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नई तबादला नीति पर सख्त MP CM ने फिर बदले नियम, जारी किए निर्देश

MP Transfer: मध्य प्रदेश में नई तबादला नीति के तहत 15 जून है तबादलों की अंतिम तारीख, लेकिन कई विभागों में नहीं किए जा रहे ट्रांसफर, सीएम दिखे सख्त जारी किए नए निर्देश, अब तीन साल का कार्यकाल नहीं, कर्मचारियों अधिकारियों की परफॉर्मेंस के आधार पर तय होगा ट्रांसफर
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भोपाल

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Sanjana Kumar

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Updated: 13 Jun 2026, 9:33 AM IST

Major administrative reshuffle in the police department amidst the Datia by election 2026

Major administrative reshuffle in the police department amidst the Datia by election 2026 (फोटो सोर्स: पत्रिका)

MP transfer policy: अब तबादलों में परफार्मेंस को आधार बनाया जाएगा। जिनका परफार्मेंस अच्छा होगा, वे तीन साल की अवधि पूरी करने बाद भी एक ही स्थान पर रह सकेंगे। ऐसे शासकीय सेवकों को विभागाध्यक्ष अपनी ओर से मौका देंगे, लेकिन जिनका कामकाज अच्छा नहीं होगा, उन्हें हटाने के लिए तीन साल के कार्यकाल पूरा होने का इंतजार नहीं किया जाएगा। 6 महीने में ही हटाया जा सकेगा। ये निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार सामान्य प्रशासन के एसीएस शिवशेखर शुक्ला और प्रमुख सचिव (कार्मिक) एम सेलवेन्द्रन को दिए।

अब तक तीन साल में होती थी कार्यवाही

आमतौर पर शासकीय सेवकों को एक स्थान पर तीन साल या अधिक की सेवा अवधि पूरी करने के बाद हटाया जाता है। सीएम ने सुशासन भवन में अपने प्रभार के विभागों की समीक्षा की। बारी-बारी से अफसरों को बुलाकर कामकाज पूछा आगामी निकाय चुनावों की तैयारियों को लेकर भी सीएम ने चर्चा की।

अगले साल काम के आधार पर होगा ट्रांसफर

मुख्यमंत्री (MP Transfer Policy) ने शासकीय सेवकों के तबादलों के लिए परफार्मेंस वाले जिन आधारों को तैयार करने की बात कही है, वे अगले साल की तबादला नीति में शामिल किए जाएंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में तबादलों का अंतिम चरण जारी है। इसमें किसी भी आधार को शामिल करना मुश्किल काम हो सकता है इसलिए आने वाले वर्ष की तबादला नीति को परफार्मेंस बेस्ड तबादला नीति के रूप में तैयार करेंगे।

इधर तीन दिन और लेकिन नहीं हो रहे ट्रांसफर

सरकार ने 13 दिन पहले तबादलों से बैन हटाया। अब तीन दिन बाद फिर से बैन लगने वाला है। लेकिन इन 13 दिनों में 90 फीसदी विभागों ने एक भी तबादले नहीं किए। यानी जो अफसर-कर्मचारी जहां पर डटे हुए हैं वे वहीं पर रहना चाहते हैं। वहीं सबसे बड़ी अनदेखी यह कि सरकार द्वारा तबादला नीति सार्वजनिक किए जाने के बावजूद एक भी विभागों ने खाली पदों को पोर्टल पर अपलोड नहीं किया। जबकि अंदर खाने गुपचुप सूचियां बनाई जा रही हैं।

सीएम ने पारदर्शिता की बात कही लेकिन अफसरों ने इस पर तवज्जो नहीं दी। अब प्रदेशभर के शासकीय सेवक सरकार और भाजपा को कोस रहे हैं।

स्कूल शिक्षा में पोर्टल ही नहीं, प्रोग्रामर पर गाज

मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव, दोनों ने कहा कि जो भी तबादले होंगे, उसके लिए ऑनलाइन आवेदन मंगवाए जाएं। स्कूल शिक्षा विभाग में हाल यह है कि शिक्षकों के लॉग-इन आइडी के जरिए पोर्टल खोलने के निर्देश हैं, लेकिन वह खुल ही नहीं रहा। आवेदन के लिए प्लेटफार्म ही नहीं है। मंत्री के दफ्तर में भीड़ लग रही है। हालांकि विभाग ने एक प्रोग्रामर को हटा दिया है।

स्वास्थ्य विभाग में आवेदन ले रहे, तबादला नहीं

कर्मचारियों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग ने सबसे पहले आवेदनों के लिए पोर्टल बनाया। हजारों की संख्या में आवेदन भी आ चुके हैं, लेकिन तबादले नहीं किए जा रहे हैं। यही हाल जनजाति कार्य विभाग का है। यहां भी आवेदनों की भरमार है लेकिन निपटारा नहीं।

मंत्रियों से बिना पूछे तबादला, सीएम को शिकायत

नगरीय विकास एवं आवास विभाग में तबादलों को लेकर शिकायतें भी होने लगी हैं। सूत्रों के मुताबिक मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, इंदर सिंह परमार और प्रद्मु्न सिंह तोमर के क्षेत्र के कुछ सीएमओ को नगरीय प्रशासन विभाग के एक अधिकारी ने अपने स्तर पर ही हटा दिया। तीनों मंत्रियों ने इस बात की शिकायत सीएम को कर दी। इसके बाद मामला विभागीय मंत्री को देखने के लिए कहा गया।

उधर एक जिले के पुलिस अधीक्षक पर प्रभारी मंत्री से बगैर पूछे तबादला करने का मामला भी सीएम तक पहुंचा है। संबंधित मंत्री का कहना है कि पुलिस अधीक्षक ने 17 पुलिस अधिकारियों के तबादले किए लेकिन, एक भी सहमति नहीं ली। इसके बाद एसपी को जमकर फटकारा गया।