भले ही श्रीकृष्ण के माता-पिता देवकी और वासुदेव थे, लेकिन बचपन से ही उनका पालन-पोषण यशोदा और नंद ने किया था। ऐसी भविष्यवाणी की हुई थी कि देवकी और वासुदेव का आठवां पुत्र कंस की मृत्यु का कारण बनेगा। इस भविष्यवाणी को सच होने से रोकने के लिए राजा कंस ने अपनी बहन देवकी और वासुदेव को बंदी बना लिया और कई सालों के लिए उन्हें कारागार में डाल दिया था। इतना ही नही इस दौरान देवकी ने जिन छ संतानों को जन्म दिया कंस ने उनका भी वध कर दिया। लेकिन श्रीकृष्ण के जन्म के समय वासुदेव बालकृष्ण को भगवान के निर्देशानुसार वृंदावन के नंद गांव में यशोदा और नंद को सौंप आए, जहां कृष्ण ने अपना बचपन बिताया और कुछ सालों बाद उन्होंने कंस का वध कर भविष्यवाणी को सही साबित किया।