विजन नहीं, इसलिए देश में लैटरल एंट्री
दीपाली ने लिखा है कि लैटरल एंट्री की बात इसलिए उठी है, क्योंकि नेताओं को खुश करने उनके हिसाब से काम करना शुरू किया। सच और झूठ, सही और गलत में अंतर खत्म कर देने से मूल विचार खो गए। उन्हें वेतन, सुविधाएं, क्लब मेंबरशिप, कार, ड्रायवर, नौकर-चाकर, डिनर पार्टी, विदेश यात्रा और करीबियों के काम से मतलब रह गया है। ऐसे में नेताओं को भी लगने लगा कि आइएएस के पास विजन नहीं है।