ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि, इस फर्जीवाड़े में कई लोग शामिल हैं, जिनकी शादी पहले ही हो चुकी थीं। उनके नाम पर भी सरकारी सहायता राशि निकाली गई है। इसके अलावा, एक 27 साल के युवक है, योजना के तहत उसकी तीन बेटियों की भी शादी करा दी गई। तीनों के नाम पर 51-51 हजार रुपए स्वीकृत कर पैसे भी दे दिए। कई ऐसे लोग भी सामने आए, जिन्होंने सहायता के लिए आवेदन भी नहीं दिया था। जांच एजेंसी को कई हितग्राहियों के दस्तावेज भी नहीं मिले। माना जा रहा कि घोटाला उजागर होने के बाद अधिकारियों ने भ्रष्टाचार के दस्तावेज गायब कर दिए। एसडीएम के अलावा अन्य कर्मचारियों की भी भूमिका को लेकर जांच की जा रही है। हालांकि, मामला सामने आने के बाद शोभित त्रिपाठी को निलंबित कर दिया गया था।