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MP Tourism को बढ़ाएंगे कांच के ब्रिज, कहां बनेंगे, जानिएं इसकी खूबियां

Glass Cantilever Bridge : मध्यप्रदेश पर्यटन को मजबूत बनाने के लिए अमरकंटक और पन्ना में बन रहा है खास ग्लास कैंटीलीवर ब्रिज।

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भोपाल

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Akash Dewani

Sep 21, 2024

MP Tourism

Glass Cantilever Bridge: विदेशों के पर्यटन स्थलों की तरह अब मध्यप्रदेश के टूरिस्ट स्पॉट पर भी शीशे के ब्रिज देखने को मिलेंगे। इस ब्रिज की खासबात यह है कि ये लकड़ी, लोहे से नहीं, कांच के बनाए जा रहे हैं। ब्रिज पर खड़े जब होंगे तो आप अपने आप को हवा में महसूस करें। यह रोमांच का भी अनुभव कराएगा। इसी के साथ ऊंचाई पर पहुंचकर दूर-दूर तक वादियों का नजारा भी ले सकते हैं।

मध्यप्रदेश में मोहन सरकार पर्यटन (MP Tourism) को बढ़ाने के लिए नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक, पन्ना में कांच के ब्रिज यानी कैंटीलीवर ब्रिज बना रही है। कपिलधारा जलप्रपात पर पहला और सोनमुडा में दूसरा ब्रिज बनेगा। पन्ना में बृहस्पति कुण्ड जलप्रपात पर ग्लास का ब्रिज बनेगा, जिसका निर्माण तेजी से चल रहा है। बालाघाट में भी एक ग्लास स्काई वॉक बनाने का प्रस्ताव भी पास हो चुका है।

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अमरकंटक में दो ब्रिज बनेंगे

अमरकंटक में नर्मदा नदी और सोन नदी पर 2 ग्लास कैंटिलीवर ब्रिज बनाए जाएंगे। पहला ब्रिज माई की बगिया के भीतर कपिलधारा जलप्रपात के पास बनेगा, जिस पर चलकर आप झरने से गिरते हुए पानी की मधुर आवाज़ और आस-पास की हसीन वादियों का लुफ्त उठा पाएंगे। दूसरी तरफ सोनमुड़ा पर बन रहा ब्रिज सोन नदी के आस-पास की सुंदरता को दिखाएगा। इन दोनों ब्रिज की लागत कुल 3 करोड़ होगी, जिनकी लंबाई करीब 40 फीट और ऊंचाई 200 से 300 फीट होगी। यह दोनों ब्रिज इस साल नवंबर तक बनकर तैयार हो जाएंगे।

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पन्ना में बृहस्पति कुण्ड पर ब्रिज

पन्ना के बृहस्पति कुण्ड जलप्रपात पर तीसरा ग्लास ब्रिज बने वाला है। यह ब्रिज 40 फीट लंबा और 500 मीटर की ऊंचाई पर बनाया जा रहा है। इसकी लागत 2-3 करोड़ बताई गई है। यह ब्रिज धरती से करीब 18-22 फ़ीट की ऊंचाई पर होगा, जिसे यहां के आश्रम की तरफ से बनाया जाएगा। हालांकि, इस ब्रिज को बनाने से पहले जलप्रपात के आस -पास सुरक्षा के इंतज़ाम किए जा रहे है। आपको बता दें कि, बृहस्पति कुंड हरी-भरी वादियों से घिरा हुआ है। बारिश के दिनों में इसका मनमोहक दृश्य मन मोह लेता है। बरसात के मौसम में पर्यटक दूर-दूर से बृहस्पति कुण्ड जलप्रपात को देखने के लिए आते है। यह ब्रिज अगले साल अप्रैल माह तक बनकर तैयार होगा।

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भेड़ाघाट में बनेगा ग्लास स्काई वॉक

जबलपुर के भेड़ाघाट में भी इसी तरह का एक और निर्माण होगा। एलिवेटेड ग्लॉस स्काई वॉक का निर्माण शुरू होने वाला है, जहां से पर्यटक संगमरमर की चट्टान और नर्मदा नदी का धुआंधार जल प्रपात का सुंदर नजारा देख पाएंगे। यह स्काई वॉक 5 करोड़ की लागत से बनेगा, जिसकी लंबाई 50 फीट होगी। ब्रिज सिंगल पियर फाउंडेशन पर केबल के सहारे टिका रहेगा। यह ब्रिज अगले साल के शुरुआत में पूरा हो सकता है।

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इन प्रदेशों में भी है ग्लास ब्रिज

भारत के 5 शहरों में भी ऐसे ही कांच के ब्रिज हैं। इनमें सबसे बड़ा ब्रिज केरल का वागामोन ग्लास ब्रिज है। 40 मीटर की लंबाई वाला यह ब्रिज इडुक्की जिले में स्थित देश का अबसे बड़ा ग्लास ब्रिज है। इसकी लागत करीब 3 करोड़ रूपए थी। यह ब्रिज समुद्र तल से लगभग 3,500 फीट की ऊंचाई पर है, पहाड़ी इलाके में 150 मीटर की ऊंचाई से नजारा पेश करता है। इस ब्रिज में एक बार में 15 लोग प्रवेश कर सकते हैं और दस मिनट तक के लिए प्रति व्यक्ति 500 ​​रुपए का टिकट शुल्क है। केरल के अलावा बिहार के राजगीर और सिक्किम के पेल्लिंग में भी इस तरह के ग्लास ब्रिज मौजूद है।

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विश्व का सबसे बड़ा ग्लास ब्रिज

बात विश्वस्तर की करें तो सबसे बड़ा ब्रिज वियतनाम में है। सोन ला प्रांत के मोक चौ जिले में स्थित इस ब्रिज का नाम 'बाक लॉन्ग सस्पेंशन ब्रिज' है। बाक लॉन्ग एक वियतनामी शब्द है जिसका अर्थ वाइट ड्रैगन होता है। यह ब्रिज 632 मीटर की लंबाई के साथ दुनिया का सबसे लंबा पुल बताया है। यह घाटी से करीब 150 मीटर की उचाई पर बना हुआ है। इस ब्रिज में एक बार में करीब 450 लोग एक साथ चल सकते है। इस ब्रिज की लागत करीब 2 मिलियन डॉलर (16.5 करोड़ रूपए) थी।