मंडली मेरी नित खुश रहे
बिस्सा चौक में होने वाली नौटंकी शहजादी रम्मत के उस्ताद किशन कुमार बिस्सा के अनुसार अलाप ‘शिव शिव रटे, ंसंकट कटे, दुष्मन हटे घबराए के, काशी विश्वेश्वर नाथ जी मोरी मदद करजो आय के, गणराज कर सिद्ध काज अब मोरी लाज तोरी हाथ है, कर जोड करता बंदगी रिद्ध सिद्ध दोनो साथ है, शंकर दिगम्बर है पिता, गवरजा तुम्हारी मात है, भक्तन के कारज सिद्ध करो, त्रिलोकी के तुम नाथ हो, गुरु जागनाथ उस्ताद जी जिनका मेरे सिर हाथ है,मंडली मेरी नित खुश रहे, महफिल में मेरे साथ है ’ का गायन किया जाता है। वहीं बारह गुवाड़ चौक स्वांग मेहरी रम्मत के कलाकार विजय कुमार ओझा के अनुसार अलाप में मां सरस्वती और उस्ताद की चरण वंदना कर अखाडा तनसुख दास का वर्णन किया जाता है। भट्ठड़ो का चौक, सुनारो की गुवाड़ स्वांग मेहरी रम्मत की शुरूआत में अलाप का गायन होता है।