
भोपाल@अशोक गौतम
लंबे समय से ये माना जाता रहा है कि आने वाला विश्वयुद्ध जल को लेकर ही होगा। ऐसे में देश में मौजूद जल को शुद्ध रखना अतिआवश्यक माना जाता है। ऐेसे में तमाम प्रयासों को बावजूद देश में पानी की गुणवत्ता निरंतर खराब होती जा रही है। जलाशयों का पानी दूषित होता जा रहा है।
देश के 14.44% जलाशयों में पानी दूषित हो गया है। पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक दूषित पानी पाया गया है। इस सूची में राजस्थान दूसरे नंबर पर है।
वहीं स्वच्छ पानी की बात करें तो हिमाचल प्रदेश का पानी सबसे स्वच्छ है। इस सूची में मध्यप्रदेश तीसरे नंबर पर आता है। यह खुलासा हाल ही में जल जीवन मिशन पोर्टल की रिपोर्ट से हुआ। केंद्र सरकार के इस पोर्टल पर पानी की जांच और उसकी शुद्धता से जुड़ी जानकारी राज्यों के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के जरिए डाली जाती है। रिपोर्ट में बताया कि पानी के दूषित होने का मुख्य कारण जलाशयों के आसपास अतिक्रमण और आरओ के पानी का बढ़ता चलन है।
जल जीवन मिशन अभियान के तहत देश में 52 लाख 67 हजार जलाशयों के पानी की जांच की गई। इसमें सात लाख 55 हजार से अधिक जलाशयों के सेंपल जांच के बाद दूषित पाए गए। हालांकि इन जलाशयों के पानी को रासायनिक दवाओं के माध्यम से उपचारित कर उपयोग के योग्य बनाया गया है। वहीं जो जल स्रोत उपचारित होने के बाद भी शुद्ध जल नहीं दे रहे थे, उन्हें बंद कर दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के शुद्धता की जांच फील्ड टेस्ट किट के जरिए जांच कराई गई। इस किट के जरिए 34 लाख से अधिक नमूनों का जांच हुई।
पानी की जांच के लिए सबसे अधिक लैब पश्चिम बंगाल में
जल शुद्धता की जांच करने के लिए लैब तैयार करने के मामले में मध्य प्रदेश देश में दूसरे नंबर पर है। प्रदेश में 105 लैब हैं, जो केन्द्र सरकार की एनएबीएल से मान्यता प्राप्त हैं। प्रदेश के प्रत्येक जिले में लैब मौजूद हैं। वहीं लैब तैयार करने के मामले में पश्चिम बंगाल पहले नंबर पर है। यहां 118 मान्यता प्राप्त लैब हैं।
देश के कुल 52.67 लाख जलाशयों की जांच की गई, जिसमें 7.55 लाख सेंपल दूषित पाए गए।
जल निकायों की प्रथम गणना : देश में 19 हजार जल निकायों पर अतिक्रमण
देश में करीब 19 हजार (18802) जल निकायों पर अतिक्रमण किया जा चुका है। जल शक्ति मंत्रालय के सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है। इस सर्वेक्षण में मार्च 2022 तक के आंकड़े शामिल किए गए है। यह संख्या बढ़ भी सकती है। जल निकायों के प्रति जो सम्मान दिखाने वाले राज्य हैं वो पूर्वोत्तर यानी 'सेवन सिस्टर्स' हैं। इनके अलावा सिक्किम और चंडीगढ़ भी ऐसे राज्य हैं जहां अतिक्रमण अब तक शून्य है।
वहीं उत्तराखंड में 3096 जल निकाय हैं जिसमें मात्र पांच पर अतिक्रमण है। पहली बार इस प्रकार की गणना की जा रही है ताकि पता चल सके कि देश में उपलब्ध जल निकाय कितने हैं और वर्तमान में इनकी स्थिति क्या है।
उत्तर-पूर्वी राज्यों से सीखें-
राज्य : जल निकाय : अतिक्रमण
अरुणाचल : 993 : 0
असम : 172492 : 13
मणिपुर : 1658 : 6
मेघालय : 13332 : 6
मिजोरम : 2185 : 7
नागालैंड : 1432 : 1
इन राज्यों ने किया ज्यादा बर्बाद
तमिलनाडु : 106957 : 8366
आंध्र प्रदेश : 16012 : 3920
तेलंगाना : 64056 : 3032
पंजाब : 16012 : 1578
ये है समाधान
- भूमि रेकॉर्ड में जल निकायों का समावेश।
- शहरी योजना प्रक्रिया का महत्त्वपूर्ण भाग बनाना।
- अतिक्रमण करने वालों पर सख्त कार्रवाई।
Updated on:
07 Jun 2022 08:20 am
Published on:
07 Jun 2022 08:20 am
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