पानी की मटकी के गोल हिस्से पर पहले तालाब की चिकनी मिट्टी लगाई जाती है। इसके बाद मिट्टी से कंस के दो सिंग बनाए जाते हैं। ललाट पर मिट्टी से आडम्बर बनाया जाता है। आंखे, नाक, कान, मुंह, मूंछ और जिह्वा भी मिट्टी से ही बनाए जाते है। काजल और कुमकुम का उपयोग रंग के रूप में किया जाता है। दांतों के लिए मिट्टी से बने बतरने अथवा कौडियों का उपयोग किया जाता है। कई स्थानों पर पेंट और शर्ट में कपड़े डालकर कंस के हाथ और पांव भी बनाए जाते है।