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तीसरी लहर में मौतों का डरावना ट्रेंड, कुछ ही घंटों में दम तोड़ रहे संक्रमित

युवाओं की मौत अस्पताल में भर्ती कराने के कुछ ही घंटों बाद हो गई.

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भोपाल. मध्यप्रदेश में कोरोना जानलेवा हो चुका है. इसी के साथ की तीसरी लहर की घातकता बढ़ने लगी है. प्रदेश में 24 घंटों में 3160 मरीज सामने आए हैं जबकि तीसरी लहर में मौतों की संख्या 10 से ज्यादा हो चुकी है. पिछले 3 दिनों में ही 3 मौतें हुई हैं जिनमें 2 युवा थे. सबसे बुरी बात यह है कि इन दोनों युवाओं की मौत अस्पताल में भर्ती कराने के कुछ ही घंटों बाद हो गई.

युवाओं की मौतों की ये दोनों घटनाएं सागर की हैं. दोनों कोरोना मरीज इलाज के लिए सागर मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुए थे। कोविड संक्रमित होने के बाद दोनों मरीजों की हालत गंभीर हो गई थी और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। दोनों मरीजों का ऑक्सीजन लेवल अचानक 60% के नीचे चला गया था। डाक्टर्स के अनुसार शुरुआती इलाज में लापरवाही करना इन दोनों को महंगा पड़ा.

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मेडिकल कालेज में कोरोना का इलाज करने में लगे डाक्टर्स ने बताया कि संत कबीर नगर में रहने वाले 22 वर्षीय युवक को 1 जनवरी को जुकाम और बुखार आया था. युवक ने किसी मेडिकल स्टोर से सर्दी, खांसी और बुखार की दवाएं ली थीं और इसके बाद वह ठीक हो गया। वह मजदूरी करता था इसलिए ठीक होते ही उसने काम पर जाना शुरु कर दिया. इसके बाद 10 जनवरी को उसकी हालत अचानक खराब हो गई.

वह इलाज के लिए जब मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल पहुंचा तो भरी दोपहर में उसे सांस लेने में खूब परेशानी हो रही थी. डाक्टर्स ने जांच की तो युवक का ऑक्सीजन सेचुरेशन का लेवल महज 70% ही निकला। डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया और कोराना जांच के लिए उसका सैंपल भी भेज दिया। भर्ती होने के कुछ ही घंटों के भीतर रात करीब साढ़े 12 बजे युवक की मौत हो गई, जबकि बाद में उसकी रिपोर्ट भी कोविड पॉजिटिव आई.

कोरोना के उपचार में लापरवाही न करें- इससे पहले मेडिकल कॉलेज में ही युवती की भी कोरोना संक्रमण से इन्हीं हालातों में मौत हो गई थी. इन दोनों मौतों में एक बात और समान है. दोनों ही युवा मरीजों का कम्लीट वेक्सीनेशन नहीं हुआ था. इस संबंध में डा.वीके दीवान बताते हैं कि कोरोना के उपचार में लापरवाही न करें. शुरुआती लक्षण दिखते ही चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए.