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Life Style Changing Tips: इस डेली रूटीन से बिगड़ रही महिलाओं की सेहत, टूट सकता है मां बनने का सपना

Life Style Changing Tips: इनफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट (Infertility Specialist) और गायनोकोलॉजिस्ट (gynecologist) का कहना है कि घंटों तक बैठकर काम करने की लाइफ स्टाइल से फर्टिलिटी प्रोब्लम्स आम होती जा रही हैं। विशेष तौर पर महिलाओं में मां ना बन पाने का जोखिम ज्यादा बढ़ रहा है? कैसे? जानने के लिए जरूर पढ़ें ये खबर...

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Life Style Changing Tips: आज की लाइफ स्टाइल अब एक चैलेंज बनती जा रही है। इस चैलेंज का असर हमारी सेहत पर कुछ ज्यादा ही नजर आ रहा है। आजकल की सिटिंग जॉब्स, कुर्सी पर घंटों बैठकर वर्क करना इस डेली लाइफ का सबसे बड़ा चैलेंज बन गया है। अब सिटिंग जॉब्स कई बीमारियों का कारण बन रही हैं। लेकिन अब सामने आई नई रिसर्च बताती है कि सिटिंग जॉब करने से महिला-पुरुष दोनों में फर्टिलिटी से जुड़ी प्रॉब्लम्स सामने आ रही हैं। यानी अगर आप इस तरह की जॉब करते हैं तो आपका मां बनने का सपना टूट सकता है। इनफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट और गायनोकोलॉजिस्ट का कहना है कि घंटों तक बैठकर काम करने की लाइफ स्टाइल से फर्टिलिटी प्रोब्लम्स आम होती जा रही हैं। विशेष तौर पर महिलाओं में मां ना बन पाने का जोखिम ज्यादा बढ़ रहा है? कैसे? जानने के लिए जरूर पढ़ें ये खबर...

क्या कहते हैं Experts

Experts कहते हैं कि उन्हें कई लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के बारे में काफी अनुभव होता है। एक Epidemiological रिसर्च के अनुसार सभी कपल्स में लगभग 10 से 15 पर्सेंट को प्रेग्नेंसी में प्रॉब्लम होती है। Infertility के कारण महिलाओं को सबसे ज्यादा स्ट्रेस से गुजरना पड़ता है। इसके अलावा इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट के कुछ साइड इफेक्ट भी होते हैं, जिनमें ओवेरियन हाइपरस्टिमुलेशन सिंड्रोम (ovarian hyper stimulation syndrome) ब्लीडिंग और इंफेक्शन (Infection) तक शामिल है।

सिटिंग जॉब्स का असर

महिलाओं को अपने काम की वजह से सबसे ज्यादा स्ट्रेस का सामना करना पड़ता है। यही स्ट्रेस महिलाओं में रिप्रोडक्शन हार्मोंस को इफेक्ट करता है। इन हॉर्मोन्स में आने वाली गड़बड़ी के कारण प्रेगनेंसी के चांसेज कम हो जाते हैं। अगर आप भी काम करती हैं और कंसीव करने की कोशिश कर रही हैं, तो सबसे पहले अपने काम से होने वाले स्ट्रेस लेवल को कम करने की कोशिश करें।

बॉडी और मेंटल हेल्द दोनों पर Effect

वर्किंग वुमेन ज्यादा काम करने के लिए अपने शरीर और दिमाग से ज्यादा काम करवाती हैं, इससे उन्हें न केवल मेंटली बल्कि, फिजिकली भी टेंशन झेलनी पड़ती है। इसका असर उनमें हार्मोनल चैंजेज के रूप में झेलना पड़ता है। उनकी बॉडी में एस्ट्रोजन लेवल कम होने लगता है। जबकि ये हॉर्मोन रिप्रोडक्शन के लिए सबसे जरूरी होता है। इस हॉर्मोन में मेल हार्मोन एंड्रोजन का लेवल बढ़ जाता है। इस तरह एक महिला के शरीर में हार्मोंस डिस्बैलेंस होने लगते हैं।

इन महिलाओं को सबसे ज्यादा खतरा

जिन महिलाओं को रोजाना भारी सामान उठाना पड़े या संभालना पड़े, उनकी फर्टिलिटी पर ज्यादा नेगेटिव इफेक्ट दिखते हैं। यदि आप ज्यादा झुकती हैं, देर तक खड़ी रहती हैं या बहुत ज्यादा सामान उठाती हैं, तो आप में फर्टिलिटी प्रॉब्लम होने का खतरा ज्यादा हो सकता है। वहीं जिन महिलाओं को ऑफिस में फिजिकली स्ट्रेस झेलना पड़ता है उनमें, एंट्रल फॉलिकल्स और एग की संख्या कम हो जाती है। शिफ्ट का असर भी जो महिलाएं रोटेशनल या नाइट शिफ्ट में काम करती हैं, उनकी भी फर्टिलिटी बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। इनमें एग काउंट कम हो सकते हैं। इसके साथ ही दिनभर केमिकल और रेडिएशन के संपर्क में रहने पर भी रिप्रोडक्शन फर्टिलिटी कमजोर हो सकती है। ये रिप्रोडक्शन सिस्टम और एग को नुकसान पहुंचा सकती है।

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