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प्रमोशन विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सहायक प्राध्यापक को नजरअंदाज कर जूनियर को प्रोफेसर बनाया, रिव्यू के निर्देश

High Court: बिलासपुर हाईकोर्ट ने प्रमोशन विवाद के एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए सहायक प्राध्यापक को प्रोफेसर पद पर प्रमोशन से वंचित करने की कार्रवाई को मनमाना और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ माना है।
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Bilaspur High Court

Bilaspur High Court: 'बहन का बदला' लेने निकले भाई(photo-patrika)

Bilaspur High Court: एसीआर में बिना जानकारी के प्रतिकूल टिप्पणी के आधार पर सहायक प्राध्यापक को प्रमोट न करने को बिलासपुर हाईकोर्ट ने मनमाना, नैचुरल जस्टिस के सिद्धांतों का उल्लंघन माना है। कोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग को 3 माह के अंदर रिव्यू डीपीसी कर याचिकाकर्ता को उसी दिन से प्राध्यापक के पद पर प्रमोशन देने का आदेश दिया है जिस दिन से उसके जूनियर को पदोन्नति दी गई है। कोर्ट ने सहायक प्राध्यापक को पदोन्नति वाला पे ग्रेड देने का आदेश भी दिया है। हालांकि वेतन का एरियर्स नहीं दिया जाएगा।

याचिकाकर्ता डॉ. सुनंदा मरावी शासकीय ई. राघवेंद्र राव स्नातकोत्तर विज्ञान महाविद्यालय, बिलासपुर में हिंदी विषय की सहायक प्राध्यापक हैं। उन्हें 28 जुलाई 2025 के आदेश से जानकारी मिली कि प्रोफ़ेसर के पद पर प्रमोशन के लिए एलिजिबल कैंडिडेट्स की लिस्ट में उनका नाम नहीं है। नाम शामिल करने प्रस्तुत उनके रिप्रेजेंटेशन को इस आधार पर रिजेक्ट कर दिया कि पिटीशनर एसीआर के इवैल्यूएशन में 13 माक्र्स का मिनिमम बेंचमार्क हासिल करने में फेल रही हैं।

योग्यता मापदंड पूरे किए

अधिवक्ता राहुल झा के माध्यम से उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि पिटीशनर ने प्रोफ़ेसर के पद पर प्रमोशन के लिए तय सभी जरूरी एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया पूरे किए। इसी बीच विभाग से 18 फरवरी 2025 को उन्हें बताया गया कि, साल 2011 की एनुअल कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट (एसीआर) में उनके खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी थीं। पिटीशनर को जरूरी डॉक्यूमेंट्स के साथ अपना रिप्रेजेंटेशन जमा करने का निर्देश दिया गया। इस पर उन्होंने 21 फरवरी 2025 को अलग-अलग जवाब दिया, जिसमें यह भी बताया गया कि उन्हें गलत एंट्री के बारे में कभी नहीं बताया गया।

फिर से विचार करने के निर्देश

याचिका पर जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू के कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर 28.जुलाई 2025 की सूचना रद्द करते हुए उच्च शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि, वे प्रोफ़ेसर के पद पर प्रमोशन के लिए याचिकाकर्ता के मामले पर फिर से विचार करने के लिए एक रिव्यू डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (रिव्यू डीपीसी) बुलाएं, जिसमें खराब एंट्री वाली बिना बताई गई एसीआर को नजरअंदाज किया जाए।

अगर रिव्यू डीपीसी पिटीशनर को प्रमोशन के लिए फिट पाती है और उसके नाम की सिफारिश करती है, तो उसे उसी तारीख से प्रमोशन दिया जाएगा जिस तारीख को उसके तुरंत जूनियर को प्रमोशन मिला था। साथ ही सभी फायदे भी दिए जाएंगे, जिसमें नोशनल सीनियरिटी और वेतनमान का फिक्सेशन शामिल है।