
महेन्द्र प्रताप सिंह
मध्य क्षेत्र में आठ जिलों की 36 सीटें आती हैं। भाजपा ने 20 सीटों पर तो कांग्रेस ने 19 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। 11 सीटों पर दोनों दलों के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। 25 सीटों पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। प्रदेश की सबसे हॉट सीट सीहोर जिले की बुधनी है। यहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का मुकाबला अभिनेता से नेता बने कांग्रेस के विक्रम मस्ताल से होगा। विक्रम कुछ समय पहले ही कांग्रेस में शामिल हुए हैं। दूसरी सबसे चर्चित सीट भोपाल की नरेला है। यहां से कद्दावर मंत्री विश्वास सारंग को कांग्रेस प्रत्याशी मनोज शुक्ला टक्कर देंगे।
कांग्रेस 7 तो भाजपाके 13 पुराने चेहरे
कांग्रेस ने अभी तक घोषित 19 उम्मीदवारों में से सात विधायकों पर फिर से विश्वास जताया तो भाजपा ने घोषित 20 में से 13 पुराने उम्मीदवारों पर फिर से दांव खेला है। दोनों दलों ने पिछले चुनाव में हारे प्रत्याशियों को एक बार फिर मौका दिया है।
रिजर्व सीटों पर रोचक रहेगा मुकाबला
नौ सीटें आरक्षित सीटों में से एससी के लिए छह तो एसटी के लिए तीन सीटें हैं। बैतूल की घोड़ाडोंगरी सीट पर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने प्रत्याशी उतार दिए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि कांग्रेस नेे विधायक ब्रह्म भालवी का टिकट काट दिया है। इनकी जगह राहुल उइके को मौका दिया है। इनके मुकाबले में भाजपा की गंगा बाई उइके हैं। जबकि, यहीं की भैंसदेही सीट पर कांग्रेस विधायक धर्मूसिंह सिरशाम को फिर से मौका दिया गया है। इनकी टक्कर भाजपा के महेंद्र सिंह चौहान से होगी।
कौन हैं मस्ताल
मस्ताल बुदनी के सलकनपुर के रहने वाले हैं। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले मस्ताल ग्रेजुएशन के बाद धारावाहिकों और वेब सीरीज में काम कर रहे हैं। सीरियल रामायण, रजिया सुल्तान समेत आश्रम-3 वेब सीरीज में काम कर चुके हैं। रामायण में हनुमान का किरदार निभाया था।
सारंग को टक्कर देंगे मनोज शुक्ला
मंत्री सारंग के मुकाबले उतरे कांग्रेस प्रत्याशी मनोज शुक्ला नरेला में 4 साल से सक्रिय रहे। असामाजिक तत्वों, गुंडागर्दी, अवैध शराब, गंदगी, सड़कों की बदहाली के मुद्दे उठाते रहे हैं।
2018 में 36 सीटों का समीकरण
मध्य क्षेत्र-08 जिले
भोपाल, रायसेन,राजगढ़, सिहोर, विदिशा और हरदा, होशंगाबाद व बैतूल
भाजपा 24
कांग्रेस 12
सूबे का मध्य क्षेत्र वैसे तो भाजपा का गढ़ माना जाता है। लेकिन यहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का प्रभाव भी है। क्षेत्र में भाजपा लाड़ली बहना को ब्रह्मास्त्र मान चल रही है। तो अंचल में लचर स्वास्थ्य सेवाएं और आयुष्मान कार्ड जैसे मुद्दे भी हैं। मध्य क्षेत्र कृषि प्रधान है। इसलिए अन्नदाताओं को साधने की जुगत में दोनों दल जुटे हैं। यहां के 50 हजार से लेकर 35 लाख तक की आबादी वाले शहर-कस्बे की समस्याएं हर क्षेत्र में अलग-अलग हैं। हालांकि अभी कोई बड़ा मुद्दा उभरकर सामने नहीं आया है जिसके बूते हार-जीत की पटकथा लिखी जा सके।
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 /strong>
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Updated on:
16 Oct 2023 02:16 pm
Published on:
16 Oct 2023 02:13 pm

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