
भोपाल। क्या आप जानते हैं भगवान महादेव जिस शहर के दामाद हैं, वो मध्यप्रदेश में है। सीहोर जिले के आष्टा में माता पार्वती का पीहर है और लोग भगवान भोलेनाथ को अपना दामाद मानकर पूजते हैं। जमकर करते हैं खातिरदारी।
mp.patrika.com महाशिवरात्रि के मौके पर आपको बताने जा रहा है ऐसे शिवालय के बारे में जिसमें लोगों की असीम आस्था है....।
आष्टा में पार्वती नदी के किनारे बने भूतेश्वर मंदिर के बारे में बताते हैं कि यह इतना प्राचीन है कि लंका का राजा रावण भी पूजा करने यहां आता था। आष्टा का जिक्र कई शास्त्रों में भी है।
भूतेश्वर मंदिर के पुजारी 60 वर्षीय हेमंत गिरी बताते हैं कि यह मंदिर पांडव कालीन हैं। सीहोर में स्थि प्राचीन गणेश मंदिर की वास्तुकला के अनुरूप ही भूतेश्वर मंदिर का निर्माण श्रीयंत्र आकृति में किया गया है। कालांतर में इस मंदिर का निर्माण मराठा शैली के अनुरूप पूर्वामुखी किया गया है। जीर्णशीर्ण मंदिर का पेशवाओं द्वारा जीर्णोद्धार किया गया। इस मंदिर से मां पार्वती की धारा सटकर बांयी तरफ बहती है। मंदिर के गर्भ गृह में मस्तक के आकार में त्वचा रंग का अद्भूत शिवलिंग स्थापित है, जिसके वाम भाग में कुबेर देवता विराजमान हैं। मां पार्वती की प्राचीन मूर्ति भी स्थापित है। मध्य में पार्वती नंदन श्री गणेश की मनमोहक प्रतिमा आकर्षित करती है। मंदिर के आसपास पुरामहत्व की संपदा बिखरी पड़ी है।
पार्वती का पीहर है आष्टा
भगवान भूतेश्वर आष्टा के दामाद हैं। जीवनदायिनी मां पार्वती के उद्गम स्थल के कारण आष्टा नगर को पार्वती का पीहर कहा जाता है। पार्वती नदी आष्टा नगर की सीमा में प्रवेश करते ही स्थिर हो जाती है, यहां से मां पार्वती की धार रुककर आगे बढ़ती है। मां पार्वती की इस विशेषता के कारण आष्टा नगर को पार्वती के पीहर के नाम से जाना जाता है।
जमकर होती है दामाद महादेव की खातिर
श्रावण के महीने में आष्टा नगर के लोग भगवान भूतेश्वर की जमकर खातिर करते हैं। पुरातात्विक महत्व के नगर के प्राचीन शिव मंदिर अमूल्य धरोहर है। मंदिर में भगवान भूतेश्वर दामाद के रूप में स्थापित है। भगवान भूतेश्वर नगरवासियों के संरक्षक हैं।
ऋषियों ने भी की थी यहां तपस्या
बताया जाता है कि हिन्दू प्राचीन धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक इस मंदिर में रावण आकर भगवान शिव की आराधना करता था। इसके अलावा देवतागण भी शिव आराधना के लिए यह स्थल महत्वपूर्ण बताया जाता है। अष्टवक्र जैसे ऋषियों ने यहां पर तपस्या की है। योगी अजय पाल यौगिक क्रियाओं को देश भर में यहां से फैलाया था। ऋषि अष्टवक्र का माता पार्वती से मां और पुत्र जैसा पवित्र रिश्ता था। माता पार्वती का उद्गम भी आष्टा से कुछ किलोमीटर दूर बताया जाता है, जिसे लेकर आष्टा नगर को पार्वती का पीहर कहा जाता है।
यह भी है खास
- सीहोर में स्थित प्राचीन गणेश मंदिर की वास्तुकला के अनुरूप ही भूतेश्वर मंदिर का निर्माण श्रीयंत्र आकृति में किया गया है।
- कालांतर में इस मंदिर का निर्माण मराठा शैली के अनुरूप पूर्वामुखी किया गया है। जीर्णशीर्ण मंदिर का पेशवाओं द्वारा जीर्णोद्धार किया गया।
- मंदिर के गर्भ गृह में मस्तक के आकार में त्वचा रंग का अद्भुत शिवलिंग स्थापित है।
हर साल निकलती है शिव बारात
आष्टा नगर में हर साल दामाद भूतेश्वर की बारात निकलती है। बकायदा नगर के दामाद भूतेश्वर को श्रद्धालु दूल्हे की तरह घोड़े पर बैठकर निकलते हैं। बराती भी बैंड की धुनों पर थिरकते हैं। बरातियों में कोई नागिन डांस करता है तो कोई भांग पीकर बम...बम...भोले की मस्ती में मस्त दिखाई देता है। हर साल की तरह इस साल भी नगर में दामाद भूतेश्वर की बरात की तैयारियां चल रही हैं।
पुरामहत्व का क्षेत्र है
मंदिर के मध्य में पार्वती नंदन श्री गणेश की मनमोहक प्रतिमा आकर्षित करती है। मंदिर के आसपास पुरामहत्व की संपदा बिखरी पड़ी है। पुजारी ने बताया कि अष्टवक्र जैसे ऋषियों ने यहां पर तपस्या की है। योगी अजय पाल यौगिक क्रियाओं को देश भर में यहां से फैलाया था। ऋषि अष्टवक्र का माता पार्वती से मां और पुत्र जैसा पवित्र रिश्ता था।
Published on:
12 Feb 2018 04:43 pm
