
सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी की अनुशंसाएं, पेट्रोल पंप पर जांच (फोटो सोर्स: ChatGPT)
MP News : जल्द ही बिना बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल या डीजल नहीं मिल सकेगा। मध्य प्रदेश सरकार आने वाले दिनों में ये व्यवस्था करेगी। इसके लिए पेट्रोल पंपों पर मॉडर्न कैमरे लगाए जाएंगे। ये वाहन पर लगी नंबर प्लेटें स्कैन करेंगे, जिससे पता चलेगा कि, वाहन का बीमा है या नहीं। वाहनों का बीमा न होने पर डीजल नहीं देने के लिए पंप संचालकों को अलर्ट भेजे जाएंगे। ये व्यवस्था पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरुआती दौर में सूबे के चुनिंदा जिलों में लागू की जाएगी।
बता दें कि, इस नियम को लागू करने के लिए प्रदेश के ऐसे जिलों का चयन किया जाएगा, जहां सबसे ज्यादा बिना बीमा वाले वाहन सड़क पर दौड़ रहे हैं। सड़क हादसे में कमी लाने के लिए भोपाल, इंदौर और उज्जैन में भी जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (जेडएफडी) प्रोग्राम चलेगा।
ये तस्वीर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी की मंत्रालय में हुई बैठक के दौरान साफ हुई। शीर्ष कोर्ट के पूर्व जस्टिस अभय मनोहर सप्रे ने इसकी अध्यक्षता की। यहां राज्य सरकार की ओर से सड़क सुरक्षा पर प्रजेंटेशन दिया गया। बताया गया कि, हर साल प्रदेश में औसतन 13 हजार मौतें हो रही हैं। इन्हें रोकने के लिए लगातार कई काम किए जा रहे हैं। इसपर अध्यक्ष की ओर से 'नो इंश्योरेंश नो फ्यूल' नियम को प्रभावी रूप से लागू करने जैसी कई अनुसंशाएं की, जिसपर सभी की सेहमति दिखाई दी। इस दौरान बैठक में सीएस अशोक बर्णवाल भी मौजूद थे।
मवेशियों से होने वाली दुर्घटना रोकने नीति बनाएं। 4-ई पर इंजीनियरिंग, इमरजेंसी केयर, इंफोर्समेंट एंड एजुकेशन पर जोर दिया। यानी, सड़कों की डिजाइन अच्छी हो। ब्लैक स्पॉट खत्म करें। घायलों को इमरजेंसी सुविधाएं तत्काल मिले। इन्फोर्समेंट व सड़कों से जुड़ी शिक्षा का विस्तार हो। लोगों को सड़कों पर चलने के नियम बताएं। जीरो सड़क दुर्घटना के लिए अभी धार, सतना, रीवा, सागर, जबलपुर और खरगोन में ही प्रोग्राम चल रहा है। इसका प्रदेशभर में विस्तार करें।
परिवहन सचिव मनीष सिंह ने प्रजेंटेशन में बताया, मध्य प्रदेश में सड़क हादसों में होने वाली मौतों को रोकने के कई स्तरों पर काम किए जा रहे हैं। 2025 के पहले 6 माह की तुलना में 2026 के पहले 6 माह में हुए हादसों में करीब 800 कम मौतें हुईं हैं।
कमेटी को पता चला कि, घायलों को अस्पताल पहुंचाने में 16 मिनट या अधिक समय लग रहा है तो ये आपत्ति की बात है। उन्होंने कहा कि, ऐसे इंतजाम हों कि, कम से कम समय में अस्पताल पहुंचाया जाए और इलाज शुरू हो। ये सुनिश्चित करना होगा।
कमेटी अध्यक्ष ने भोपाल ऑटोमेटिक फिटनेस सेंटर का निरीक्षण भी किया। एक वाहन को फिटनेस देने की प्रक्रिया देखी। टेक्नीशियन से पूछा तो जवाब मिला, वाहन पास हो गया। लेकिन, सिस्टम में हेडलाइट और हॉर्न की कमी से वाहन टेस्ट में फेल हो गया था। इसपर अध्यक्ष द्वारा आपत्ति ली गई।
Updated on:
1 Sep 2026, 7:25 AM IST
Published on:
1 Sep 2026, 7:25 AM IST
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