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गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने किया भारत-पाक सीमा का दौरा: कहा- पड़ोसी का इलाज करना जानते हैं सुरक्षा बल

केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश की साढ़े बाईस हजार किलोमीटर लम्बी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर चौकसी व सुरक्षा को और ज्यादा मजबूत किया जाएगा।
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बीकानेर

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dinesh kumar swami

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Updated: 20 Oct 2018, 8:27 AM IST

Home Minister Rajnath Singh

Home Minister Rajnath Singh

अतुल आचार्य/रितेश यादव/बीकानेर/खाजूवाल. केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश की साढ़े बाईस हजार किलोमीटर लम्बी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर चौकसी व सुरक्षा को और ज्यादा मजबूत किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने काम शुरू कर दिया है। इजराइल की तर्ज पर कम्प्रीहेंसिव इंटीग्रेटड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम (सीआईबीएमएस) को अपनाया है।

अभी जम्मू-कश्मीर में दस किलोमीटर सीमा पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसे शुरू किया है। नवम्बर में साठ किलोमीटर और सीमा पर इसे शुरू किया जाएगा। गृहमंत्री शुक्रवार को भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर की सीमा चौकियों का निरीक्षण करने खाजूवाला क्षेत्र पहुंचे थे। उन्होंने सीमा पर तैनात जवानों से बातचीत की और उनकी समस्याएं व जरूरतों को जाना।

गृहमंत्री ने कहा कि अभी बॉर्डर पर तैनात बीएसएफ ने फुटप्रिंट को पहचानने के लिए खुरा पार्टी तक बना रखी है। भविष्य में इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके लिए तकनीकी व्यवस्था की जा रही है। बॉर्डर पर सेंसर और रडार लगाए जाएंगे, जो बीस-पच्चीस किलोमीटर दूर से जानवर और आदमी के आने पर अलर्ट कर देंगे।

साढ़े तीन साल पहले देखी तकनीक
गृहमंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा को चुस्त-दुरुस्त बनाने तथा सीमा प्रहरियों का तनाव और दबाव कम करने के लिए काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि साढ़े तीन साल पहले इजराइल गया था। वहां सीआईबीएमएस को देखा। इसे जम्मू में दस किलोमीटर में शुरू किया गया है। असम की धूरी में साठ किलोमीटर सीमा पर नवम्बर-दिसम्बर में प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। तारबंदी वाली राजस्थान और पंजाब से सटी सीमा पर भी इस तरह की तकनीक का प्रयोग किया जाए।

बीएसएफ देश का सुदर्शन चक्र
राजनाथ सिंह ने बॉर्डर पर जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि सीमा पर तैनात प्रहरियों की परिवार से महीनों तक बात नहीं होती। बॉर्डर पर मोबाइल कनेक्टिविटिज नहीं रहती। अब एेसी व्यवस्था की जाएगी कि जवान अपने परिवार के सदस्यों से जब चाहें सीधे बात कर सकें। बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स ने नक्सलवाद, आतंकवाद और कानून व्यवस्था के खतरे के हालात में करिश्माई काम किए हैं। इससे लगता है कि हमारा बीएसएफ सुर्दशन चक्र है।

भारत-पाक बॉर्डर सबसे संवेदनशील
गृहमंत्री ने कहा कि देश में साढ़े २२ हजार किलोमीटर लम्बी अंतरराष्ट्रीय सीमा हैं। इसमें से करीब १५ हजार ७०० किमी जमीनी कवर क्षेत्र है। जबकि शेष सात हजार किलोमीटर जल और पहाड़ी दुर्गम सीमा है। इनमें सबसे संवेदनशील भारत-पाकिस्तान बॉर्डर को मानते हैं। इसकी सुरक्षा और निगरानी में बीएसएफ पूरी तरह सक्षम है।

पड़ोसी है कि मानता ही नहीं
गृहमंत्री ने कहा कि एलओसी पर भी समस्या है। वहां सेना के जवान डटे हुए हैं। वहां भी सेना के साथ बीएसएफ जिम्मेदारी संभाल रही है। पाकिस्तान कश्मीर में जिस तरह के हालात पैदा करना चाहता है, उसके हौसले आज नहीं तो कल पस्त होंगे। दुनिया की कोई ताकत इसे रोक नहीं सकती। हमने अपनी तरफ से भरपूर कोशिश की है। पड़ोसी है, उससे रिश्ते अच्छे बनाकर रखना चाहते है,ं लेकिन पड़ोसी एेसा है कि मानता ही नहीं। हरकतें करता रहता है। सीमा पर तैनात सुरक्षा बल हकीकत समझ चुके हैं कि एेसे पड़ोसी का इलाज कैसे करना है। जब जरूरत पड़ती है, उसका सही इलाज कर देते हैं।