
Sagar Liquor Tragedy: हटाए जा सकते है सागर कलेक्टर और SP (फोटो सोर्स- Patrika)
Sagar Liquor Tragedy: सागर शराब कांड में सोमवार को भी नकली शराब के सेवन से प्रभावित होने वाले लोगों के निधन होने का सिलसिला जारी रहा। इस मामले ने जिले की प्रशासनिक व पुलिस व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए हैं। हालात ऐसे ही बने रहे तो सरकार को कलेक्टर प्रतिभा पाल को हटाने पर विचार करना पड़ सकता है। जबकि पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया का नपना लगभग तय है।
नकली शराब से जुड़े इस मामले ने देशभर में मप्र की किरकिरी की है। आम लोग इस पर सवाल उठा रहे हैं तो विपक्ष भी आक्रामक है। वहीं इस पूरे मामले में सोशल मीडिया पर एसपी सुजानिया के खिलाफ आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रही है। इसकी वजह 2021 का मुरैना शराब कांड है, जिसमें 24 निर्दोषों का निधन हुआ था। तब मुरैना की पुलिस कप्तानी सुजानिया के पास ही थी।
उधर, अप्रैल 2026 से सागर का जिला प्रशासन आइएएस प्रतिभा पाल के पास है। उनके जॉइन करने के बाद मई में ही पता चल चुका था कि ललितपुर का गिरोह सागर के बंडा समेत कई क्षेत्रों में नकली शराब पहुंचा रहा है। इस मामले को हल्के से लेना दोनों ही प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता से जुड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले में यदि पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई नहीं की तो कलेक्टर को संज्ञान में लेना था जो कि नहीं लिया गया।
सागर जिले का जिम्मा दो डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल के पास है। चूंकि देवड़ा के पास आबकारी विभाग है इस नाते जिले में शराब के अवैध कारोबार को रोकना उनके काम का अहम हिस्सा था। जबकि डिप्टी सीएम शुक्ल के पास सागर का प्रभार है, इस नाते जिले में जारी अंदरूनी गतिविधियों पर उनकी नजर होनी थी। लोगों का कहना है कि दोनों डिप्टी सीएम अपनी जिम्मेदारी ठीक से पूरी करने में चूके हैं। यही नहीं, गोविंद सिंह राजपूत इसी जिले से सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं तो विधायक गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह पूर्व में मंत्री रह चुके हैं और जिले में सक्रिय भी हैं।
अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि राजनीतिक दृष्टि से मजबूत रहे सागर में जहरीली शराब को काल बनने से क्यों नहीं रोका गया? चूंकि सरकार को पहले से पता था कि विंध्य में सूखा नशा घर कर गया है। समीक्षा बैठकों में कई बार उक्त नशे का कारोबार करने वालों का नेटवर्क तोड़ने की बात हो चुकी थी। लगातार ड्रग का अवैध कारोबार सामने आ रहा था। विशेषज्ञों की मानें तो ये एक तरह से डिप्टी सीएम, गृह जिलों के मंत्री, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और पुलिस के लिए अलर्ट था लेकिन किसी भी स्तर पर गंभीरता से नहीं लिया गया।
आंकड़े छिपा रही सरकार, असली नंबर 50 से अधिक: कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी सोमवार को सागर में नकली शराब से प्रभावित गांवों पर पहुंचे। पटवारी ने यहां दावा किया कि क्षेत्र में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई और सरकार आंकड़े छिपा रही है। उन्होंने छापरी, बम्हूरा, चौका, हिनौती, दलपतपुर, धुरमार, गूगरा, नौराज पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। कहा. पूरा नेटवर्क प्रशासनिक संरक्षण में चल रहा था। उन्होंने आबकारी मंत्री से भी इस्तीफे की मांग की।
भाजपा नेता के परिवार चला रहे कारोबारः नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सागर में जहरीली शराब से हुई जनहानि और मध्यप्रदेश में अवैध शराब के नेटवर्क भाजपा नेताओं के परिवारों से जुड़े होने का आरोप लगाया। उन्होंने सरकार पर जिम्मेदारों और डिस्टलरी मालिकों को बचाने का भी आरोप लगाया। राजधानी में सोमवार को मीडिया से चर्चा में उन्होंने कहा, सरकार और आबकारी विभाग शराब के नेटवर्क के उत्तर प्रदेश से जुड़े होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि शराब का नेटवर्क उत्तर प्रदेश नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के उज्जैन से जुड़ा है।
सवेदनशील मुद्दे पर राजनीति नहीं करे कांग्रेसः डिप्टी सीएम और आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा ने मीडिया से बातचीत में कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि सवेदनशील समय में राजनीति नहीं करना चाहिए। सरकार इस मामले में पूरी तरह गंभीर है। और जांच के बाद किसी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा। देवड़ा ने कहा, सीएम ने घटना पर तत्काल संज्ञान लेते हुए तीन अधिकारियों को निलंबित किया है। सरकार इस बात का पता लगा रही है कि सागर में जहरीली शराब कहां से और कैसे तैयार हुई। घटना की जड़ तक पहुंचना सबसे ज्यादा जरूरी है। 20 पर एफआइआर और 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
Updated on:
8 Sep 2026, 7:32 AM IST
Published on:
8 Sep 2026, 7:32 AM IST
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