं मिली।

सियासी गलियारे में कयासबाजी

प्रदेश कार्यसमिति की सूची सामने आने के बाद समूची पार्टी और कार्यकर्ताओं को सिर्फ मंत्री मंडल विस्तार का इंतजार है। लेकिन उससे पहले मौजूदा 4 कैबिनेट मंत्रियों को कार्यसमिति में जगह नहीं मिलने से सियासी गलियारे में कयासबाजी लगाई जाने लगी है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इसे मंत्री मंडल से बाहर का रास्ता दिखाने से जोडऩा ठीक नहीं है। इन्हें कार्यसमिति में इसलिए जगह नहीं दी होगी क्योंकि ये क्षेत्रीय समीकरण, जातीय समीकरण और पार्टी के अन्य मापदंडों में फिट नहीं बैठे होंगे। इसलिए इनका नाम नहीं जोड़ा गया।

10 राज्यमंत्री में से 1 को जगह

मंत्री मंडल में 10 राज्यमंत्री हैं, इनमें से कृष्णा गौर, धर्मेंद्र सिंह लोधी, दिलीप जायसवाल, गौतम टेटवाल, नारायण सिंह पंवार के पास स्वतंत्र प्रभार है। जबकि नरेन्द्र शिवाजी पटेल, प्रतिमा बागरी, दिलीप जायसवाल और राधा सिंह केवल राज्यमंत्री है। इनमें से राज्यमंत्री (स्वतंत्र) कृष्णा गौर को छोड़ किसी को भी भाजपा प्रदेश कार्य समिति में जगह नहीं मिली।