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सिफारिश पर नहीं, जिताऊ को टिकट देगी कांग्रेस, सर्वे को ही ताकत मान रही भाजपा

चुनाव समिति बनाने में कांग्रेस आगे, भाजपा को करना है पुनर्गठन
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भोपाल

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Ravi Kant Dixit

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Updated: 14 Sep 2018, 4:02 AM IST

assembly elections

assembly elections

भोपाल. प्रदेश में विधानसभा चुनाव की घोषणा होने में कुछ दिन ही शेष हैं। इस बीच उम्मीदवारों के चयन को लेकर राजनीतिक दलों की स्थिति बहुत स्पष्ट नजर नहीं आती। कांग्रेस की प्रदेश चुनाव समिति बन चुकी है, लेकिन भाजपा की चुनाव समिति का पुनर्गठन होना है। उम्मीदवारों के चयन में इस बार दोनों दलों को सर्वे का सहारा है। इसमें भी भाजपा स्थानीय नेताओं से रायशुमारी करेगी, जबकि कांग्रेस वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लेगी।

कांग्रेस का उम्मीदवार चयन फॉर्मूला

पार्टी में अब तक उम्मीदवारों के चयन का आधार बड़े नेताओं की सिफारिश रही है। कमलनाथ के अध्यक्ष बनने के बाद सर्वे के हिसाब से किसी गुट से नहीं, बल्कि जिताऊ नेता को चुनाव में उम्मीदवार बनाया जाएगा। पीसीसी ने तीन सर्वे कराए हैं, जिनमें दो निजी एजेंसी और एक खुद का सर्वे है। एआइसीसी ने भी विधानसभावार पड़ताल कराई है।

शुरुआती सर्वे के नतीजों से पार्टी सितंबर में 80 सीटों के नामों की घोषणा की तैयारी में है। सभी सर्वे पूरे होने के बाद पार्टी अपने बड़े नेताओं से स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर फीडबैक लेकर पैनल बनाएगी। इसी पैनल द्वारा तय नामों पर प्रदेश चुनाव समिति चर्चा कर सूची स्क्रीनिंग कमेटी को भेजेगी। यहां से उस सूची में हर विधानसभा सीट पर एक उम्मीदवार का नाम तय होगा। जहां ज्यादा कशमकश है, वहां दो या तीन नाम हो सकते हैं। स्क्रीनिंग कमेटी अपनी सूची केंद्रीय चुनाव समिति को भेजेगी, सीईसी उम्मीदवारों के नाम पर मुहर लगाकर घोषणा करेगी।

प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा, इस बार किसी गुट से नहीं बल्कि सर्वे के आधार पर उम्मीदवार का चयन करेंगे। सर्वे में जिसका नाम जिताऊ नेता के तौर पर सामने आएगा, उसी को टिकट मिलेगा।

प्रदेश की सीटों पर उम्मीदवारों के चयन के लिए एक साल से सर्वे करा रही भाजपा में स्थानीय आंकलन के आधार पर उम्मीदवारों का चयन होगा। 25 सितंबर को भोपाल में होने वाले कार्यकर्ता महाकुंभ के बाद पार्टी अपने प्रदेश पदाधिकारियों को अलग-अलग जिलों में रायशुमारी के लिए भेजेगी। सर्वे के नतीजे, कार्यकर्ताओं का फीडबैक और रायशुमारी से ही उम्मीदवार तय किए जाएंगे।

भाजपा के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का सर्वे भी अहम है। इसी के आधार पर किसी की सीट बदल दी जाती है तो किसी का टिकट कट जाता है। भाजपा 15 साल से सत्ता में है, इसलिए उसके सामने चुनौतियां भी ज्यादा हैं, क्योंकि दावेदारों की संख्या में ज्यादा बढ़ोतरी हो गई है। पार्टी सर्वे के आधार पर प्रदेश चुनाव समिति के माध्यम से नामों का पैनल तैयार करेगी और उस पैनल को केंद्रीय चुनाव समिति के पास भेज दिया जाएगा, केंद्रीय चुनाव समिति उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर लगाएगी।

प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने बताया कि सर्वे हमारी मजबूरी भी है और ताकत भी। इसी के मुताबिक, जीत की संभावना वाले व्यक्ति को टिकट दिया जाएगा। समाज के आधार पर उम्मीदवार का चयन नहीं होगा।