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एलएचबी कोच से आरामदेह और सुरक्षित होगा सफर

रेवांचल, जनशताब्दी, हमसफर के बाद बाकी ट्रेनों में लगेंगे
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भोपाल

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Rohit Prasad Verma

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Updated: 12 May 2022, 1:40 AM IST

रेवांचल, जनशताब्दी, हमसफर के बाद बाकी ट्रेनों में लगेंगे

रेवांचल, जनशताब्दी, हमसफर के बाद बाकी ट्रेनों में लगेंगे

भोपाल. रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से चलने वाली रेवांचल स्पेशल एक्सप्रेस समेत चार और ट्रेनों में एलएचबी कोच लगाने के बाद बाकी यात्री गाडिय़ों में नई तकनीक के कोच लगाने की तैयारी है। रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद इन ट्रेनों को जर्मन कंपनी ङ्क्षलक हॉफमैन बुश (एलएचबी) के तकनीकी सहयोग से बनाए जाने वाले आधुनिक कोच आवंटित किए जाएंगे। भोपाल रेल मंडल ने अन्य ट्रेनों के लिए एलएचबी कोच मांगे हैं।

ये कोच यात्रियों को ज्यादा आरामदायक अनुभव देने के साथ-साथ तेज गति से दौडऩे में सक्षम होते हैं। इनकी बनावट पुरानी डिजाइन के कोचों से अधिक टिकाऊ और सुविधाजनक होती है। बर्थ गद्दीदार होती है और बार-बार सुधार की जरूरत नहीं पड़ती है। इस तरह के कोच भोपाल रेल मंडल की भोपाल, जनशताब्दी, हमसफर एक्सप्रेस ट्रेनों को मिल चुके हैं। सबसे बड़ी बात ये कि यह कोच 100 से ज्यादा रफ्तार पर भी बैलेंस रहते हैं और यात्रियों को खटर पटर की आवाज सुनाई नहीं देती।

एलएचबी और आईसीएफ कोच में अंतर
एलएचबी कोच में एंटी टेलीस्कोपिक सिस्टम होता है, जिसके कारण इसके डिब्बे आसानी से पटरी से नहीं उतर पाते हैं। इसके डिब्बे स्टेलनेस स्टील और एल्यूमोनियम के बने होते हैं, जबकि आईसीएफ कोच माइल्ड स्टील के बने होते हैं जो इसके झटके सहने की क्षमता को कम करते हैं और दुर्घटना का कारण बनते हैं।
एलएचबी कोच में ***** ब्रेक सिस्टम होता है, जिससे ट्रेन को जल्दी रोका जा सकता है। जबकि आईसीएफ कोच में एयरब्रेक और थ्रेड सिस्टम होता है, जिससे चलती ट्रेन को रोकने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है।
एलएचबी कोच का व्हील बेस आईसीएफ कोच के मुकाबले छोटा होता है जो हाई स्पीड होने पर भी रेल को सुरक्षित रखता है। इससे दुर्घटना के चांस कम होते हैं।
एलएचबी को हर पांच लाख किलोमीटर पर मेंटेनेंस की आवश्यकता होती है। आईसीएफ कोच को हर दो लाख से चार लाख किलोमीटर के बीच मेंटेनेंस पर आवश्यकता होती है।
एलएचबी कोच में अगर आप बैठेंगे तो ट्रेन के चलने की आवाज आपको ज्यादा परेशान नहीं करेगी। इसका साउंड लेवल 60 डेसीबल का होता है, जबकि आईसीएफ कोच का साउंड लेबल 100 डेसीबल होता है।
एलएचबी कोच की अधिकतम स्पीड 110 से 160 किलोमीटर होती है, जबकि आईसीएफ कोच की स्पीड 70 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा की होती है।
पटरियों पर 60 प्रतिशत कोच आईसीएफ व 40 प्रतिशत ही एलएचबी के दौड़ रहे हैं।