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जानलेवा हवा में सांस ले रही है 40% आबादी, राजधानी के हुए बुरे हालात

जानलेवा जहरीली हवा में सांस ले रही है देश की 40% आबादी, राजधानी के हुए बुरे हालात

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जानलेवा हवा में सांस ले रही है 40% आबादी, राजधानी के हुए बुरे हालात

भोपाल/ मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की हवा सांस लेने के लिहाज से बहुत प्रदूषित हो गई हैं। यहीं नहीं इससे कई गुना ज्यादा बुरे हालात राजधानी दिल्ली समेत देश के करीब 20 शहरों का है। या यूं कहें कि, इन शहरों की फिजा जहरीली हो गई है। शुक्रवार को देशभर में एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई की जांच की गई। जिसमें सामने आया कि, इस समय देश की लगभग 40 फीसदी आबादी जहरीली हवा में सांस ले रही है। भोपाल की बात करें, तो शुक्रवार को यहां का प्रदूषण स्तर भी औसतन 185 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर रहा। वहीं अधिकतम स्तर 301 जा पहुंचा और पीएम-10 का औसत स्तर 144 एमजीसीएम जा पहुंचा, जबकि सांस लोने योग्य हवा के लिए एक्यूआई 50 से कम और संतोषजनक स्थिति के लिए 100 से कम होना चाहिए।

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यहां हालात हुए बेकाबू

वहीं, राजधानी दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण स्तर के हिसाब से देखें, तो ये शहर रहने के हिसाब से फिलहाल अनुकूल नहीं है। यहां का औसत एक्यूअाई 484 दर्ज किया गया। इसे देखते हुए सुप्रीम काेर्ट द्वारा गठित ईपीसीए ने यहां हेल्थ इमरजेंसी घाेषित कर दी। लोगों को खुले में सैर करने की मनाही की गई है। राज्य के सभी सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों को 5 नवंबर तक बंद रखने के निर्देश दिये गए हैं। निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई है। दूसरी तरफ, प्रदूषण को लेकर ईपीसीए की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट 4 नवंबर को सुनवाई करेगा। हालही में बढ़े प्रदूषण पर भोपाल के लोगों ने इसे दीपावली की आतिशबाजी से भी जोड़कर देखा। हालांकि, दीपावली के दिन और उसके अगले दिन प्रदूषण की जांच की गई। बारिश के बाद भोपाल में हवा का एक्यूआई 60 पर आ गया था, लेकिन दो दिन बाद गुरुवार को ये बढ़कर 134 रिकार्ड हुआ था। इसके बाद से शहर और प्रदेश से जैसे जैसे बादल छटते जा रहें हैं, वैसे वैसे प्रदूषण स्तर में बढ़ोतरी हो रही है, जो बड़ी चिंता का विषय है।

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डेढ दशक में बढ़ा 72 फीसदी प्रदूषण

वर्ल्ड बैंक के अनुसार, दुनियाभर के 15 साल से कम उम्र के बच्चे प्रदूषित हवा ले रहे हैं। इससे उनके स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा है। ये कहना गलत नहीं होगा कि, लोग एक प्रकार का स्लो प्वाइजन सांस के ज़रिये ले रहे हैं। साल 2016 में 6 लाख बच्चों की मौत का कारण खराब हवा थी। भारत में वायु प्रदूषण को लेकर शिकागो यूनिवर्सिटी द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, 18 साल में उत्तरी मैदानों में देश के बाकी हिस्सों से दोगुना है। इस दौरान देश में 72 फीसदी प्रदूषण स्तर बढ़ा है। देश की 40% आबादी जहरीली हवा में सांस ले रही है। यही कारण है कि, यहां के लोगों की उम्र में औसतन सात साल तक कमी हो गई है।