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First lady Pilot of India: भारत की पहली महिला पायलट कौन थीं, पाकिस्तान से है बड़ा कनेक्शन

First lady Pilot of India:28 अगस्त 1913 को जन्मीं बच्ची को बचपन में था ड्राइविंग, घुड़सवारी और शूटिंग का शौक, राजनीति में था दबदबा, बंटवारे के बाद पाकिस्तान में जा बसी थीं भारत की पहली महिला पायलट

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first lady pilot of india

भोपाल रियासत की राजकुमारी आबिदा सुल्तान।

देश की पहली महिला पायलट कौन थीं(bharat ki pehli mahila pilot kaun thi), अगर आप भी इस सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, तो आपको बता दें कि देश की आजादी से पहले आसमान में उड़ान भरने वाली देश की पहली महिला पायलट (First lady pilot of India) एक नवाबी परिवार की राजकुमारी थीं..नाम था…आबिदा सुल्तान।

जीहां आबिदा सुल्तान..वर्तमान में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और तत्कालीन भोपाल रियासत की इस राजकुमारी को 25 जनवरी 1942 के दिन पायलट का लाइसेंस मिला था। आज 28 अगस्त को उनके जन्म दिन पर हम आपको बताने जा रहे हैं भोपाल रियासत की राजकुमारी आबिदा सुल्तान के ये रोचक फैक्ट कर देंगे हैरान…

भोपाल रियासत की राजनीति में था दबदबा

कहा जाता है कि भोपाल रियासत जब तक उनके पिता के पास थी और वह उसका कामकाज देखते थे। उस समय आबिदा मुस्लिम राजनीति में पूरी तरह से एक्टिव तो थी हीं, वहीं पिता के कैबिनेट की अध्यक्ष और मुख्य सचिव की जिम्मेदारी भी वही संभालती थीं।

बंटवारे के बाद भारत छोड़ा

आबिदा सुल्तान का निकाह 18 जून, 1926 को कुरवाई के नवाब सरवर अली ख़ान के साथ हुआ। देश के विभाजन की उथल-पुथल के बाद सन् 1949 में उन्होंने भारत छोड़ दिया।

जिन्ना के कहने पर पहुंचीं पाकिस्तान

दरअसल आबिदा सुल्तान जिन्ना के संपर्क में थीं। जब उनके पिता ने भारत विलय पर रजामंदी जाहिर करके विलय पत्र पर साइन कर दिए, तो उन्होंने इसका विरोध किया। वहीं जिन्ना ने आबिदा से वादा किया था कि अगर वो पाकिस्तान आ जाएं तो, वे उन्हें वहां की राजनीति से जोड़ेंगे। वहीं उन्हें पूरे मुल्क में इज्जत भी मिलेगी।

कराची में महलनुमा घर में शान-ओ-शौकत से रहती थीं आबिदा

भारत छोड़कर पाकिस्तान (Pakistan) में बसीं आबिदा सुल्तान कराची में शानदार महलनुमा घर में रहने लगीं। पाकिस्तान पहुंचकर वहां की राजनीति में सक्रिय हो गईं। वहीं पाकिस्तानी सरकार में उनका काफी रुतबा भी रहा। यही नहीं उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व भी किया। चीन का सरकारी दौरा करने वाली भी वही थीं।

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उनके पिता ने कई बार कहा भारत लौट आओ लेकिन वो नहीं लौटीं

जब पाकिस्तान में 1960 में मार्शल लॉ लागू हुआ तो उन्होंने जिन्ना की बहन फातिमा के साथ इसका विरोध किया। हालांकि उनके पिता ने भी शुरुआत में अपनी रियासत को भारत में नहीं मिलने दिया। इसे लेकर पूरी तरह से विरोधी थे। वे पाकिस्तान के साथ विलय करना चाहते थे लेकिन, बाद में उन्हें भारत में विलय करना पड़ा। वह भारत में ही रहे।

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अपनी बेटी को भी उन्होंने कई बार कहा कि वे भारत लौट आए। लेकिन वो नहीं मानीं। और वह भारत तब लौटीं जब उनके पिता का इंतकाल हुआ। उनके बेटे शहरयार खान पाकिस्तान के विदेश मंत्री भी बने और पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष भी।

उनके पाकिस्तान जाने के बाद छोटी बहन ने किया शासन

अक्टूबर 2001 तक वह कई बीमारियों से घिर गईं। वह अस्पताल में भर्ती हुईं लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। चूंकि वह पाकिस्तान जाकर बस गईं थी, इसलिए उनके पिता ने उनकी मंझली बेटी साजिदा सुल्तान को भोपाल का शासक नियुक्त किया था।

साजिदा बेगम की शादी पटौदी राजघराने के नवाब इफ्तिखार अली खान के साथ हुई थी। मंसूर अली खान पटौदी उनके बेटे थे। बाद में भोपाल रियासत में प्रापर्टी को लेकर काफी विवाद भी चला, जो वर्तमान में भी चल ही रहे हैं।

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