
sagar liquor tragedy- मध्यप्रदेश के कई जिलों में गांव-गांव में खुलेआम बिकती है अवैध शराब। (विजुअल-AI जनरेटेड)
Sagar Liquor Tragedy- सागर में जहरीली शराब पीने से लोगों की मौत का आंकड़ा सोमवार को और बढ़ गया। अब तक 26 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। जबकि 100 से अधिक मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। इससे पहले भी उज्जैन, मुरैना और मंदसौर में ऐसे ही शराब कांड हो चुके हैं। जिनमें कई लोग अपनी जान गंवा चुके थे। इसके अलावा शराब का अवैध कारोबार प्रशासन से छुपते छुपाते कई जिलों में चल रहा है। कई शहरों में तो किराना दुकानों में शराब मिल जाती है तो कई ढाबों पर भी खुलेआम बेची जाती है।
सागर की घटना ने भले ही जहरीली शराब के खतरे को फिर सामने ला दिया हो, लेकिन प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पत्रिका की पड़ताल में अवैध शराब के कारोबार का अलग-अलग स्वरूप सामने आया। कहीं दूसरे राज्यों से शराब की तस्करी हो रही है तो कहीं स्थानीय स्तर पर हाथभट्टी शराब तैयार कर गांवों तक पहुंचाई जा रही है।
मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में अवैध शराब का कारोबार काफी समय से है। यहां हरियाणा और पंजाब से इंदौर-उज्जैन में शराब सप्लाई होती है। इन दोनों ही शहरों में शराब माफिया बड़े पैमाने पर अवैध शराब बेचने का काला कारोबार कर रहे हैं। आबकारी विभाग ने दो दिन पहले हजार पेटियां शराब जब्त की थी। पहले भी अवैध शराब जब्त होती रही हैं, लेकिन आज तक विभाग इतनी-सी बात पता नहीं लगा पाया कि यह शराब मंगवाता कौन है? इंदौर शहर अवैध शराब का काफी बड़ा सेंटर बन गया है। यहां शराब माफिया के संगठित गिरोह सक्रिय हैं। कई बार अवैध शराब सप्लाई को लेकर प्रकरण दर्ज होते हैं, लेकिन इसके पीछे काम कर रहे नेटवर्क का खुलासा नहीं हो पाता।
शराब कहां से लोड हुई, इंदौर में किसे पहुंचानी थी। भुगतान कौन कर रहा था, इन सवालों के जवाब सामने नहीं आ पाते हैं। अधिकारी कहते हैं कि दूसरे राज्यों की शराब की जानकारी और नेटवर्क ट्रैस करने में तकनीकी दिक्कतें आती हैं।
उज्जैन-इंदौर रोड पर पुलिस ने साढ़े 8 लाख रुपए की अवैध शराब के साथ एक को गिरफ्तार किया है। थाना सांवेर पुलिस के मुताबिक रविवार रात को ही इंदौर से उज्जैन जा रही लोडिंग वाहन को रोका। उसमें 67 पेटी अवैध शराब भरी थी। कुल मात्रा 603 बल्क लीटर और कीमत 8,83,500 रुपए आंकी गई है। पुलिस ने आरोपी मनोज पिता शंकरराव खेरकर निवासी उज्जैन को गिरफ्तार किया है। मनीष राय, उज्जैन ने वाहन उपलब्ध कराया था। वह फरार है।
इंदौर में 1976 में हुआ शराब कांड सबसे बड़ा था। जहरीली शराब पीने से 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। कई लोग अंधे हो गए थे। देश में आपातकाल लागू था और एमपी के मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ला थे। इस कांड की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एमवाय अस्पताल और एमजीएम मेडिकल कॉलेज में विशेष व्यवस्था की गई थी। इस पर हिंदी फीचर फिल्म 'शायद' भी बनी थी।
केस -1 : चंडीगढ़ की शराब पकड़ाई जुलाई 2026 में बाईपास पर आबकारी विभाग ने कार्रवाई करते हुए कंटेनर से 470 पेटी अवैध शराब जब्त की। इनमें मैकडोवेल्स नंबर वन और ऑफिसर्स चॉइस व्हिस्की शामिल है। कुल 4151 बल्क लीटर शराब की अनुमानित कीमत करीब 50 लाख रुपए है। बोतलों पर चंडीगढ़ में बिक्री अंकित था।
केस 2 : हरियाणा की बीयर जब्त मई 2026 में देपालपुर क्षेत्र में आबकारी टीम ने कार से हरियाणा में बिक्री के लिए भेजी गई 15 पेटी बीयर जब्त की। पेटियों में 360 केन बडवाइजर मेग्नम मिले। कार्रवाई में वाहन चालक को गिरफ्तार किया गया। जब्त बीयर और वाहन की कुल बाजार कीमत करीब 5.72 लाख रुपए बताई गई है।
दूसरे राज्यों से आने वाली शराब के नेटवर्क का सवाल है, इसको लेकर टीमें कार्रवाई कर रही हैं। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है, ताकि नेटवर्क का पता लगाया जा सके। - अभिषेक तिवारी, सहायक आबकारी आयुक्त
मध्यप्रदेश के अशोक नगर जिले में भी किसी दिन त्रासदी से इनकार नहीं किया जा सकता। अशोक नगर भी अवैध शराब का गढ़ बन गया है। शहर से लेकर गांव तक, नदियों के किनारों से लेकर खदानों के अंधेरों तक अवैध शराब का कारोबार जारी है। माफिया ने यहां की नदी के किनारों को ही अपनी स्थाई फैक्ट्री बना लिया है। पुलिस साल में दो-तीन बार भट्टियां तोड़ती हैं, लेकिन पुलिस के जाते ही फिर से यह भट्टियां शुरू हो जाती हैं। शहर से करीब 25 किमी दूर नदी किनारे बसा माधौगढ़ गांव तो सबसे बड़ा गढ़ है। माफिया का नेटवर्क इतना मजबूत है कि पुलिस की भनक लगते ही वे मिनटों में सब रफा-दफा कर देते हैं। अकेले माधौगढ़ ही नहीं जिले के दर्जनों गांवों में नदियों के किनारे, पत्थरों और मुरम की सूनी खदानों में इसका कारोबार धड़ल्ले से चलता है। यहां तक की गांव-गांव होम डिलीवरी भी होती है और इस काम में महिलाएं और युवा भी साथ देते हैं। अशोक नगर जिले में आबकारी विभाग की 33 लाइसेंसी दुकानें हर गांव, हर गली में खुल चुकी हैं। यहां 1 जून से 3 सितंबर तक पुलिस ने 137 स्थानों से 1139 तस्करों को पकड़ा था और उनके पास से 958 लीटर अवैध शराब जब्त की थी।
राजगढ़ जिला भी कई बार अवैध शराब के कारण चर्चाओं में रहता है। पत्रिका ने जब इन इलाकों का दौरा किया तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं। किराने के सामान की तरह गांव-गांव अवैध शराब मिल रही हैं। इन शराब की बोतलों पर कोई टैग भी नहीं होता है। राजगढ और ब्यावरा के बीच चर्चित गांव कटारियाखेड़ी में तो हर दिन शराब मिलती है और यहां बनाई भी जाती है। कटारियाखेड़ी, दूधी, नरसिंहगढ़ क्षेत्र के नई दिल्ली सहित बोड़ा थाना क्षेत्र में कई संवेदनशील गांवों और उनकी बस्तियों में शराब बनाई जाती है। कई इलाके ऐसे भी हैं जहां पुलिस भी जाने से डरती है। कई स्थान तो ऐसे हैं जहां पन्नियों में शराब भरकर हाईवे पर वाहन चालकों को बेचा जाता है। राजगढ़ जिले के आबकारी अधिकारी रितेश लाल कहते हैं कि हम समय-समय पर संयुक्त कार्रवाई करते हैं। लेकिन जहां बनती है, वो काफी संवेदनशील क्षेत्र होते हैं। हमारे पास पर्याप्त स्टाफ नहीं होने से अलग से कार्रवाई नहीं कर पाते। सागर वाली घटना के बाद फिर से कार्रवाई करेंगे।
गुना जिले में भी 1264 गांवों से अधिकांश में यूरिया और स्प्रिट से तैयार जानलेवा हाथभट्टी शराब बेखौफ बिक रही है। आबकारी विभाग भले ही सालभर में 800 केस दर्ज कर चुका है। महज 26 गांवों पर जांच की खाापूर्ति का दावा किया गया। सूत्रों के मुताबिक इन गांवों में अवैध जहरीली शराब निर्माण के मुख्य केंद्र बने हुए हैं। कैंट के हरिपुर भील डेरा, धरनावदा के मुरादपुर, कनेरा और कनारी, कुंभराज के बिरयाई व कंजर डेरा, मृगवास के सानई कंजर डेरा, राघौगढ़ के साकौन्या, राजपुरा और खजड़ा, चांचौड़ा के भानपुरा व बंजारीपुरा, फतेहगढ़ के गढ़ला, ग्वारखेड़ा, खर्राखेड़ा, नर्मदाखेड़ी और छिकारी, बमोरी के परांठ व सेनबोर्ड चौराहा, मधुसूदनगढ़ के इमलियापान, जामनेर के गुलाबगंज, बांसाहेड़ा, बंजारीपुरा व कमरावदा, बजरंगगढ़ के गढ़ला और आरोन के पनवाड़ीहाट व भादौर में बड़े पैमाने पर हाथभट्टी शराब तैयार की जा रही है।
सीहोर जिले के भैरूंदा और रेहटी क्षेत्रों में नर्मदा नदी किनारे और आसपास के गांवों में अवैध देशी व कच्ची शराब बनाकर बेचने का कारोबार सबसे अधिक होता है। यदि ठीक से जांच होती है तो बुदनी के 15 ही वार्डों में यह गोरखधंधा नजर आ जाएगा। भोपाल-इंदौर हाईवे पर फंदा टोल टैक्स से मेहतवाड़ा सरहदी घाटी के 80 किमी के दायरे में संचालित हो रहे कई होटल, ढाबों पर भी अवैध शराब धड़ल्ले से बिक रही है। जिले में 71 लाइसेंसी शराब दुकानें हैं, जिन्हें 29 समूहों में विभाजित किया गया है। इन दुकानों का 315 करोड़ रुपए में ठेका हुआ है। जिला आबकारी अधिकारी दीप राठौर से उनका पक्ष जानने के लिए कई बार फोन किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। आबकारी विभाग सीहोर के उपनिरीक्षक माधव कुंडल कहते हैं कि हाल ही में भैरूंदा क्षेत्र में कार्रवाई कर महुआ लाहन और उससे निर्मित हाथ भट्टी से बनी अवैध शराब जब्त की है। इस तरह की कार्रवाई निरंतर जारी रहती है। इससे पहले 4 अगस्त 2026 को बुदनी पुलिस ने स्नैक्स और सब्जी की कैरेट के नीचे छिपाकर ले जाई जा रही 1187 लीटर शराब जब्त की थी। 21 अगस्त 2026 को सीहोर कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई कर सीमेंट की आड़ में छिपाकर ले जाई जा रही 325 पेटी अंग्रेजी शराब बरामद की थी। 17 अगस्त 2026 को जावर पुलिस ने ग्राम बमुलिया रायमल के श्मशान घाट के अंदर खड़े एक लावारिस पानी के टैंकर से 450 क्वार्टर अवैध देशी शराब जब्त की थी। 14 अगस्त 2025 को श्यामपुर पुलिस ने निवारिया रोड से कार जब्त कर स्पेशल विस्की की पेटियां जब्त की थी। इन सबके बावजूद अवैध शराब का कारोबार लगातार पकड़ा रहा है, लेकिन रोक नहीं लग पा रही है। सीहोर में भी सागर जैसी त्रासदी सामने आ सकती है।
पड़ोसी जिले में हुए शराब त्रासदी केस के बाद यहां भी चिंता है। कहीं विदिशा में भी ऐसी घटना न हो जाए। आबकारी हमले ने 74 लाइसेंसी दुकानों की जांच शुरू की है। शहर की बस्तियों, नदी किनारे और ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब की शिकायतें लगातार आती रही हैं। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं होती है। इधर, सोमवार को सुबह विदिशा जिले के ही गंजबासौदा क्षेत्र के कंजर टपरा में पांच थानों के 75 पुलिसकर्मियों ने सर्चिंग की। जिसमें दो भट्ठियां मिलीं और 2 हजार लीटर महुआ लाहन नष्ट किया। बरामद व नष्ट की गई अवैध सामग्री की अनुमानित कीमत करीब 5.07 लाख रुपए बताई गई है। पुलिस के अनुसार 7 सितंबर की सुबह करीब 5.45 बजे जेल रोड स्थित कंजर टपरा में अवैध शराब निर्माण और आरोपियों की तलाश के लिए पांच थानों और पुलिस लाइन से बल बुलाकर सर्चिंग अभियान चलाया गया। पुलिस टीम के पहुंचने पर अवैध शराब निर्माण में शामिल आरोपी मौके से फरार हो गए। सर्चिंग के दौरान दो स्थानों पर शराब बनाने के लिए संचालित भट्ठियां मिलीं।
Updated on:
07 Sept 2026 06:04 pm
Published on:
07 Sept 2026 05:30 pm
