8 जून 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

MP के 59 फीसदी घरों में स्मार्ट मीटर के बाद भी बिजली चोरी, कटौती से परेशान लाखों उपभोक्ता

MP Smart Meter Electricity: स्मार्ट मीटर से बिजली चोरी रुकेगी, उपभोक्ता सेवाओं में सुधार होगा जैसे दावे हुए फेल, एमपी में अब भी बिजवी चोरी जारी है, ट्रिपिंग और अघोषित कटौती का भी लगातार बन रहा है रिकॉर्ड, परेशान उपभोक्ता ने सोशल मीडिया पर निकाली भड़ास, जानें दावों और हकीकत का अंतर

3 min read
Google source verification
MP Smart Meter Controversy

MP Smart Meter Controversy: कंपनियों के दावों और हकीकत में क्या अंतर, पोल खोलती रिपोर्ट। (photo: AI Generated)

MP Smart Meter Electricity Theft: प्रदेश के 1.30 करोड़ उपभोक्ताओं में से करीब 59 फीसद के घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। मतलब आधे से अधिक उपभोक्ता स्मार्ट मीटर वाले हो चुके हैं। तब भी प्रदेश में बिजली चोरी, ट्रिपिंग और अघोषित कटौती जारी है। प्रदेश पर जब स्मार्ट मीटर लगाने की योजना लागू की थी तब, दावे किए थे कि चोरी रोकने में मदद मिलेगी। उपभोक्ता सेवाओं में भी आमूल-चूल सुधार होगा। लेकिन उपभोक्ताओं को बीते वर्ष की तरह बत्ती गुल का सामना करना पड़ रहा है। हाल के दिनों में एमपी के भोपाल, इंदौर समेत कई शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों में 2 से लेकर 11 घंटे तक बिजली गुल रही है। अब तो ट्रिपिंग से परेशान लोग तो सोशल मीडिया पर गुस्सा भी जाहिर करने लगे हैं।

एक्सपर्ट्स ने कहा, कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं

ऊर्जा मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्ट मीटर व उपकरणों के नाम पर कंपनियों को हजारों करोड़ की राशि दी जा रही है लेकिन वैज्ञानिक आधार पर कोई अध्ययन नहीं कराया जा रहा है कि फीडर, डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर व उपभोक्ता मीटर के बीच से जो बिजली गायब हो रही है, वह कहां जा रही है? करोड़ों के ठेके के बावजूद ट्रिपिंग के लिए कौन जिम्मेदार है? 2 से लेकर 11 घंटे तक बिजली बंद रही तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है, आदि। अभी भी अफसरों के दावे हैं कि सुधार आने लगा है। जब 100 फीसद घरों में स्मार्ट मीटर लग जाएंगे, तब और बड़ा सुधार दिखेगा। कई तरह की राहत भी मिलेगी।

सबसे बड़ा फायदा

नामी कंपनियों को मध्यप्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने का यह काम कुछ नामी कंपनियों को मिला है, जो कई राजनीतिक व ब्यूरोक्रेसी लोगों से जुड़ी है। ये खुद की राशि से मीटर लगा रही है। बदले में इन्हें संबंधित बिजली वितरण कंपनियां किश्तों में प्रति यूनिट बिलिंग के आधार पर मीटर लगाने के खर्चे का भुगतान कर रही है। प्रत्यक्ष रूप से यह राशि उपभोक्ताओं से लेकर ही दी जा रही है।

वितरण कंपनियों को फायदा

स्मार्ट मीटर में रीडिंग लेने वाले मीटर रीडरों की जरूरतें खत्म हो रही है। ये संबंधित वितरण कंपनियों द्वारा रखे जाते थे। हजारों युवाओं को रोजगार मिलता था। राशि संबंधित कंपनियों को देनी पड़ती थी। स्मार्ट मीटर में अलग से रीडिंग लेने की जरुरत नहीं है, उपभोक्ता भी अपनी रीडिंग ले सकते हैं। युवाओं का काम स्मार्ट हाथों में चला रहा है।

पुराने बिजली मीटर कहां गए?

जिन पुराने मीटरों को हटाया जा रहा है, उनकी उम्र अभी खत्म नहीं हो रही। इनमें से कुछ मीटर उन क्षेत्रों में दिए जा रहे हैं, जहां अभी तक मीटर नहीं लगे थे, जबकि ज्यादातर मीटर स्क्रैप में जा रहे हैं। इन मीटरों पर हजारों करोड़ रुपए खर्च किए थे, यह राशि बिजली बिलों के रूप में उपभोक्ताओं से ही वसूली थी।

कब-कितनी खपत इसका रिकॉर्ड…

- जो खपत हो रही, उससे कोई छेड़छाड़ नहीं कर पा रहे, खपत से ज्यादा बिल जारी होने जैसी स्थिति ही नहीं बन रही। पहले इसकी भरमार थी।

- कब कितनी खपत की, इसका रिकॉर्ड मिल रहा।

- सुबह 9 से शाम 5 बजे तक जो बिजली उपयोग की जा रही, उसके बिजली बिल में 20 फीसद तक दी जा रही है।

- इच्छुक प्री-पैड के लिए अर्जी देकर अग्रिम भुगतान कर बिजली उपयोग करने लगे हैं। 45 हजार कनेक्शनों में ऐसा हो चुका है।

पूर्व व पश्चिम क्षेत्र वितरण कंपनी स्मार्ट मीटर लगवाने में आगे

वितरण कंपनी - स्वीकृत - लगाने थे - लगाए

पूर्व क्षेत्र - 51.44 लाख - 39.55 लाख - 38.79 लाख

मध्य क्षेत्र - 20.57 लाख - 26.79 लाख - 16.20 लाख

पश्चिम क्षेत्र - 17.14 लाख - 10.16 लाख - 10.60 लाख

नोट- एक कोर्ट केस के कारण मध्य क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी में स्मार्ट मीटर लगाने का काम पिछड़ा है।