
चांद देखकर ही क्यों मनाई जाती है ईद, जानिए ईद उल फित्र से जुड़ी ये खास बातें
भोपालःरमजान का मुबारक महीना खत्म होते ही ईद उल फित्र (मीठी ईद) का त्यौहार मनाया जाता है। मजहब-ए-इस्लाम के मुताबिक, अल्लाह ने खुशियों के इस त्यौहार को अपने बंदों को तोहफे में दिया है। अल्लाह की तरफ से इस दिन उन सभी लोगों को खुशिया मनाने का आदेश दिया गया, जिन्होंने रमजान के पूरे महीने अल्लाह के आदेश के मुताबिक (अनुसार) रोजे रखे और उसकी दीगर (अन्य) इबादत की। रमजान में की जाने वाली इबादतों के बदले में अल्लाह कुरआन के जरिये अपने बंदों से कहता है कि, (मायने) 'जिस तरह पूरे रमजान भर तुमने मुझे राजी करने, मुझसे माफी मांगने और खुद को मेरे साए (संरक्षण) में रखने के लिए रोजा रखा, मेरी इबादत की, आज उन इबादतों का बदला देने का समय है। अल्लाह अपने हर इबादत गुजार बंदे से कहता है, 'जाओ और जाकर खुशियां मनाओ, एक दूसरे के साथ खुश रहो, गरीबों को दान करो, ताकि, वो भी बेहतर ढंग से खुशियां मना सकें, एक दूसरे को इस दिन की बधाई दो, क्योंकि मेने (अल्लाह ने) उन सभी लोगों की पिछली बुराइयों को माफ कर दिया है।' यही कारण है कि, ईद उल फित्र के इस त्यौहार को एक दूसरे के साथ खुशियां बांटने के साथ साथ अमन और भाईचारे का त्यौहार माना जाता है।
चांद से शुरु होकर चांद पर खत्म होता है इस्लामिक महीना
इस बार ईद उल फित्र का त्यौहार 5 या 6 जून को मनाया जाएगा। इसमें दो तारीखों का जिक्र इसलिए किया क्योंकि, इस्लामिक महीना चांद दिखने से शुरु होता है और चांद दिखने पर ही खत्म होता है। शव्वाल (इस्लामिक महीना) माह के पहले दिन ईद मनाई जाती है। इससे पहले रमजान का पाक महीना होता है, इस पूरे महीने इबादत के बाद अल्लाह की तरफ से अपने बंदों को ईद का तोहफा दिया गया। जैसे ही चांद दिखता है, पिछला महीना खत्म होकर नया महीना शुरु हो जाता है। शव्वाल का महीना शुरु होते ही लोग अगली सुबह ईद मनाते हैं। इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह उठकर फज्र की नमाज अदा करते हैं। इसके बाद नहा धोकर तैयार होते हैं। इस दौरान अल्लाह का आदेश है कि, तुम्हारे पास मौजूद सबसे पसंदीदा कपड़े पहनो। इसके बाद सभी लोग ईद की नमाज अदा करने शहर की ईदगाह (ईद की नमाज अदा करने वाली जगह) जाते है। वहां किसी एक शहर के लगभग सभी लोग एक साथ ईद की नमाज अदा करते हैं और अल्लाह का शुक्र (धन्यवाद) अदा करते हैं कि, क्योंकि, उसने ही हमें ये खास दिन दिया। साथ ही, यहां अल्लाह से पूरी दुनिया के लिए अमन ओ अमान, सुख, शांति और भाइचारा कायम करने की दुआ की जाती है। नमाज़ पूरी होने के बाद सभी लोग एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद (बधाई) देना शुरु करते हैं।
खास पकवान खिलाकर बांटी जाती हैं खुशियां
ईद की नमाज पढ़कर सभी लोग अपने अपने घरों को लौटते हैं। फिर अपने पड़ोसियों (घर के नज़दीक रहने वाले), रिश्तेदारों (परिजन) और मिलने जुलने वालों (परिचित) के घर जाकर या उन्हें अपने घर बुलाकर ईद की मुबारकबाद (बधाई) देते हैं। इस दिन कई तरह के खास पकवान बनाए जाते हैं, जो मिलने जुलने वालों को खिलाकर एक दूसरे के साथ खुशियां मनाई जाती हैं। अल्लाह का आदेश है कि, इस दिन सभी मुसल्मान खुशियां मनाएं। इसलिए भी कि, रमजान में की गई उनकी इबादत कबूल कर ली गई। इसलिए भी कि, इस दिन के जरिये वो अपने दिलों से किसी भी तरह के मनमुटाव को भुलाकर एक दूसरे के गले लगें। इसलिए भी कि, इस दिन की बरकत (कारण) से वो अपने सगे संबंधियों और पड़ोसियों के साथ सुख बांटें और अपने रिश्तों को एक नई मज़बूती दे सकें।
5 जून को ईद की छुट्टी का ये है कारण
आपको बता दें कि, हमारे केलेंडरों के अनुसार, देशभर में 5 जून को सरकारी कार्यालयों में ईद उल फित्र की छुट्टी रखी गई है। हालांकि, ये चांद के दिखने पर ही तय होता है। लेकिन इस बार अनुमान है कि, ईद क चांद पिछले महीने के 29 दिन गुजरने पर ही दिखना प्रबल है। इसलिए भी सामान्य केलेंडर में ईद की छुट्टी 5 जून को रखी गई है। हालांकि, अगर चांद 5 जून को नहीं दिखता तो ईद का त्यौहार 6 जून को मनाया जाएगा।
चांद देखने के बाद ही ईद क्यों?
इस्लाम के मुताबिक, दिनों की गणना चांद दिखने के आधार पर की जाती है। रोजाना का चांद दिखने पर ही दिन सुनिश्चित किया जाता है। साथ ही, नया चांद दिखने पर अगला महीना तय माना जाता है। ईद उल फित्र हिजरी कैलेंडर के 10वें माह के पहले दिन मनाई जाती है।
ईद के दिन इन बातों का रखें खास ध्यान
वैसे तो ईद उल फित्र के दिन फर्ज नमाजों को छोड़कर किसी भी इबादत करने के बारे में मना किया गया है, साथ ही इस दिन के लिए कई खास नियम भी बताए हैं, जिसका पालन करना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं उन खास नियमों के बारे में...।
1-ईद के दिन सुबह सबसे पहले उठकर फज्र की नमाज अदा करनी होती है, इसी से नए दिन की शुरुआत मानी जाती है।
2-नमाज के बाद लोगों को नहां-धोकर अपने सबसे पसंदीदा कपड़े पहनकर उनपर खुशबू लगाकर ईद की नमाज के लिए निकलना होता है।
3-रमजान शुरु होने के बाद से ईद की नमाज अदा करने से पहले पहले हर मालदार मुसलमान को फितरा गरीबों को देना चाहिए। इसे बेहद जरूरी बताया गया है। फितरा यानी उतनी रकम जिससे किसी व्यक्ति को भरपेट खाना मिल सके। फितरे की रकम का आंकलन दो चीजों से किया गया है। मध्यम वर्गीय व्यक्ति के लिए 1 किलो 6 सौ 33 ग्राम गेहूं या उसकी कीमत किसी गरीब को दी जाती है मौटे तौर पर इसकी रकम उलमाओं की तरफ से इस साल 50 रुपये रखी गई है। वहीं किसी अमीर व्यक्ति को 1 किलो 6 सौ 33 ग्राम किशमिश की रकम लगभग 500 रुपये किसी गरीब को फिदिया देना होता है। फितरे का मकसद उन गरीबों तक भी उतनी रकम पहुंचाना है, जिससे वो भी हसी खुशी ईद का त्यौहार मना सकें। इधर, अल्लाह ने मालदार मुसलमान पर फितरा देना लागू किया, ताकि, वो उन गरीबों को ढूंढकर फितरा अदा करे। फितरा अदा किये बिना मालदार व्यक्ति की ईद की नमाज़ नहीं मानी जाती।
4-ईद की नमाज ईदगाह में अदा करनी चाहिए। ईदगाह न होने पर मस्जिद में या फिर खुले आसमान तले ही नमाज अदा की जा सकती है।
5-ईदगाह आने और जाने के लिए अलग-अलग रास्तों का इस्तेमाल करना होता है। ताकि, आप अलग अलग रास्तों से गुज़रकर मिलने जुलने वाले लोगों को ईद की मुबारकबाद दे सकें।
6-छोटे बच्चों को ईदी के तौर उपहार दिये जाते हैं, ताकि, उनके दिल में ईद की कद्र (सम्मान) बढ़े।
7-इस दिन गरीबों को दान देना, साथ में भोजन करना और उनके साथ खुशियां बांटना पुण्य कार्य माना जाता है।
Updated on:
04 Jun 2019 03:32 pm
Published on:
04 Jun 2019 03:20 pm
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