
cyber fraud spoofing calls bank police scam (AI IMAGE)
सुमित यादव
mp news: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश में इन दिनों एक फर्जी कॉल लोगों की सालों की कमाई पर भारी पड़ रही है। मोबाइल स्क्रीन पर नंबर बिल्कुल असली दिखता है कभी बैंक का, कभी पुलिस स्टेशन का, तो कभी सीबीआई या आरबीआई का रहता है। लेकिन हकीकत में इस तरह के कॉल करने वाला कोई और नहीं वह साइबर ठग होता है। इस तकनीक को कॉल स्पूफिंग कहा जाता है, जिसमें इंटरनेट कॉलिंग और खास सॉफ्टवेयर के जरिए नंबर की पहचान बदल दी जाती है। इस तरीके से जालसाज कई लोगों जीवन भर की कमाई निकाल लेते हैं।
साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट, केवाईसी अपडेट, कार्ड ब्लॉक, इनकम टैक्स जांच और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे बहानों से लोगों को निशाना बनाते हैं। पहले डर पैदा किया जाता है, फिर जल्दबाजी में फैसला लेने का दबाव बनाया जाता है। कई मामलों में वीडियो कॉल पर नकली कार्रवाई दिखाकर लोगों को मानसिक रूप से तोड़ दिया जाता है और वे रकम ट्रांसफर कर देते हैं।
अहमद नगर निवासी उर्मिला शुक्ल को 1 दिसंबर को डिजिटल अरेस्ट कर ठगों ने 31.60 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। आरोपियों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर डराया और रकम अलग-अलग खातों में जमा करवा ली।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर भी बुजुर्गों को निशाना बनाया गया। ई-7 अरेरा कॉलोनी निवासी 79 वर्षीय राजेन्द्र कुमार दुबे को एटीएस और एनआइए अधिकारी बनकर मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने के डर से 57.20 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए।
साइबर अपराधी विदेशी सर्वर, अवैध टेलीकॉम गेटवे और एआइ टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। पहले अंतरराष्ट्रीय नंबरों से कॉल आते थे, जिन्हें पहचानना आसान था। अब लोकल नंबर या फिर परिचित संस्थानों के नंबर दिखाकर भरोसा जीत लिया जाता है। सावधान रहना ही सबसे बड़ा हथियार है।
शैलेंद्र सिंह चौहान , एडिशनल डीसीपी क्राइम ब्रांच और साइबर
Published on:
24 Feb 2026 10:32 pm
