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राधाष्टमी 2017: 29 अगस्त को ऐसे करें पूजा, मिलेगा मनोवांछित फल

सनातन धर्म में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि श्री राधाष्टमी के नाम से प्रसिद्ध है।
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भोपाल

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Deepesh Tiwari

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Updated: 27 Aug 2017, 6:26 PM IST

Radha Ashtami

भोपाल। शास्त्रों में इस तिथि को राधाजी का प्राकट्य दिवस माना गया है। राधाजी वृषभानु की यज्ञ भूमि से प्रकट हुई थीं। वेद और पुराणादि में जिनका ‘कृष्ण वल्लभा’ कहकर गुणगान किया गया है। वहीं कुछ जानकार श्री राधाजी का प्राकट्य वृषभानुपुरी (बरसाना) या उनके ननिहाल रावल ग्राम में प्रातःकाल का मानते हैं।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधाष्टमी(devotional radha ashtami history) मनाई जाती है। इस वर्ष मंगलवार यानि 29 अगस्त 2017 को राधाष्टमी मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्रती को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

इस दिन जहां श्रद्धालु बरसाना(उत्तरप्रदेश) की ऊंची पहाड़ी पर स्थित गहवर वन की परिक्रमा करते है। वहीं मध्यप्रदेश में भी राधा अष्टमी के दिन जगह-जगह पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। मंदिरों को सजाया जाता है व मंदिरों में राधा जी की पूजा-अर्चना की जाती है।

राधाष्टमी कथा (radha ashtami katha):

पद्म पुराण के अनुसार राधा जी राजा वृषभानु की पुत्री थीं और उनकी माता का नाम कीर्ति था। कथानुसार एक बार जब राजा वृषभानु यज्ञ के लिए भूमि की साफ-सफाई कर रहे थे तब उनको भूमि पर कन्या के रूप में राधा जी मिलीं थीं।

इसके बाद राजा वृषभानु कन्या को अपनी पुत्री मानकर लालन-पालन करने लगे। राधा जी जब बड़ी हुई तो उनका जीवन सर्वप्रथम कृष्ण जी के सानिध्य में बीता। किन्तु राधा जी का विवाह रापाण नामक व्यक्ति के साथ सम्पन्न हुआ था।

राधाष्टमी महत्व:
वेदों, पुराणों एवं शास्त्रों में राधा जी को कृष्ण वल्लभा कहकर गुणगान किया गया है। मान्यता है कि राधाष्टमी के कथा श्रवण से व्रती एवम भक्त सुखी, धनी और सर्वगुणसम्पन्न बनता है। श्री राधा जी के जाप एवम स्मरण से मोक्ष की प्राप्ति होती है ।

यह भी माना जाता है कि यदि राधा जी का पूजा अथवा स्मरण नही किया जाता है तो भगवान श्री कृष्ण जी भी उस भक्त के द्वारा किए गए पूजा, जप-तप को स्वीकार नहीं करते हैं। श्री राधा रानी भगवान श्रीकृष्ण के प्राणों की अधिष्ठात्री देवी मानी गई हैं। अतः कृष्ण जी के साथ श्रीराधा रानी जी का भी पूजा विधि-पूर्वक करना चाहिए।

राधाष्टमी पूजन (Pujan of radha ashtami):

राधाष्टमी के दिन प्रातः काल उठकर घर की साफ़-सफाई करना चाहिए। स्नान आदि से निवृत होकर शुद्ध मन से व्रत का संकल्प करना चाहिए। इसके बाद सबसे पहले श्रीराधाजी को पंचामृत से स्नान कराएं, स्नान करने के पश्चात उनका श्रृंगार करें। श्रीराधा रानी की प्रतिमूर्ति को स्थापित करें। फिर श्रीराधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण जी की पूजा धूप-दीप, फल, फूल आदि से करनी चाहिए।

आरती-अर्चना करने के पश्चात अंत में भोग लगाना चाहिए। इस दिन निराहार रहकर उपवास करना चाहिए। संध्या-आरती करने के पश्चात फलाहार करना चाहिए।