
बीजापुर-सुकमा में अब शिक्षादूत सड़क पर (photo source- Patrika)
CG News: कभी जहां स्कूल की घंटी बजाना भी चुनौती था, जहां चौखट पर कदम रखते ही जान का डर साथ चलता था। उसी बीजापुर-सुकमा के नक्सल प्रभावित इलाकों में वर्षों तक बच्चों के हाथों में किताबें थमाने और स्कूलों में पढ़ाई को फिर से जिंदा करने वाले शिक्षादूत अब खुद अपने भविष्य की लड़ाई लड़ रहे हैं। गुरुवार को 457 शिक्षादूतों ने बीजापुर कलेक्टर के माध्यम से राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर नियुक्ति, सुरक्षा और समान की मांग उठाई।
गौरतलब है कि 2018-19 से शासन व ग्रामीणों के सहयोग से बंद स्कूलों को फिर खोला गया। बीजापुर के 350 और सुकमा के 107, कुल 457 शिक्षादूत गोंडी, हल्बी, माड़िया, तेलुगू, दोरला जैसी स्थानीय बोलियों में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। नक्सलियों के बीच जोखिम उठाकर शिक्षादूतों ने 15,500 बच्चों के भविष्य को दिशा दी, लेकिन अब खुद रोजगार और सुरक्षा की चिंता से घिरे हैं।
संघ का कहना है कि हमने बच्चों की राह रोशन की, अब शासन हमारा भविष्य सुरक्षित करे। संघ ने बताया कि कई शिक्षादूतों की हत्या नक्सलियों ने ‘मुखबिर’ होने के शक में कर दी। उनकी कुर्बानी को देखते हुए शहीद का दर्जा, 50 लाख मुआवजा और अनुकंपा नियुक्ति दी जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में धीरेंद्र वेंजाम (संभाग अध्यक्ष), सुरेश कोराम (जिलाध्यक्ष बीजापुर), विजय मुचाकी (कोषाध्यक्ष), गंभीर तेलाम (सचिव) सहित संघ के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
बंद स्कूलों में कार्यरत शिक्षादूतों का नियमितीकरण, या 5000 शिक्षक भर्ती में विशेष प्राथमिकता
नक्सलियों द्वारा मारे गए शिक्षादूतों को शहीद का दर्जा, 50 लाख मुआवजा व अनुकंपा नियुक्ति
TET से छूट, D. El. Ed के आधार पर स्थानीय ST, SC, OBC की नेल्लानार नीति के तहत नियुक्ति
Published on:
21 Nov 2025 04:25 pm
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