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पहले ट्रांसफर, फिर यू-टर्न: राजस्थान में प्रयोगशाला सहायक और तृतीय श्रेणी पुस्तकालय अध्यक्षों के तबादला आदेश रद्द

Rajasthan Education Department: माध्यमिक शिक्षा विभाग में 10 जुलाई को जारी कुछ तबादला आदेश उसी दिन निरस्त होने से विवाद खड़ा हो गया। प्रयोगशाला सहायक, पुस्तकालयाध्यक्ष ग्रेड-3 और एक व्याख्याता के ट्रांसफर वापस लेने पर पारदर्शिता, बैक डेट और तबादला प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
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Rajasthan Education Department

Rajasthan Cancels Transfer Orders (Photo-AI)

Rajasthan Cancels Transfer Orders: बीकानेर: माध्यमिक शिक्षा विभाग में तबादलों को लेकर एक गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। विभाग द्वारा 10 जुलाई 2026 को जारी किए गए स्थानांतरण आदेशों में से कुछ को उसी दिन अलग-अलग कार्यालय आदेश जारी कर निरस्त कर दिया गया। एक ही दिन में आदेश जारी होने और फिर तुरंत वापस लिए जाने से पूरी तबादला प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी स्थानांतरण आदेश को उसी दिन निरस्त ही करना था, तो उसे जारी ही क्यों किया गया? क्या विभाग ने बिना किसी पर्याप्त परीक्षण के जल्दबाजी में सूची जारी कर दी, या फिर इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कोई और बड़ी वजह है?

इन मामलों से गहराया संदेह

व्याख्याता का तबादला निरस्त: अंग्रेजी विषय की व्याख्याता सरस्वती कंवर का स्थानांतरण रामपुरा रूप (टोंक फाटक, जयपुर) से पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय (देवन, जयपुर) किया गया था। लेकिन इसी दिन एक और आदेश जारी कर इस स्थानांतरण को सरस्वती कंवर की सीमा तक प्रत्याहृत (निरस्त) कर दिया गया।

बड़ी संख्या में पद निरस्त: 10 जुलाई को ही जारी एक अन्य आदेश में प्रयोगशाला सहायक (क्रम संख्या 194 से 238) तथा पुस्तकालयाध्यक्ष ग्रेड-3 (क्रम संख्या 239 से 278) के स्थानांतरण भी तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए।

बैन के बाद 'बैक डेट' का खेल?

इन आदेशों ने प्रशासनिक हलकों में इसलिए भी संदेह पैदा कर दिया है क्योंकि 10 जुलाई से राज्य में तबादलों पर पूर्ण रूप से रोक (बैन) लागू हो चुकी थी। ऐसे में यदि उसी तारीख के आदेश बाद में निरस्त किए जा रहे हैं, तो यह आशंका स्वाभाविक रूप से उठ रही है कि क्या कुछ स्थानांतरण आदेशों को बैक डेट में जारी करने का प्रयास किया गया? यदि ऐसा नहीं था, तो फिर एक ही दिन में आदेश जारी कर उन्हें वापस लेने की इतनी जल्दबाजी क्यों पड़ी?

शिक्षक संगठन का कहना है कि प्रशासनिक प्रक्रिया में एक ही दिन आदेश जारी करना और फिर उसी दिन उसे निरस्त करना सामान्य प्रक्रिया नहीं है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगते हैं और यह संदेह गहराता है कि प्रक्रिया में जल्दबाजी, राजनीतिक दबाव या कोई अन्य गड़बड़ी रही है। जब तक शिक्षा विभाग इन सवालों के आधिकारिक और संतोषजनक जवाब नहीं देता, तब तक स्थानांतरण प्रक्रिया पर उठ रहे संदेह और गहराते नजर आ रहे हैं।

विभाग और सरकार के सामने बड़े सवाल

  • एक ही दिन स्थानांतरण और निरस्तीकरण (रोलबैक) की नौबत क्यों आई?
  • क्या सूचियां जारी करने से पहले रिक्त पदों और पात्रता का आवश्यक परीक्षण नहीं किया गया था?
  • यदि तबादलों पर रोक लागू हो चुकी थी, तो इन आदेशों की वैध स्थिति क्या थी?
  • क्या पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी?