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Recall Story : खटलापुरा का वो हादसा, एक साथ जली थीं 10 चिताएं, एक को किया था सुपुर्द-ए-खाक

13 सितंबर 2019 को राजधानी भोपाल के खटलापुरा घाट पर हुए उस दिल दहला देने वाले हादसे ने सिर्फ 50 सेकंड में 11 जिंदगियों को काल के गाल में पहुंचा दिया था।

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Recall Story : खटलापुरा का वो हादसा, एक साथ जली थीं 10 चिताएं, एक को किया था सुपुर्द-ए-खाक

आज घर-घर विराजे गणेश साल भर के लिए विदाई ले रहे हैं। हर कोई अपने गणेश जी को खुशी-खुशी विदाई देने के लिए निकल रहा है और अगले बरस उनके जल्दी आने की कामना करने लगा है। लेकिन, इसी बीच भोपाल के कुछ परिवार ऐसे भी हैं, जिनके जख्म आज फिर हरे हो गए हैं। आंखें दुख से नम हो गई हैं। हम बात कर रहे हैं साल 13 सितंबर 2019 को राजधानी भोपाल के खटलापुरा घाट पर हुए उस दिल दहला देने वाले हादसे की, जिसमें सिर्फ 50 सेकंड के भीतर 11 जिंदगियों को काल के गाल में पहुंचा दिया था।

घाट पर दो नावों में सवार होकर गणेश प्रतिमा विसर्जित करने पहुंचे करीब 20 दोस्तों में से 11 की पानी में डूबने से मौत हो गई थी। हालांकि, उनमें से एक-दो तैरकर पानी से बाहर आ गए थे, जबकि बाकि को मौके पर मौजूद नाविकों ने बचा लिया था। उस दिल दहला देने वाले हादसे में जहां एक साथ 10 चिताएं जली थीं तो वहीं एक को सुपर्द-ए-खाक भी किया गया था। क्योंकि, हादसे में जान गवाने वाले एक किशोर का नाम परवेज भी था, जो मोहल्ले के पंडाल में विराजित बप्पा के विसर्जन में अपने दोस्तों के साथ गया था।

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जांच में हुआ खुलासा शराब के नशे में थे युवक

हादसे के बाद शुरुआत में तो प्रबंधकीय कार्यप्रणाली पर काफी सवाल उठे थे। मीडिया ने कई कमियां-खामियां भी गिनाई थीं। इसके बाद मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश हुए, जिसके एक साल एक महीने के बाद जांच पूरी भी हुई। जांच रिपोर्ट उस समय के भोपाल कलेक्‍टर अविनाश लवानिया को सौपी गई, जिसमें किसी भी अफसर या पुलिसकर्मी को दोषी नहीं बताया गया। रिपोर्ट में तर्क दिया गया कि, जिन लोगों की नाव पलटने से डूबकर मौत हुई थी वो शराब के नशे में थे। वहीं, जांच रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि, हादसे का शिकार युवकों को कई बार समझाया गया था कि वो नाव से विसर्जन करने पानी में न जाएं। कुल मिलाकर रिपोर्ट की मानें तो समझाइश को नजरअंदाज करने के कारण वो सभी हादसे का शिकार हो गए।

हादसे के बाद हुई व्यवस्था

घटना के बाद से ही खटलापुरा समेत शहर के सभी विसर्जन घाटों पर प्रतिमा विसर्जित करने के लिए एक ट्रेक लगा दिया गया, जिसका इस्तेमाल अब भी यथावत किया जा रहा है। साथ ही प्रतिमा विसर्जन करने आने वालों को घाट से एक निर्धारित दूरी पर रोक दिया जाता है। वहीं से वो ट्रेक पर प्रतिमा रखते हैं। ट्रेक आगे बढ़ते हुए प्रतिमा को पानी में विसर्जित कर देता है। हालांकि, अब भी कुछ युवा ऐसे हैं जो उत्साह में आकर प्रशासनिक दिशा-निर्देशों को नजर अंदाज करते हैं। कई बार इन्हें प्रशासनिक सख्ती का भी सामना करना पड़ता है।


जिम्मेदारी से करना चाहिए नियमों का पालन- अपील

प्रशासन हर साल प्रतिमा विसर्जन से पहले ही घाट पर आने वाले लोगों से दिशा-निर्देश का पालन करने और नियम अनुसार प्रतिमा विसर्जन करने की अपील करता है। ऐसे में खासतौर पर युवाओं को उन दिशा-निर्देशों का जिम्मेदारी के साथ पालन करना चाहिए और उत्साह में आकर कोई गलत फैसला लेने से बचना चाहिए। साथ ही, अपने आसपास भी कोई उत्साह में आकर कोई नियम के विरुद्ध कार्य करता दिखे तो उसे प्रेम के साथ समझाना चाहिए। क्योंकि, हमारा जीवन हमारे परिवार वालों के लिए अनमोल होता है। ऐसे में कोई छोटी सी गलती हमारे परिवारों के लिए कितनी भारी सिद्ध हो सकती है ? कुछ सेकंड के लिए इसपर भी गौर करना जरूरी है।


क्या थे उनके नाम ?

1- परवेज़ पिता सईद खान उम्र 15 साल निवासी 1100 क्वाटर पिपलानी।

2- रोहित मौर्य पिता नंदू मौर्य उम्र 30 साल निवासी 1100 क्वाटर पिपलानी।

3- करण पिता...... उम्र 16 साल निवासी 1100 क्वाटर पिपलानी।

4- हर्ष पिता ..... उम्र 20 साल निवासी 1100 क्वाटर पिपलानी।

5-सन्नी ठाकरे पिता नारायण ठाकरे उम्र 22 साल निवासी 1100 क्वाटर पिपलानी।

6- राहुल वर्मा पिता मुन्ना वर्मा उम्र 30 साल निवासी 1100 क्वाटर पिपलानी।

7- विक्की पिता रामनाथ उम्र 28 साल निवासी 1100 क्वाटर पिपलानी।

8-विशाल पिता राजू उम्र 22 साल निवासी 1100 क्वाटर पिपलानी।

9-अर्जुन शर्मा पिता......उम्र 18 साल निवासी 1100 क्वाटर पिपलानी।

10-राहुल मिश्रा पिता ......उम्र 20 साल निवासी 1100 क्वाटर पिपलानी।

11- करण पिता पन्नालाल उम्र 26 साल निवासी 1100 क्वाटर पिपलानी।