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शर्मनाक! प्रदेश के लिए मेडल लाने वाले दिव्यांग खिलाड़ियों को जिम्मेदार कटवा रहे चक्कर

कैश राशि पाने के लिए कई सालों से भटक रहे दर बदर एक दिव्यांग एक पांव से काट रहा खेल विभाग के चक्कर
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रूपेश मिश्रा

प्रदेश के दिव्यांग खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने साल 2019 में प्रपत्र निकाला कि नेशनल में गोल्ड, सिल्वर और ब्रांज मेडल जीत कर आने वाले खिलाड़ियों को सरकार क्रमश: एक लाख से पचास हजार तक प्रोत्साहन राशि देगी। लेकिन सरकार का ये आदेश गफलत की ऐसी भेंट चढ़ा कि कई दिव्यांग खिलाड़ी अब धनराशि पाने के लिए पिछले कई सालों से विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। जबकि खिलाड़ियों का कहना है कि खेल विभाग के जिम्मेदार अधिकारी राशि न देने पीछे कैटेगरी या फिर उस कैटेगरी में पर्याप्त दिव्यांग खिलाड़ियों का नहीं होना बता रहे हैं। अब बताइए जब कोई दिव्यांग नहीं है तो कैटेगरी भरने के लिए क्या किसी को जबरदस्ती दिव्यांग बनाया जाए। खिलाड़ियों ने बताया कि प्रदेश में प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने के लिए हमको इतना भटकना पड़ रहा। जबकि राजस्थान और हरियाणा में ऐसी कोई बाध्यता ही नहीं है। उन खिलाड़ियों की व्यथा जो वर्षों से काट रहे खेल विभाग के चक्कर

धर्मेंद अहिरवार- विक्रम आवार्डी रह चुके धर्मेंद अहिरवार ने कुल तीन गोल्ड, एक सिल्वर और दो ब्रांज मेडल चुके हैं। और सरकार द्वारा घोषित राशि पाने के लिए पिछले कई वर्षों से खेल एवं युवा कल्याण विभाग के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन जिम्मेदार कायदों के फेर में इन्हें उलझा रहे हैं। सीएम हेल्पलाइन में भी इसकी शिकायत कर दी है। लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है।

खेल- पैरा स्विमिंग

उपलब्धि- 20वीं राष्ट्रीय तैराकी प्रतियोगिता में दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल

21 वीं राष्ट्रीय तैराकी प्रतियोगिता में एक गोल्ड और दो ब्रांज मेडल

अरविंद रजक- एक पांव से दिव्यांग अरविंद रजक नेशनल और इंटरनेशनल में कई पदक जीत चुके अब अपने हक की राशि पाने के लिए दर बदर भटक रहे हैं। अरविंद ने बताया कि मजदूरी करके अपना खर्चा चलाता हूं। इसने मेडल जीतने के बाद राशि प्राप्त करने के लिए फॉर्म भरा लेकिन अभी तक कोई पैसा नहीं मिला। बताइए हम एक पांव से कहां- कहां चक्कर लगाएं।
खेल- आर्म रेसलिंग

उपलब्धि---

चार गोल्ड

दो सिल्वर

दो ब्रांज

इंटरनेशनल में एक सिल्वर


राष्ट्रीय स्तर पर मेडल लाने पर प्रोत्साहन राशि

गोल्ड मेडल----1 लाख

सिल्वर मेडल----75हजार


ब्रांज मेडल---50 हजार


जिम्मेदार ये बोलें

जिम्मेदार अधिकारी दिव्यांग खिलाड़ियों का दुख- दर्द नहीं समझ रहे हैं। ये कैटेगरी में 6 बच्चे लाने की बात करते हैं। अब गंभीर दिव्यांगता के मामले में कैटेगरी बनाने के लिए कहां से ऐसे बच्चे लेकर आएं। खेल मंत्री मदद करती हैं लेकिन नीचे के अधिकारी फाइल दबा कर बैठ जाते हैं।

वीके डबास, पैरा स्पोर्टस एसोसिएशन ऑफ मध्यप्रदेश

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जो नियमों में आता है वही दिया जाता है। खेल संचनालय स्तर की कमेटी तय करती है। जो नियमों में पात्र आता है उसे देते हैं जो नहीं आता है उसे नहीं देते हैं। अब किसी टूर्नामेंट में एक ही खिलाड़ी है और वो नेशनल लेवर पर मेडल लेकर आ जाएगा तो उस आधार पर तो नहीं दे सकते।

बीएस यादव, ज्वाइंट डायरेक्टर, खेल विभाग