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Election Ground report : कैसा चुनाव-कैसा वोट, हमें सडक़ पर लाकर पूछ रहे हो किसकी बनेगी सरकार

जबलपुर-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे फोरलेन निर्माण में बिना मुआवजा जबरिया भू-अर्जन बना मुद्दा
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भोपाल

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KRISHNAKANT SHUKLA

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Updated: 12 Nov 2018, 3:10 PM IST

Elections Ground report 2018

Election Ground report : कैसा चुनाव-कैसा वोट, हमें सडक़ पर लाकर पूछ रहे हो किसकी बनेगी सरकार

@अनिल चौधरी की रिपोर्ट....

मैं जिस दिन नागपुर से बड़ा ऑपरेशन करवाकर लौटा, उसी दिन ठेकेदार और एनएसएआइ के कर्मचारी दरवाजे के बाहर बुलाकर बोले, पांच दिन में घर तोड़ दो, नहीं तो हम तोड़ देंगे। पूरा सामान भी ले जाएंगे। मैं बोला, भाई हमारी जमीन फोरलेन में आ रही है, लेकिन छह साल से पूरा मुआवजा नहीं मिला। घर तोडऩे की तो कोई बात ही नहीं थी।

वे बोले, हमारी नाप से 15 फीट जमीन और चाहिए। दिवाली का त्योहार सिर पर है, लेकिन हमारी नींद उड़ी है। मैं दिल का मरीज भी हूं। ये पीड़ा बयां की 72 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक रघुवीर प्रसाद ने। रघुवीर नरसिंहपुर के तेंदूखेड़ा से छह किमी दूर मदनपुर गांव के अपने पुश्तैनी घर में रहते हैं।

इन दिनों चुनाव यानी लोकतंत्र का उत्सव है, लेकिन यहां मतदाताओं के बीच मातम का माहौल है। हर तरफ सवाल है, सरकार किसकी बनेगी? मदनपुर जैसे कई गांवों के लोगों की जुबान पर अलग प्रश्न है, आगे क्या होगा?

कमोबेश यही प्रश्न एनएच-12 पर जबलपुर से भोपाल के बीच दूसरे चरण के फोरलेन निर्माण में मोरेगांव से मदनपुर तक 64 किमी के दायरे में आने वाले हजारों प्रभावित परिवारों का है। उनका कहना है, बिना मुआवजा दिए जरूरत से ज्यादा जमीन लेने के लिए ठेकेदार बुलडोजर लेकर धमका रहे हैं।

हमारे लिए अब यही चुनाव का मुद्दा है। वोट का नाम सुनते ही अमित कुमार भडक़ गए। बोले, कैसा वोट, हमें सडक़ पर लाकर पूछ रहे सरकार किसकी बनेगी। हमारा घर टूटे और सुनवाई न हो तो कोई सरकार हमारे काम की नहीं।

हम मतदान का विरोध करने की सोच रहे हैं। पंकज अग्रवाल बोले, भैया 10 साल से मुआवजा नहीं मिला। सर्वे पर सर्वे हो रहे हैं। तीन-तीन बार खड़ी फसल कटवा दी गई। सडक़ की सेंट्रल लाइन से एक ओर 33 मीटर तक अधिग्रहण होना था। अब ठेकेदार को 40 मीटर जमीन चाहिए, लेकिन इसका आधार नहीं बता रहे हैं।

इस गांव के सौ से ज्यादा परिवार एक इंच भी जमीन नहीं तो राजी नहीं हैं। साथ बैठे राकेश भाई कहते हैं, रोड के आदमी रोड पर आ गए। तमाशा देखने वाले तमाशा देख रहे हैं। नेता-बेता सभी तमाशबीन बन गए, लेकिन अब नेताओं को हमारे समर्थन की जरूरत है। जीवन लोधी कहते हैं, भैया सही से नेतागिरी होती तो और 70 लोगों के नाम मुआवजा-सूची में नहीं जुड़ते।

हम अनपढ़ हैं, तो क्या उनको धोखा देने का लाइसेंस मिल गया। इसी बीच कपिल पटेल बोले, सरकार चाहती तो हमारा काम कर देती, पर अब समझ नहीं आ रहा सरकार है किसकी। क्योंकि ठेकेदार कह रहे मकान तोडऩे में बाधा मत डालो यह सरकार का काम है।

सरकार ठेकेदार की है क्या? कपिल और सीताराम के कुएं अचानक फोरलेन की जद में बता देने से दोनों परेशान हैं। जीवन लोधी की तो दुकान, मकान और खेत तीनों हाथ से जा रहे हैं। जीवन बोले, पहले यह सोचकर बिना मुआवजे के जमीन दे दी कि सडक़ चौड़ी होगी तो सबका फायदा होगा, लेकिन अब गैर-कानूनी तरीके से सब उजाड़ा जा रहा है।

बहुत देर से चुप अंचल भाई कहते हैं, हजारों लोग मिलकर बुलडोजर के सामने बैठ जाओ तो विधायकी का सपना देख रहे नेता हमें वोट मानेंगे। एक युवक बोला, ठेकेदार दिन में निर्माण करता है और रात को किसी भी ठीले से मुरम ढोता है।

रात ही में नदी से रेत उलीचता है। क्या ये किसी नेता-अधिकारी को नहीं दिखता? थोड़ी देर बाद हमने चाय पी और चलते-चलते पूछा, वोट कैसे प्रत्याशी को देंगे तो सबसे आखिरी में आए राजेश राय बोले, उसे जो दिल से हमारे साथ होगा।