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हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद 8 कर्मचारियों की बर्खास्तगी, सरकार पर उठे सवाल, जानें पूरा मामला…

Bilaspur High Court order: छत्तीसगढ़ में Chhattisgarh High Court के बहाली निर्देश के बावजूद 8 कर्मचारियों को बर्खास्त करने पर विवाद खड़ा हो गया है। कोर्ट ने इसे प्राकृतिक न्याय के खिलाफ बताया है।

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8 कर्मचारियों की बर्खास्तगी (photo source- Patrika)

8 कर्मचारियों की बर्खास्तगी (photo source- Patrika)

CG Employee Terminate: छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों से जुड़ा एक अहम मामला सामने आया है, जिसमें Chhattisgarh High Court ने राज्य सरकार के फैसले को सख्ती से खारिज कर दिया है। बता दें बिलासपुर हाईकोर्ट ने Chhattisgarh Council of Science and Technology के 8 कर्मचारियों की सेवा समाप्ति को अवैध ठहराते हुए राज्य सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अधिकारियों ने “प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों” का पालन नहीं किया और बिना उचित जांच व सुनवाई के ही बर्खास्तगी कर दी गई, जो निंदनीय है।

CG Employee Terminate: अनुच्छेद 311(2) का उल्लंघन

कोर्ट ने माना कि कर्मचारी नियमित होने के बाद संविधान के अनुच्छेद 311(2) के तहत सुरक्षा के हकदार थे। इसके अनुसार किसी भी सरकारी कर्मचारी को बिना विभागीय जांच और सुनवाई के सेवा से नहीं हटाया जा सकता। हाईकोर्ट ने 21 सितंबर 2020 के बर्खास्तगी आदेश और 17 मार्च 2021 के अपील आदेश को मनमाना और गैर-कानूनी बताते हुए रद्द कर दिया। साथ ही सभी 8 कर्मचारियों को सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

इन कर्मचारियों की नियुक्ति वर्ष 2012 में चतुर्थ श्रेणी पद पर हुई थी। प्रोबेशन पूरा होने के बाद भी नियमितीकरण नहीं हुआ, तो उन्होंने अभ्यावेदन दिया। इसके बाद वेतन में कटौती कर दी गई, जिसे पहले ही हाईकोर्ट अवैध ठहरा चुका था। कोर्ट के निर्देश के बावजूद राज्य सरकार ने नियमितीकरण पर निर्णय लेने के बजाय नियुक्ति प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण बताते हुए 2020 में सभी कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया।

CG Employee Terminate: कोर्ट का बड़ा संदेश

जस्टिस बीडी गुरु की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि 6-7 साल तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को बिना ठोस कारण और प्रक्रिया के हटाना गलत है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारी यह साबित नहीं कर पाए कि कर्मचारियों ने नियुक्ति धोखाधड़ी से हासिल की थी। यह फैसला न केवल इन कर्मचारियों के लिए राहत है, बल्कि प्रशासन के लिए भी एक सख्त संदेश है कि बिना प्रक्रिया और सुनवाई के किसी के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता।

संबंधित खबरें: वकील की लापरवाही का हर्जाना मुवक्किल क्यों भुगते?

बिलासपुर हाईकोर्ट ने कहा है कि ऐसे मामलों में कोर्ट को उदार रवैया अपनाना चाहिए, जिसमें वकील की लापरवाही की वजह से किसी मुकदमा लड़ने वाले की गैर-मौजूदगी में फैसला सुनाया गया हो। वकीलों की लापरवाही या चूक के कारण मुकदमा लड़ने वालों को परेशानी या नुकसान नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि जब कोई पक्षकार वकील नियुक्त कर देता है, तो यह मानकर चलता है कि उसका मामला सही तरीके से पेश किया जाएगा।

जानें पूरा मामला

जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने यह टिप्पणी जमीन के विवाद में फंसे पक्षकारों के मामले में कई। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता अपना केस ठीक से लड़ नहीं पाए, क्योंकि उनके वकील ने उन्हें ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही के बारे में ठीक से जानकारी नहीं दी थी। जिसके कारण वे नियत समय के अंदर फैसले के खिलाफ याचिका नहीं लगा पाए थे, वहीं जब उन्होंने याचिका लगाई तो निर्धारित समयसीमा गुजरने की बात कहते हुए अदालत ने उनकी अपील को ठुकरा दिया था। जिसके बाद हाईकोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए इस मामले में हुई देरी को माफ़ कर दिया और ट्रायल कोर्ट को याचिकाओं पर उनके गुण-दोष के आधार पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया।