
अवैध शराब पर लगाम लगाने की तैयारी, नया फार्मूला ला रही सरकार
भोपाल. मध्य प्रदेश में अवैध शराब के कारोबार पर शिकंजा कसने की तैयारी है। इसके लिए सरकार ने नई आबकारी नीति में नया फॉर्मूला लाना तय किया है। इस फॉर्मूले में नई दुकान न खोलने के साथ ही शराब कारोबारियों के मुनाफे को कम करने की तैयारी है। अब प्रदेश के इतिहास में पहली बार शराब पर ड्यूटी घटाई जाएगी, जिससे अवैध शराब के धंधे पर बड़ी चोट होगी।
इस तरह, सरकार की कोशिश रहेगी कि, इस फॉर्मूले से अवैध शराब के कारोबार को बंद कर दिया जाए। इससे होने वाले राजस्व नुकसान की प्रतिपूर्ति को लेकर अलग से काम होगा। मंगलवार को सीएम शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जाएगा। वाणिज्यकर विभाग ने इस नीति का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। अब इस पर फैसला होगा।
बेहिसाब मुनाफा कमा रहे कारोबारी
अभी शराब कारोबारी बेहिसाब मुनाफा कमा रहे हैं। लायसेंसी दुकान से 180 एमएल देसी शराब अभी 110 रुपए में मिलती है, जबकि इसकी लागत अधिकतम 30 से 35 रुपए है। बाकी सब ड्यूटी व अन्य मार्जिन है। इसलिए लायसेंसी शराब की बजाय यही शराब अवैध होने पर 60 रुपए तक में मिल जाती है। इस कारण अवैध ज्यादा बिकती है। ऐसी ही स्थिति विदेशी शराब की भी है।
नए फॉर्मूले में ऐसा
नए फॉर्मूले में सरकार ने शराब पर ड्यूटी घटाने की तैयारी की है। वजह ये कि अभी अवैध व जहरीली शराब सस्ती होने के कारण ज्यादा बिकती है। इस कारण सरकार ड्यूटी कम करके रेट समान करने की तैयारी में है। नई नीति में शराब के निर्माण के लिए उपयोग होने वाले रॉ-मटेरियल निर्माण को लेकर भी सख्ती के प्रावधान हैं। इसमें जवाब देही तय होने से दुरुपयोग रुकेगा। इसके अलावा कोई भी नई दुकान नहीं खोली जाएगी।
राजस्व का गणित, तलाशेंगे नए रास्ते
शराब को लेकर सरकार ने अपने लक्ष्यों में कमी की है। पहले 2019-20 में राजस्व लक्ष्य 15000 करोड़ था, लेकिन अब 2021-22 के लिए लक्ष्य 10340 करोड़ रुपए रखा गया है। आगे भी ये 12 हजार करोड़ से भीतर रहना है। सरकार का मानना है कि, ड्यूटी कम करने से राजस्व कम होगा। लेकिन, यदि खपत बढ़ती है तो कुछ अंश पूरा हो सकता है। बाकी प्रतिपूर्ति के लिए उपकेंद्र का विकल्प रखा गया है।
इन राज्यों में इतनी आमदनी(साल में)
-मध्यप्रदेश 10700 करोड़ रुपए
जहरीली शराब से मौतों में अहम मोड़
प्रदेश में मुरैना और उज्जैन सहित कई जगह जहरीली शराब से मौतें हईं। इसके बाद सरकार ने जांच कमेटी बनाई थी। तब जांच कमेटी ने ड्यूटी कम करने सहित अन्य कई सिफारिशें दी थीं।
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Published on:
15 Jan 2022 07:01 pm
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