जंगल से बाहर निकलते बाघों को बचाने और मानव द्वंद्व रोकने के लिए पहली बार आम लोग बाघों की निगरानी कर रहे हैं। प्रयोग के तौर पर भोपाल सामान्य वन मंडल के मेंडोरा, समरधा, प्रेमपुरा, रातापानी अभयारण्य के झिरी व सीहोर के खारी व आमला में निगरानी हो रही है। स्थानीय लोग बाघों के हर मूवमेंट पर वन विभाग को डाटा उपलब्ध करा रहे हैं। इसके लिए उन्हें ट्रेनिंग दी गई है। भोपाल वन मंडल की 18 बीटों में 36 लोग निगरानी कर रहे हैं। भोपाल वन वृत्त, वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया, तिन्सा फाउंडेशन के शोधकर्ता, रेनमैटर फाउंडेशन के विशेषज्ञ ये तंत्र विकसित कर रहे हैं।