26 अक्टूबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

MP: यहां 400 किमी के रेल ट्रैक के नीचे से बह गई गिट्टी, ऐसे गुजरीं ट्रेन

बारिश में बिगड़ी चाल, जलभराव के साथ बही गिट्टी, ट्रैक खोखला, हौले-हौले गुजर रही ट्रेन
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

•

image

Anwar Khan

•

Updated: 12 Jul 2016, 9:09 AM IST

heavy rain in mp

heavy rain in mp

केस-1 : शनिवार-रविवार को सलामतपुर और सांची के बीच डाउन ट्रैक की गिट्टियां बह गईं। लगभग एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद ट्रैक को सुधारा जा सका। इस दौरान लगभग आधा दर्जन ट्रेनों को अप ट्रैक से होकर गुजारा गया।

केस-2 : सोमवार को छिंदवाड़ा के पास भारी बारिश के चलते ट्रैक की गिट्टी बह गई। यहां पातालकोट एक्सप्रेस लगभग आधा घंटे तक खड़ी रही। ट्रेनों को अप ट्रैक से गुजारा गया।

शिवनारायण साहू @ भोपाल। प्रदेश में बारिश के सैलाब ने रेलगाड़ी की रफ्तार को थाम दिया है। शुक्रवार/शनिवार की रात हुई मूसलाधार बारिश ने भोपाल रेल मंडल के 15 जिलों में लगभग 400 किमी लंबे ट्रैक को बर्बाद कर दिया है। जगह-जगह जलभराव के कारण ट्रैक के नीचे से मिट्टी और गिट्टी बह गई है। अलग-अलग स्थानों पर मिलाकर कुल 15 किमी ट्रैक ढीला होने के कारण ट्रेनों को कॉशन देकर निकाला जा रहा है। इसी कारण पिछले तीन दिन से भोपाल मंडल में तमाम ट्रेन 12 से 15 घंटे तक देरी से चल रही हैं। भोपाल रेल मंडल के 15 जिलों यानी खंडवा, हरदा, होशंगाबाद, रायसेन, सीहोर, भोपाल, विदिशा, सागर, गुना, शिवपुरी, ग्वालियर, ब्यावरा, राजगढ़, शाजापुर और अशोकनगर में फैले रेल ट्रैक की कुल लंबाई 1019 किमी है। अप और डाउन ट्रैक को मिलाया जाए तो ट्रैक की लंबाई लगभग 1944 किमी है।

देरी से पहुंची रैक, ट्रेन चार घंटे लेट
सोमवार को गाड़ी संख्या 11271 इटारसी-भोपाल विंध्याचल एक्सप्रेस का रैक समय से नहीं पहुंच सका। एेसे में गाड़ी संख्या 11272 भोपाल-इटारसी विंध्याचल एक्सप्रेस को सोमवार को भोपाल स्टेशन से अपने निर्धारित समय 18.45 बजे के स्थान पर 22.45 बजे भेजा गया।

गिट्टी बही, बोल्डर-पत्थर से बचाया ट्रैक
पिछलों दिनों हुई बारिश में भोपाल मंडल में जहां दर्जन भर स्थानों पर जबर्दस्त वाटर ब्लॉगिंग हुई वहीं कुछ स्थानों पर रेलवे ट्रैक की गिट्टियां ही बह गईं। ट्रेनों को दुर्घटनाग्रस्त होने से बचाने के लिए रेलवे ने मालगाडि़यों से भरकर बोल्डर, पत्थर से किसी तरह ट्रैक को संभाला। इस दौरान कॉशन लेकर ट्रेनों को निकाला गया।

फैक्ट फाइल
- रेलवे ने लगभग 1000 से रेलवे कर्मचारियों को ट्रैक दुरुस्त करने के लिए उतारा।
- माल गाडि़यों में बोल्डर, बालू और गिट्टी भराकर रखवाई ताकि जरूरत पडऩे पर तुरंत मौके पर पहंचाया जा सके।
- सलामतपुर, सांची, इटारसी, हरदा, मंडी बामौरा, ओबेदुल्लागंज, इटावाकला आदि स्टेशनों पर वाटर लॉगिंग की सबसे अधिक रही समस्या।
- मंडल में चार स्थानों पर लगाई गई अलार्म डिवाइस ताकि ट्रैक पर पानी खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने पर मिल जाए सूचना।
- ओवर हेड इलेक्ट्रिकल (ओएचई) लाइन की जांच के लिए प्रत्येक 6 किमी पर एक लाइन मैन और हेल्पर ओएचई लाइन के साथ ही पैदल करेंगे जांच।


इनका कहना है...
यात्रियों को कोई परेशानी न हो इसके लिए पूरी तैयारी की गई है। ट्रैक को मजबूती प्रदान करने के लिए संवेदनशील स्थलों पर मालगाडि़यों में पत्थर, लोडर, बजरी और गिट्टियां भरा कर रखी गई हैं। साथ ही आधा दर्जन स्थानों पर अलार्म डिवाइस लगाई गई है जो ट्रैक पर पानी के खतरनाक स्तर पर पहुंचते ही सावधान करेगी।
- आईए सिद्दीकी, पीआरओ भोपाल मंडल