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अब किसानों से ठगी : सरकार की सिफारिश पर किसानों ने कंपनी से किया था करार, रुपये लेकर भागी कंपनी!

ठगी का नया मामला सामने आने के बाद सरकारी सिफारिश पर कंपनी से करार करने को राजी हुए 97 किसान अपने परिवारों के साथ सड़क पर उतर आए हैं।

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अब किसानों से ठगी : सरकार की सिफारिश पर किसानों ने कंपनी से किया था करार, रुपये लेकर भागी कंपनी!

भोपाल/ एक तरफ केन्द्र सरकार से अपनी मांगों को लेकर देशभर में किसानों के विरोध का मामला तो अब तक सुलझने का नाम नहीं ले रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के किसानों से ठगी का नया मामला सामने आने के बाद सरकारी सिफारिश पर कंपनी से करार करने को राजी हुए 97 किसान अपने परिवारों के साथ सड़क पर उतर आए हैं। हालांकि, कृषि कानूनों पर हो रहे किसानों के विरोध को शांत करने के लिये शिवराज सरकार लगातार कोई न कोई सांत्वनापूर्ण आश्वासन दे रही है। बावजूद इसके किसानों से धोखाधड़ी का सिलसिला समने आना सरकारी आश्वासन पर बड़ा सवाल है। हालांकि, मामला सामने आने के बाद सरकार के भी कान खड़े हो गए हैं।

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मंत्री ने दिया आश्वासन

आपको बता दें कि, मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के 97 किसानों से इंदौर की एक प्राइवेट फर्म रुपये लेकर गायब हो गई है। हालांकि, कृषि विभाग द्वारा तो इस मामले की पुष्टि कर ली गई है, लेकिन कृषि मंत्री कमल पटेल को अब तक इस मामले के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है। क्योंकि, उन्होंने खुद इस संबंध में जानकरी होने से इनकार किया है। हालांकि, उन्होंने किसानों को एक और आश्वासन देे हुए ये जरूर कहा है कि, किसानों के रुपये डूबने नहीं दिये जाएंगे। भले ही, इसके लिये कंपनी की संपत्ति को कुर्क करके किसानों का भुगतान करना पड़े। वहीं, कृषि विभाग के निर्देशक के.पी. भगत ने भी मामले पर उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

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ऐसे हुई धोखाधड़ी, अब तक नहीं हो सकी सुनवाई

ठगी का शिकार हुए किसानों का कहना है कि, उन्होंने बागवानी विभाग की सिफारिश पर इंदौर की एक कंपनी से कॉन्ट्रेक्ट किया था। साल 2018 में हुए इस कॉन्ट्रेक्ट के मुताबिक किसानों को पौधरोपण करना था। पौधरोपण के वक्त किसानों को प्रति एकड़ 20 हजार का भुगतान किया जाना था। किसानों ने दो एकड़ जमीन के 40 हजार रुपए जमा करवाए। कंपनी ने शुरुआत में पौधे, उपज और तकनीकी जानकारी को लेकर आश्वासन दिया। लेकिन, किसानों को पौधे नहीं मिले तो उन्होंने 17 दिसंबर 2019 को पहली बार जिला कलेक्टर को मामले की सूचना दी। इसके बाद से ही ये लगातार संबंधित विभागों में शिकायतें करते आ रहे हैं, लेकिन किसानों की समस्या का निवारण अब तक नहीं हुआ।

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