शनिवार की सुबह पक्षियों की चहचाहट देरी से सुनाई दी। भोर में घरों की खुली झिर्रियों से सर्द हवा की सुरसुराहट ने धूजणी छुड़ा दी। लोगों ने पट खोले, तो घना कोहरा दरवाजे पर खड़ा चौखट लांघने की कोशिश करने लगा। सड़कें वीरान रहीं। इक्का-दुक्का वाहन दिखे भी, तो दृश्यता बेहद कम होने के कारण उन्हें हेडलाइट जला कर चलना पड़ा। सूर्य के दर्शन भी देरी से हुए। जो लोग सुबह सूर्य को अर्ध्य देते हैं, उन्होंने भी कोहरे में छिपे सूर्य को ही अर्घ्य देकर संतोष किया। मकानों की छतों तथा बगीचों में पक्षियों के लिए रखे पानी के पालसियों पर ओस की परतें जमी दिखीं।