मनोज सारस्वत बताते है कि माता गोमती देवी के आदेश पर गोशाला की स्थापना की। धीरे-धीरे आस-पास के गांवों में निराश्रित, बीमार घूमने वाले गोवंश को लाकर गोशाला में रखना शुरू किया। चारदीवारी, शैड निर्माण, पानी की खेळी, पानी की टंकियों का निर्माण, ठाकुर जी के मंदिर की स्थापना आदि कार्य आगे से आगे होते गए। ग्रामीण भी सहयोग के लिए आगे आते गए, लोग जुड़ते गए और कारवां बढ़ता गया।