
(भुवनेश्वर): कंधमाल की हल्दी को जीआई टैग मिल गया। इसके चिकित्सीय गुण के कारण भी दावा मजबूत हुआ था। इसे नकदी वाली फसल भी क्षेत्र में कहा जाता है। अब कंधमाल की हल्दी को विधिक संरक्षण मिल गया। इसे वैश्विक पहचान भी मिल गई। हल्के लाल रंग की कंधमाल की हल्दी की सुगंध विशेष है। इसकी औषधीय उपयोगिता के कारण भी यह चर्चित है।
ओडिशा सरकार की ओर से कंधमाल हल्दी की भौगोलिक मान्यता (जीआइ टैग) को लेकर आवेदन प्रस्तुत किया गया था। रसगुल्ला हाथ से निकलने के बाद सरकार थोड़ा सावधान थी। सरकार की ओर से सेंट्रल टूल रूम एवं ट्रेनिंग सेंटर (सीटीआटीसी) द्वारा की गई इस अर्जी के संबंध में संस्था प्रमुख सचिकांत कर ने बताया कि कंधमाल हल्दी की गुणवत्ता एवं इसकी स्वतंत्रता पर पिछले 2 साल से अनुसंधान जारी था। अब पूरे तथ्य के साथ जीआइ टैग के लिए आवेदन कर दिया गया। देश के अन्य स्थन पर उत्पादित हल्दी के मुकाबले कंधमाल हल्दी का रंग सोने सा सुर्ख है और ये उत्तम गुण वाली पाई गई है। कंधमाल की करीब 15 प्रतिशत आबादीहल्दी की खेती से जुड़ी हुई है। जीआई टैग मिल जाने से इसे विश्व बाजार में एक स्वतंत्र स्थान मिल पाएगा।
यह है हल्दी के सोने सा खरा बनने का कारण
स्थानीय लोग ही नहीं शासन तंत्र भी कंधमाल हल्दी को स्वतंत्रता का प्रतीक यानी अपनी उपज मानता है। विशेषज्ञों के मुताबिक हल्का लाल रंग लिए कंधमाल की हल्दी गुणवत्ता के मामले में बहुत आगे है। इसका औषधीय उपयोग करने पर किसी तरह के दुष्प्रभाव की संभावना नहीं रहती है। इसकी खासियत यह है कि इसके उत्पादन में किसानों द्वारा किसी तरह के कीटनाशक का प्रयोग नहीं किया जाता है।
Published on:
1 Apr 2019, 6:43 PM IST
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