
भोपाल। कुछ ही दिनों में होली का त्योहार आने वाला है, जो 2 मार्च 2018 को मनाई जाएगी। इससे एक दिन पहले होलिका दहन 1 मार्च को किया जाएगा। वहीं पंडित सुनील शर्मा के अनुसार होलाष्टक 23 फरवरी को लगेगा और 1 मार्च को खत्म होगा।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल सहित अन्य जिलों में भी इन दिनों होली की तैयारी शुरू हो गई हैं। वहीं इसके तहत भोपाल के बाजार भी सजने शुरू हो गए हैं। इसके अलावा होलिका दहन के लिए भी लोगों ने तैयारी शुरू कर दी है। साथ ही बाजार में गुलाल सहित होली के दौरान खेले जाने वाले रंग आने भी शुरू हो गए हैं।
दरअसल चन्द्र मास के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका पर्व मनाया जाता है और इस होली पर्व के आने की सूचना होलाष्टक से ही मिलती होती है। होलाष्टक को होली पर्व की सूचना लेकर आने वाला एक हरकारा भी कहा जा सकता है।
जानकारों के अनुसार "होलाष्टक" के शाब्दिक अर्थ है होला+ अष्टक अर्थात होली से पूर्व के आठ दिन। जानकारों के अनुसार सामान्य रुप से देखा जाये तो होली एक दिन का त्यौहार ना होकर बल्कि पूरे नौ दिनों का त्यौहार होता है।
पंडित शर्मा के अनुसार धार्मिक ग्रंथों में होलाष्टक को लेकर कई सारी मान्यताएं हैं जैसे कि इस दौरान किसी भी तरह के शुभ और मांगलिक कार्यों को वर्जित माना जाता है और यह भी मान्यता है कि होलिका से पूर्व 8 दिन तक दाह-कर्म की तैयारी की जाती है जो की मृत्यु का संकेत माना जाता है और इसी शोक के कारण होली से 8 दिन पहले तक कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है।
यदि आप होलाष्टक के दौरान इन कामों को करते हैं तो कहा जाता है कि किए गए इन कार्यों से कष्ट होता है और यदि आप इस दौरान विवाह सम्बन्ध बनाते हैं तो विवाह आदि संबंध टूट जाते हैं और घर में क्लेश की स्थिति बनती है।
आइये यहां हम आपको बता रहे हैं कि वो कौन कौन से कार्य हैं, जो होलाष्टक के दौरान वर्जित हैं...
हिंदू धर्म में इस दौरान बताए गए 16 संस्कारों को करना वर्जित किया गया है। ये हैं गर्भाधान, विवाह, पुंसवन, गृह शांति, हवन यज्ञ कर्म, नामकरण, चूड़ाकरन, विद्यारम्भ, गृह प्रवेश, गृह निर्माण, आदि नहीं किए जाते हैं।
ऐसा इसीलिए किया जाता है क्योंकि होलाष्टक को ज्योतिष की दृष्टि से एक दोष माना जाता है, जिसमें शुभकाम करने की मनाही होती है।
होलाष्टक आरंभ होते ही दो डंडों को स्थापित किया जाता है। इसमें एक होलिका का प्रतीक है और दूसरा प्रह्लाद से संबंधित है। होलिका दहन में जब प्रह्लाद बच जाता है, तो इसी खुशी में होली का त्योहार मनाया जाता है।
Published on:
21 Feb 2018 05:14 pm
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