scriptUrban housing schemes running in bhopal are under question | सवालों के घेरे में: राजधानी में चल रहीं शहरी आवास योजनाओं से लगातार बिगड़ रही शहर की सूरत | Patrika News

सवालों के घेरे में: राजधानी में चल रहीं शहरी आवास योजनाओं से लगातार बिगड़ रही शहर की सूरत

4000 करोड़ रुपए से अधिक 12 साल में खर्च, लेकिन झुग्गियां-गुमठियां वहीं की वहीं

भोपाल

Published: June 07, 2022 11:39:35 am

भोपाल। राजधानी से स्लम खत्म करने के नाम पर बीते 12 साल में 4000 करोड़ रुपए से अधिक राशि के खर्च पर सवाल उठ रहे हैं। कम होने की बजाय इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्लम वासियों को पक्के मकान देने काम किया जा रहा है, लेकिन स्लम है कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा। यही स्थिति शहर में 50 हजार से अधिक गुमठियों की है। इनके लिए भी दिखावे का ही काम हुआ।

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स्लम-अवैध कॉलोनी में 7 लाख की आबादी
भोपाल मास्टर प्लान तैयार करने के लिए किए गए सर्वे में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। शहर की 23 लाख आबादी में से सात लाख स्लम और अवैध कॉलोनियों में निवास करती है। स्लम निवासियों की बात करें तो इनकी संख्या तीन लाख से अधिक है। सात लाख की ये आबादी प्रदेश के किसी भी छोटे शहर की कुल आबादी के बराबर है।

रोज कार्रवाई, फिर भी 50 हजार गुमठियां
शहर में अतिक्रमण अमला रोजाना अलग-अलग क्षेत्रों में 40 से अधिक गुमठियां हटाता है, बावजूद इसके शहरभर में 50 हजार निगम में दर्ज गुमठियां हैं। इनकी संख्या इससे अधिक हो सकती है। हर दिन ये कम होने की जगह बढ़ रही है, जबकि गुमठी विस्थापन के लिए बीते सालों में हॉकर्स कॉर्नर व अन्य कामों पर करोड़ों रुपए खर्च हुए हैं।

ये करना चाहिए: पूर्व प्रशासनिक अधिकारी एसके गुप्ता का कहना है कि निगम व जिला प्रशासन को सबसे पहले नई झुग्गियों पर रोक लगाना चाहिए। इनके बनते ही तुरंत हटाने की व्यवस्था हो। संबंधित क्षेत्र के अफसर- इंजीनियर की जिम्मेदारी तय कर देना चाहिए। झुग्गी विकसित होने पर कार्रवाई की जाना चाहिए। सामूहिक तौर पर स्लम एरिया को खाली करवाकर शिङ्क्षफ्टग करना चाहिए, इक्का दुक्का से बात नहीं बनती है।

सफल नहीं हुईं करोड़ों की योजनाएं
: राजीव आवास योजना के तहत ईडब्ल्यूएस आवास बनाने 700 करोड़ रुपए का बड़ा बजट खर्च किया गया। स्थिति ये हैं कि भानपुर में इन योजना के अधिकांश आवास खाली पड़े हैं। इनपर कब्जा हो गया। सही आवंटित नहीं हो पाए।
: जेएनएनआरयूएम के तहत 800 करोड़ रुपए शहरी गरीबों के लिए आवास बनाने काम हुआ। शहरभर में 18 से अधिक जगहों पर आवास बनाने का दावा किया, लेकिन स्लम खत्म नहीं हुए।

: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब 1500 करोड़ रुपए से अधिक राशि से काम किया जा रहा है। यहां तय समय से दो साल देरी से काम चल रहा, गुणवत्ता भी खराब है। अभी आवंटन की कवायद की जा रही है।
इसलिए नहीं खत्म हो रही झुग्गी
: सरकारी आवास परिवार के प्रमुख सदस्य के नाम आवंटित कराने के बावजूद परिवार के कुछ सदस्य वह झुग्गी नहीं छोड़ते हैं। यदि निगम आवास आवंटन के बाद झुग्गी तोड़ भी देता है तो उसी क्षेत्र में अन्य किसी सरकारी जगह पर झुग्गी तान ली जाती है।
: सरकारी आवास 350 वर्गफीट का होता है, जबकि झुग्गी में 1000 से 1500 वर्गफीट की जमीन घेरी हुई होती है। बड़े मकान को छोड़कर पक्के आवास में जाना पसंद नहीं किया जाता।

: स्थानीय जनप्रतिनिधि वोट बैंक की राजनीति के तहत झुग्गी विस्थापन का विरोध करते हैं। ऐसे में पक्का आवंटित आवास किराए पर चलवा दिया जाता है और परिवार वहीं स्लम में रहता है।
हाउसिंग फॉर ऑल के तहत लगातार आवास तैयार हो रहे हैं और शिफ्टिंग की जा रही है। स्लम फ्री सिटी बनाना हमारा लक्ष्य है और जल्द ही इसे हम प्राप्त कर लेंगे। गुमठियां हटवाई जा रही हैं। तय हॉकर्स कॉर्नर में शिफ्ट करेंगे। नए हॉकर्स कॉर्नर भी बनाएंगे। रोड पर गुमठी नहीं लगने दी जाएंगी।
- केवीएस चौधरी, निगमायुक्त

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